Spill poetry

Spill poetry ज़िन्दगी की कुछ हसीन दास्तां कुछ तुम कहो कुछ हम कहें

29/03/2018

आपको एक बात बताऊँ
हर रोज़ एक नाम याद आता है
कभी सुबह कभी शाम याद आता है
और रोज़ सोचता हूँ की दूसरी
मोहब्बत कर लूं..........
और हर रोज़ पहली मोहब्बत का अंजाम याद आता है|

मैं तुम्हे ज़रूर मिलूँगा हाँ मैं तुम्हे ज़रूर मिलूँगा   मगर  आज  नहीं क्यूंकि तुम आज भी किसी उलझन मैं हो और मैं आज भी तुमम...
28/03/2018

मैं तुम्हे ज़रूर मिलूँगा
हाँ मैं तुम्हे ज़रूर मिलूँगा
मगर आज नहीं
क्यूंकि तुम आज भी किसी उलझन मैं हो
और मैं आज भी तुममे खुद को सुलझाने मैं लगा पड़ा हूँ
हाँ मैं तुम्हे मिलूँगा ज़रूर पर आज नहीं
क्यूंकि आज भी तुम पतझड़ के पत्तो के पीछे भाग रही हो
और आज भी मेरी आँखें तुम्हारा बारिश में इन्तिज़ार कर रही हैं
नहीं, मैं तुम्हे नहीं मिलूँगा
क्योंकि मैं किसी टपरी पर चाय के कप के धुंए में से
तुम्हारा चेहरा देखता हूँ
और तुम आज भी ठंडी कॉफ़ी की झाग में कहीं खोई सी हो
हाँ मैं तुम्हें मिलूँगा ज़रूर पर आज नहीं
क्यूंकि आज भी मैं जब तुम्हें पीछे मुड़कर देखता हूँ
तो तुम्हे ही पाता हूँ
लेकिन जब तुम पीछे मुड़कर देखती हो|||||||

तुम पीछे मुड़कर देखती कहाँ हो
तो मैं तुम्हे ज़रूर ,मिलूँगा पर आज नहीं|||||

चिट्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश, कहाँ तुम चले गए न message किया न call किया पिछली रात के I LOVE YOU का जवाब भी नह...
27/03/2018

चिट्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश, कहाँ तुम चले गए
न message किया न call किया
पिछली रात के I LOVE YOU का जवाब भी नहीं दिया
जब call किया तो switched off बताया
मुझसे, मुझसे इतना क्यूँ रूठ गए कहाँ तुम चले गए, कहाँ तुम चले गए
हाँ गलती मेरी थी, मैं फ़ोन नहीं करता था,message पढने के बाद reply
नहीं देता था
हाँ यार खाना खा लिया क्यूँ एक ही सवाल हर बार गुस्सा भी बहुत करता था|
पर उस बात पे इतना क्यूँ रूठ गए कहाँ तुम चले गए कहाँ तुम चले गए
अच्छा ठीक है ये मजाक छोड़ दो तुम
I m sorry अब से गुस्सा नहीं करूंगा
call हमेशा मैं ही करूंगा
जितना प्यार करता हूँ उसको कभी न छुपाऊँगा
बस तुम ये मजाक छोड़ दो और वापस आ जाओ
वापस आ जाओ कि अब यहाँ जी नहीं लगता
वापस आ जाओ कि वक़्त नहीं कटता
वापस आ जाओ कि तुम्हारे बिना मुस्कुराने को मन नहीं करता
वापस आ जाओ की अब जीने को जी नहीं चाहता|
please wapas aa jao.....................

27/03/2018

JUST A VICHAR
यूँ ही एक छोटी सी बात पे ताल्लुकात पुराने बिगड़ गए
मुद्दा ये था की क्या सही है और वो कौन सही पे उलझ गए|

ज़िन्दगी की कुछ हसीन दास्तां कुछ तुम कहो कुछ हम कहें

26/03/2018

सब कुछ वैसे ही चलता है जैसे चलता था जब तुम थी
रात भी वैसे ही सर मूंदे आती है दिन भी वैसे ही आँखें मलके जगती हैं,
तारे सारी रात जमाईयां लेते हैं
सबकुछ वैसे ही चलता है कैसे चलता था जब तुम थी
सबकुछ वैसे ही चलता है जैसे चलता था जब तुम थी|
काश तुम्हारे जाने पर कुछ तो फर्क पड़ता जीने में

प्यास न लगती पानी की या नाखून बढ़ना बंद हो जाते,
बाल हवा में न उड़ते या धुआं निकलता साँसों से
पर अफ़सोस, सबकुछ वैसे ही चलता है जैसे चलता था जब तुम थी

पर अब सही बात तो बतानी पड़ेगी
बस इतना फ़र्क पड़ा है मेरी रातों में कि
नींद नहीं आती तो, अब सोने केलिए एक नींद की गोली रोज़ निगलनी पड़ती है
सबकुछ वैसे ही चलता है जैसे चलता था जब तुम थी|||||||||||||||||||

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