19/06/2026
हरियाणा के गेस्ट टीचर्स: दो दशक की सेवा, न्यायालय का आदेश और नियमितीकरण की अंतिम उम्मीद
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हरियाणा के गेस्ट टीचर्स का संघर्ष अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। दिसंबर 2005 से लेकर जून 2026 तक का यह लगभग 21 वर्षों का सफर केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और समानता के अधिकार का संघर्ष रहा है।
27 मई 2026 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के बाद राज्य के हजारों गेस्ट टीचर्स में नई उम्मीद जगी है। न्यायालय ने जो संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है, उसने सरकार के सामने भी एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत किया है कि वह दो दशकों से शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने इन शिक्षकों को स्थायी समाधान प्रदान करे।
सुविधाएं मिलीं, लेकिन पूर्ण न्याय अभी बाकी
वर्तमान समय में हरियाणा के गेस्ट PGT शिक्षकों को लगभग ₹49,400 प्रतिमाह मानदेय प्राप्त हो रहा है।
इसके अतिरिक्त:
- महिला गेस्ट टीचर्स को 22 आकस्मिक अवकाश (Casual Leave)।
- मातृत्व अवकाश के रूप में 6 माह की छुट्टी।
- उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद Child Care Leave (CCL) की सुविधा।
- पुरुष गेस्ट टीचर्स को भी Casual Leave।
- LTC सुविधा।
- मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता।
- सेवा सुरक्षा अधिनियम 2019 के तहत विभिन्न संरक्षण।
- आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सुरक्षा।
- ग्रेच्युटी संबंधी प्रावधानों पर विचार।
- DA लागू, यद्यपि नियमित कर्मचारियों की तरह मूल वेतन पर नहीं।
- 58 वर्ष की आयु तक सेवा का अवसर।
लेकिन दूसरी ओर:
- नियमित वेतनमान नहीं।
- वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं।
- मकान किराया भत्ता नहीं।
- पेंशन नहीं।
- पूर्ण सामाजिक सुरक्षा नहीं।
- सेवानिवृत्ति के समय आर्थिक सुरक्षा नगण्य।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक नियमित शिक्षक और एक गेस्ट शिक्षक दोनों 58 वर्ष की आयु में सेवा से निवृत्त होते हैं, लेकिन नियमित कर्मचारी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों के साथ घर जाता है, जबकि गेस्ट शिक्षक लगभग खाली हाथ लौटता है।
संघर्ष की नई दिशा
उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद पिछले कई सप्ताहों में गेस्ट टीचर्स दिन-रात जनप्रतिनिधियों और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
वे मिल चुके हैं:
- भाजपा के पन्ना प्रमुखों से,
- विधायकों से,
- सांसदों से,
- केंद्रीय मंत्रियों से,
- राज्य मंत्रियों से,
- हरियाणा मंत्रिमंडल के सदस्यों से,
- भाजपा की नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष से,
- शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा से कई बार।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुके थे कि यदि न्यायालय की ओर से कोई बाधा नहीं रही तो सरकार नियमितीकरण की दिशा में सकारात्मक निर्णय ले सकती है।
एक ही विद्यालय, दो व्यवस्थाएं
हरियाणा के विद्यालयों में वर्षों से एक ही छत के नीचे दो प्रकार की व्यवस्थाएं चल रही हैं।
एक शिक्षक नियमित है।
दूसरा गेस्ट है।
दोनों समान योग्यता रखते हैं।
दोनों समान कार्य करते हैं।
दोनों समान जिम्मेदारी निभाते हैं।
दोनों विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण करते हैं।
फिर भी दोनों के अधिकारों और आर्थिक सुरक्षा में भारी अंतर बना हुआ है।
यही वह प्रश्न है जिसने वर्षों से गेस्ट टीचर्स को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है।
भाजपा सरकार के लिए ऐतिहासिक अवसर
हरियाणा में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बना चुकी है। यदि गेस्ट टीचर्स के मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाता है, तो इसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव दूरगामी हो सकता है।
नियमितीकरण से भाजपा को संभावित 20 लाभ
1. लगभग 10,000 शिक्षकों के लंबे संघर्ष का समाधान।
2. शिक्षकों के परिवारों का विश्वास मजबूत होगा।
3. शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
4. नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
5. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा गुणवत्ता बेहतर होगी।
6. सरकार की संवेदनशील छवि मजबूत होगी।
7. न्यायालय के निर्णय का सम्मान दिखाई देगा।
8. वर्षों से लंबित विवाद समाप्त होगा।
9. प्रशासनिक मुकदमों में कमी आएगी।
10. शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा।
11. विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षक मिलते रहेंगे।
12. सामाजिक न्याय का संदेश जाएगा।
13. महिला शिक्षकों को अधिक सुरक्षा मिलेगी।
14. सरकारी विद्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
15. युवा वर्ग में सकारात्मक संदेश जाएगा।
16. कर्मचारी संगठनों में विश्वास बढ़ेगा।
17. विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में कमी आएगी।
18. शिक्षा क्षेत्र में सरकार की उपलब्धि दर्ज होगी।
19. लाखों मतदाताओं तक सकारात्मक संदेश पहुंचेगा।
20. चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए मजबूत जनसमर्थन का आधार तैयार हो सकता है।
मुख्यमंत्री से विनम्र प्रार्थना
हरियाणा के गेस्ट टीचर्स और उनके परिवारों की मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी से विनम्र प्रार्थना है कि उच्च न्यायालय के निर्णय की भावना का सम्मान करते हुए एक सकारात्मक, न्यायपूर्ण और मानवीय निर्णय लिया जाए।
दो दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे इन शिक्षकों ने हर परिस्थिति में विद्यालयों को संभाला है। अब समय आ गया है कि सरकार भी उनके भविष्य को स्थिरता, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करे।
यह केवल नियमितीकरण का प्रश्न नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के भविष्य का प्रश्न है जिन्होंने हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष समर्पित किए हैं।यह लेख भावनात्मक अपील के साथ-साथ प्रशासनिक और राजनीतिक तर्क भी प्रस्तुत करता है, जिससे इसे ज्ञापन, सोशल मीडिया अभियान, समाचार-पत्र लेख या जनप्रतिनिधियों को सौंपे जाने वाले दस्तावेज़ के रूप में उपयोग किया जा सकता है।