04/10/2024
"माँ! माँ बोलो ना !!!!"
नन्ही प्रिया, माँ के पीछे पीछे सारे घर में घूमती।
"तू तो सवालों का खज़ाना है। इत्ती छोटी सी उम्र में तुझे क्या क्या जानना है? चल ठीक है, पूछ। "
"माँ, ये आसमान इतना दूर क्यों है?
मछलियां बात क्यों नहीं कर सकतीं?
तारे टिमटिमाते क्यों हैं?
हम उड़ क्यों नहीं सकते?
फूल मुरझाते क्यों हैं?
हम रोते क्यों हैं?
मेरे दाँत टूटते क्यों हैं?"
प्रिया के मासूम सवालों की रेल चल पड़ी तो बस चल ही पड़ी।
माँ ने कहा, " अरी रुक जा रुक जा गुड़िया। इत्ती छोटी सी तू और इतने बड़े-बड़े सवाल? कहाँ से आते हैं तेरे दिमाग में?" माँ सोंच में पड़ गयी कि इस 4 साल की गुड़िया को कैसे समझाए? इन सवालों के जवाब कहाँ से लाये?
क्या आप मेरी इस कहानी को आगे बढ़ाने में मेरी मदद करेंगे?
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