Kavi pradeep Sharma

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉🎉 अनेक रूप में इस बसुधा पर, लेकर आई जिम्मेदारी,पुरुष प्रधान जगत है सारा,...
08/03/2026

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉🎉

अनेक रूप में इस बसुधा पर, लेकर आई जिम्मेदारी,
पुरुष प्रधान जगत है सारा, लेकिन नर से श्रेष्ठ है नारी।

नारी है मात,पुत्री, भगिनी, नारी दादी,साली, पत्नी,
सबका मन हर्षाने वाली, जीवन भर है नर की संगिनी।

घर को स्वर्ग बनाने वाली, नारी के हम सब आभारी,
पुरुष प्रधान जगत है सारा, लेकिन नर से श्रेष्ठ है नारी।

राम पुत्र को पाकर नारी,कौशिल्या माई बन जाती,
अपनी हठ पर आ जाए, वो नारी कैकेई कहलाती।

कृष्ण कन्हैया को पाकर, नारी राधा सा प्रेम निभाती,
आदर्श पति मिल जाए तो, नारी सीता बन वन जाती।

नारी पर ही टिकी हुई है,सम्पूर्ण जगत की सृष्टि सारी।
पुरुष प्रधान जगत है सारा, लेकिन नर से श्रेष्ठ है नारी।

स्वरचित रचना, प्रदीप शर्मा ✍️ ✍️


चार पैसों को कमाने चल दिए घर छोड़कर,पेट की ज्वाला बुझाने चल दिए घर छोड़कर।स्वर्ग सा घर छोड़ने का मन न रत्ती भर हुआ ,ख्वा...
06/02/2026

चार पैसों को कमाने चल दिए घर छोड़कर,
पेट की ज्वाला बुझाने चल दिए घर छोड़कर।

स्वर्ग सा घर छोड़ने का मन न रत्ती भर हुआ ,
ख्वाब को मंजिल दिखाने चल दिए घर छोड़कर ।

इस जमाने से मिले हैं दर्द मुफलिस के कई,
दर्द पर मरहम लगाने चल दिए घर छोड़कर ।

***** प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️



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जिंदगी से मुझे अब शिकायत नहीं है।अब जमाने कि कोई हिदायत नहीं है।मैं उठूं या गिरूं है इनायत उसी की,बाद उसके किसी की इनायत...
23/07/2025

जिंदगी से मुझे अब शिकायत नहीं है।
अब जमाने कि कोई हिदायत नहीं है।
मैं उठूं या गिरूं है इनायत उसी की,
बाद उसके किसी की इनायत नहीं है।

प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️
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जिंदगी में न ज्यादा अमल पालिए , चंद लम्हों की है जिंदगानी तेरी।आज है चल रही बंद हो जाय कल, है यही धड़कनों की कहानी तेरी।...
13/05/2025

जिंदगी में न ज्यादा अमल पालिए ,
चंद लम्हों की है जिंदगानी तेरी।
आज है चल रही बंद हो जाय कल,
है यही धड़कनों की कहानी तेरी।

रास्ते में मिलेंगी कई मुश्किलें,
मुश्किलों से कभी दूर जाना नहीं।
लोग भटकाएंगे आपको लक्ष्य से,
इस ज़माने की बातों में आना नहीं।

वक्त के साथ ही दौड़ते जाइए,
है इसी में निहित मेहरबानी तेरी।
जिंदगी में न ज्यादा अमल पालिए,
चंद लम्हों की है जिंदगानी तेरी।
स्वरचित रचना, प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️


पहलगाम के आतंकी हमले में शहीद वीर शहीदों को शत् शत् नमन। जय हिन्द!बहुत हो गया खेल खून का बहुत हो गई है मनमानी,अब सारे हथ...
24/04/2025

पहलगाम के आतंकी हमले में शहीद
वीर शहीदों को शत् शत् नमन।

जय हिन्द!

बहुत हो गया खेल खून का बहुत हो गई है मनमानी,
अब सारे हथियार उठा लो रोको हरकत पाकिस्तानी।

धर्म देखकर मार रहे हैं, अरे हिंदुओं अब तो जागो
कब तक ऐसे मौन रहोगे, अब तो रण में आगे भागो।

आर पार की करो लड़ाई ,लक्ष्य यही हो जीने का,
दुश्मन को अहसास करा दो, छप्पन इंची सीने का।

----- प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️







शहीद दिवस के अवसर पर भगतसिंह जी, राजगुरु जी और सुखदेव जी को कोटि-कोटि नमन 🙏🙏🙏फसलें बोयीं जीत की, खुद ही बनकर खाद।नेता जी...
23/03/2025

शहीद दिवस के अवसर पर
भगतसिंह जी, राजगुरु जी और सुखदेव जी को
कोटि-कोटि नमन 🙏🙏🙏

फसलें बोयीं जीत की, खुद ही बनकर खाद।
नेता जी को क्या मिला, आजादी के बाद।
आजादी के बाद, भगत आजाद भुलाए।
राजगुरु सुख देव, किसी को याद न आए।
बदल गये सब लोग, हुईं परिवर्तित नस्लें।
सत्ताधारी लोग, बो रहे छल की फसलें।

स्वरचित रचना, प्रदीप शर्मा ✍️ ✍️


सुप्रभात।रात को रात कहना कठिन हो गया,मन में जज़्बात रहना कठिन हो गया।इस जमाने में बदलाव इतना हुआ,अब सही बात कहना कठिन हो...
15/03/2025

सुप्रभात।

रात को रात कहना कठिन हो गया,
मन में जज़्बात रहना कठिन हो गया।
इस जमाने में बदलाव इतना हुआ,
अब सही बात कहना कठिन हो गया।

स्वरचित रचना, प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️



सुप्रभात।राधे राधे बोलकर, वृंदावन में डोल।राधे राधे नाम है , दुनिया में अनमोल।दुनिया में अनमोल, नाम कान्हा को प्यारा।हो ...
02/03/2025

सुप्रभात।

राधे राधे बोलकर, वृंदावन में डोल।
राधे राधे नाम है , दुनिया में अनमोल।
दुनिया में अनमोल, नाम कान्हा को प्यारा।
हो भव सागर पार, नाम जप जप संसारा।
राधा बिन भगवान, देवकीनन्दन आधे।
अलबेली सरकार, जपे जा राधे राधे।

स्वरचित छंद, प्रदीप शर्मा ✍️ ✍️






नमन मां शारदे।कृष्ण सा प्रेम पावन करूं मैं तुझे,शाश्वत प्रेम ही मन का आधार है।जिस्म का प्रेम पाना नहीं चाहता,ना मुझे ऐसी...
16/02/2025

नमन मां शारदे।

कृष्ण सा प्रेम पावन करूं मैं तुझे,
शाश्वत प्रेम ही मन का आधार है।

जिस्म का प्रेम पाना नहीं चाहता,
ना मुझे ऐसी भी कोई दरकार है।

ये हवस चंद लम्हों की मेहमान है,
बस जवानी जवानी की सरकार है।

मैं तुझे भूल जाऊं ये मुमकिन नहीं,
मेरी हर सांस पर तेरा अधिकार है।

याद करता हूं तुझको तो लगता है ये,
दूर मुझसे बहुत मेरा संसार है।

सोचता हूं कि मैं तुझपे कविता लिखूं,
तेरी कविता का रस यार श्रंगार है।
स्वरचित रचना,
प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️✍️





सुप्रभातम  जिंदगी जंग है बात ये मानिए,जीतनी जंग है मन में ये ठानिए।है असंभव नहीं काम कोई यहां,अपने अंदर की ताकत को पहचान...
12/02/2025

सुप्रभातम

जिंदगी जंग है बात ये मानिए,
जीतनी जंग है मन में ये ठानिए।
है असंभव नहीं काम कोई यहां,
अपने अंदर की ताकत को पहचानिए।
प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️





*****  सुप्रभातम। ****वक्त के साथ चलना नहीं चाहते,सबसे आगे निकलना वही चाहते।बात मेहनत की करने से क्या फायदा,नींद से लोग ...
05/02/2025

***** सुप्रभातम। ****
वक्त के साथ चलना नहीं चाहते,
सबसे आगे निकलना वही चाहते।
बात मेहनत की करने से क्या फायदा,
नींद से लोग जगना नहीं चाहते।

**** प्रदीप शर्मा ✍️✍️✍️


आप सभी को मेरी ओर से गणतंत्र दिवस की  हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🎉
26/01/2025

आप सभी को
मेरी ओर से
गणतंत्र दिवस की
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🎉


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