Dil Ki Baat Dev Ke Saath

Dil Ki Baat Dev Ke Saath Writers Sayari Available Here.

सब्र वो है जब दिल फट रहा हो,और तुम खामोश रह जाओ...!😒❤️
12/07/2025

सब्र वो है जब दिल फट रहा हो,
और तुम खामोश रह जाओ...!😒❤️

तीन रंग का वस्त्र नहीं यह ध्वज देश की शान है...यही है गंगा, यही हिमालय, यही देश की जान है..!समस्त देश वासियों को भारतीय ...
15/08/2024

तीन रंग का वस्त्र नहीं यह ध्वज देश की शान है...
यही है गंगा, यही हिमालय, यही देश की जान है..!

समस्त देश वासियों को भारतीय स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

🇮🇳

15/08/2024
तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए तू ने कहा तो जी उठे तू ने कहा तो मर गए कट ही गई जुदाई भी कब ये हुआ कि मर गए तेरे भी द...
18/04/2024

तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए
तू ने कहा तो जी उठे तू ने कहा तो मर गए

कट ही गई जुदाई भी कब ये हुआ कि मर गए
तेरे भी दिन गुज़र गए मेरे भी दिन गुज़र गए

तू भी कुछ और और है हम भी कुछ और और हैं
जाने वो तू किधर गया जाने वो हम किधर गए

राहों में ही मिले थे हम राहें नसीब बन गईं
वो भी न अपने घर गया हम भी न अपने घर गए

वक़्त ही जुदाई का इतना तवील हो गया
दिल में तिरे विसाल के जितने थे ज़ख़्म भर गए

होता रहा मुक़ाबला पानी का और प्यास का
सहरा उमड उमड पड़े दरिया बिफर बिफर गए

वो भी ग़ुबार-ए-ख़्वाब था हम भी ग़ुबार-ए-ख़्वाब थे
वो भी कहीं बिखर गया हम भी कहीं बिखर गए

कोई कनार-ए-आबजू बैठा हुआ है सर-निगूँ
कश्ती किधर चली गई जाने किधर भँवर गए

आज भी इंतिज़ार का वक़्त हुनूत हो गया
ऐसा लगा कि हश्र तक सारे ही पल ठहर गए

बारिश-ए-वस्ल वो हुई सारा ग़ुबार धुल गया
वो भी निखर निखर गया हम भी निखर निखर गए

आब-ए-मुहीत-ए-इश्क़ का बहर अजीब बहर है
तैरे तो ग़र्क़ हो गए डूबे तो पार कर गए

इतने क़रीब हो गए अपने रक़ीब हो गए
वो भी 'अदीम' डर गया हम भी 'अदीम' डर गए

उस के सुलूक पर 'अदीम' अपनी हयात ओ मौत है
वो जो मिला तो जी उठे वो न मिला तो मर गए

अदीम हाशमी.

#शेर #जुदाई #इश्क #डर #मौत #बारिश #इंतजार

18/03/2024

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं

सुना है रब्त है उस को ख़राब-हालों से
सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं

सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उस की
सो हम भी उस की गली से गुज़र के देखते हैं

सुना है उस को भी है शेर ओ शाइरी से शग़फ़
सो हम भी मो'जिज़े अपने हुनर के देखते हैं

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं

सुना है हश्र हैं उस की ग़ज़ाल सी आँखें
सुना है उस को हिरन दश्त भर के देखते हैं

सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उस की
सुना है शाम को साए गुज़र के देखते हैं

सुना है उस की सियह-चश्मगी क़यामत है
सो उस को सुरमा-फ़रोश आह भर के देखते हैं

सुना है उस के लबों से गुलाब जलते हैं
सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं

सुना है आइना तिमसाल है जबीं उस की
जो सादा दिल हैं उसे बन-सँवर के देखते हैं

सुना है जब से हमाइल हैं उस की गर्दन में
मिज़ाज और ही लाल ओ गुहर के देखते हैं

सुना है चश्म-ए-तसव्वुर से दश्त-ए-इम्काँ में
पलंग ज़ाविए उस की कमर के देखते हैं

सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है
कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं

वो सर्व-क़द है मगर बे-गुल-ए-मुराद नहीं
कि उस शजर पे शगूफ़े समर के देखते हैं

बस इक निगाह से लुटता है क़ाफ़िला दिल का
सो रह-रवान-ए-तमन्ना भी डर के देखते हैं

सुना है उस के शबिस्ताँ से मुत्तसिल है बहिश्त
मकीं उधर के भी जल्वे इधर के देखते हैं

रुके तो गर्दिशें उस का तवाफ़ करती हैं
चले तो उस को ज़माने ठहर के देखते हैं

किसे नसीब कि बे-पैरहन उसे देखे
कभी कभी दर ओ दीवार घर के देखते हैं

कहानियाँ ही सही सब मुबालग़े ही सही
अगर वो ख़्वाब है ताबीर कर के देखते हैं

अब उस के शहर में ठहरें कि कूच कर जाएँ
'फ़राज़' आओ सितारे सफ़र के देखते हैं

अहमद फ़राज़

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#गजल #शायरी #शेर #अहमदफराज

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लड़के बर्दास्त कर सकते है हर दुःख मगर,पसंदीदा स्त्री से बिछड़ कर वो रो देते है..❤️🌻
06/03/2024

लड़के बर्दास्त कर सकते है हर दुःख मगर,
पसंदीदा स्त्री से बिछड़ कर वो रो देते है..❤️🌻

09/01/2024

मुझसे दामन न छुड़ा मुझको बचाकर रख ले
मुझसे एक रोज तुझे प्यार भी हो सकता है !!
#तेराइंतज़ार

21/12/2023

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22/112
1
वक़्त के क़दमों से क़दमों को मिला लेते हैं
राह आसान यूँ जीवन की बना लेते हैं
2
वास्ता आपका गर मुझसे नहीं है कुछ भी
क्यों मेरे हाल का दुनिया से पता लेते हैं
3
ढाल पाते नहीं वो ख़ुद को नये रंगों में
दायरा सोच का जो लोग घटा लेते हैं
4
कोशिशें करते हैं उतने में बसर करने की
जितना ईमान से दुनिया में कमा लेते हैं
5
अपनी बातों पे बशर जो नहीं कायम रहते
कद्र ख़ुद अपनी ज़माने में घटा लेते हैं
6
दिल नहीं मिलते,ख़यालात जुदा हैं फिर भी
ज़िन्दगी लोग यहाँ साथ बिता लेते हैं
7
जानते सब हैं मुकम्मल नहीं होगी फिर भी
लोग उम्मीद ज़माने से लगा लेते है
8
भूली बिसरी हुई यादों से चकल्लस कर के
बैठ तनहाई में महफ़िल का मज़ा लेते हैं
9
पाल मत वह्म कोई रिश्ता जुड़ेगा *हीरा*
लोग रस्मन ही फ़क़त हाथ मिला लेते हैं

हीरालाल यादव *हीरा*

#शायरी

19/12/2023

बहुत मुश्किल से दवा मिली है
शराब कहकर इसे बदनाम ना करो
#शायरी

05/12/2023

गुफ़्तुगू उन से रोज़ होती है
मुद्दतों सामना नहीं होता

--बशीर बद्र
#शायरी #वशीर_बद्र

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