Savita Bhabhi

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15/03/2026

ससुर ने बहु की हालत खराब कर दी // Hindi Stories || Romantic Kahaniya || Suvichar Kahaniya || Emotional Audio story || Full hindi Audio Story Priya bhabhi //


















𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟮 मेरा नाम अभि है और मेरी हाईट 5 फुट 9 इंच की है. मैं अपनी बॉडी की बहुत केयर करता हूँ, जिम भी जाता हूँ.मेरे सामान न...
15/03/2026

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟮 मेरा नाम अभि है और मेरी हाईट 5 फुट 9 इंच की है. मैं अपनी बॉडी की बहुत केयर करता हूँ, जिम भी जाता हूँ.
मेरे सामान ने जिसको भी किया है, वे सब मेरे संपर्क में आज भी हैं.
यह कहानी आज से एक साल पहले की है.
मैं अपने मामा की लड़की की शादी में गया था. मामा की उस बेटी को भी मैं पहले ही कर चुका था.
अब तक का मेरा रिकॉर्ड है कि मैं जिसकी भी शादी में गया, उधर किसी न किसी को जरूर पेल कर आया.
उनमें कौन कौन सी लड़कियां मेरे सामान के नीचे से निकलीं … या यूं कहें कि मैंने किस किस को शादी में पेला था,
अभी मामा की लड़की की शादी की कहानी सुनिए.
मैं सुबह 5 बजे मामा के घर पहुंच गया था.
चूंकि यह एक गांव था और गांव में तो आपको मालूम ही है कि सब जल्दी उठ जाते हैं.
मैं घर गया तो सब जाग चुके थे.
बारी बारी से मैं सबसे मिला और बाद में दीदी के रूम में उनसे मिलने गया.

जब मैं उनके रूम गया तो दीदी भी उठ चुकी थीं और फोन चला रही थीं.
मैं गया और दीदी को हग करके उनको एक लिपलॉक वाली किस की.
दीदी की मुस्कान देखने लायक थी.
तभी मेरी नजर उनके बगल में गई.
उधर एक लड़की सो रही थी.
मैंने दीदी से पूछा, तो वे बोलीं- मेरी सहेली है. शादी में आई है.
मैंने कहा- अच्छा.
फिर हम दोनों बात करने लगे.
बाद में मैं काम में लग गया.
कोई 11 बजे दीदी का फोन आया.
वे मुझे रूम में आने को बोलीं.
मैंने हामी भरी कि आ रहा हूँ.
तो वे बोलीं- चाय लेते आना. रिया उठ गई है.
मैं चाय लेकर उनके रूम में गया.
तब मैंने रिया को देखा.
वह दूध की तरह सफेद थी.
उसकी संतरे एकदम सेवफल जैसी गोल थीं जो उसके टॉप से बाहर निकलने को बेताब थीं.
उसके लोवर और टॉप में इतना गैप था कि उसकी नाभि एकदम साफ दिख रही थी.
उसकी बड़ी सी उठी हुई एकदम गोल हिप देख कर मेरा खड़ा हो गया.
वह भी मुझे देख रही थी.
तभी दीदी ने उसे मेरा परिचय देते हुए कहा- रिया … ये अभि वही है, जिसकी मैं बात कर रही थी.
उसने मेरे सामान को देखते हुए कहा- अच्छा ये वह अभि है.
उसने मेरी तरफ़ हाथ किया- हैलो.
मैंने भी हाथ आगे किया- हाय.
फिर वह बाथरूम की तरफ चली गई.
मैंने दीदी से कहा- आपने इसे क्या क्या बताया है. क्या सब बता दिया?
दीदी ने कहा- हां यार रिया बहुत खुले विचारों की लड़की है. उसकी फैमिली भी एकदम खुली विचारधारा वाली है और रिया बहुत अमीर घर से है. उसके लिए ठुकाई जैसी चीज कोई अलबेली बात नहीं है. ये उसके लिए रोज के काम की तरह है. मैं उससे तुमको इसी लिए मिलवा रही थी. वह 5 दिन से आई है. इतने दिन से उसने न तो सिगरेट पी पाई है और न दारू. तभी मैं तुमको जल्दी बुला रही थी. अब तुमको उसके लिए ये सब अरेंज करना है.

मैंने कहा- हां ठीक है, मुझे भी कंपनी मिल गई. इसको पेल दूँ क्या?
दीदी हंसी और बोलीं- वो सब तू खुद ही देख ले.
तभी रिया वापस आ गई.
फिर दीदी से उससे भी बोल दिया- रिया मैंने तेरी कंपनी अभि के साथ सैट कर दी है. तू इसे अपनी हर समस्या बता सकती है.
हम सब आपस में बात करने लगे.
थोड़े ही समय में रिया से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई.
मैंने रिया से शाम 5 बजे के लिए बोल दिया- यदि मन हो तो शाम को पार्टी करने चलना.
वह बोली- हां यार, मुझे कहीं खुले में ले चलो. पर तुम कहां ले जाओगे?
मैंने कहा- मामा जी के ट्यूबवेल पर … उधर तुमको अच्छा लगेगा.
उसने कहा- ये कहां है?
मैंने बताया कि ये थोड़ी दूर है … पर ये जगह खेतों के बीच में है और वहां कोई आता जाता भी नहीं है. हम आराम से पार्टी कर सकते हैं.
उसने हामी भर दी.
मैंने कह दिया था कि यदि तुम नहाना चाहो तो उधर नहाने का इंतजाम भी है.
ये कह कर मैंने रिया को आंख मार दी थी.
रिया ने भी थंब अप दिखा दिया.
शाम को हम दोनों पैदल ही चल दिए.
इससे पहले दिन में मैंने पहले ही उधर जाकर सब सैट कर दिया था.
शाम को हम दोनों ट्यूबवेल पर पहुंच गए.
उस समय बिजली नहीं आ रही थी.
मगर मुझे उम्मीद थी कि बिजली आ जाएगी, जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
मैंने उसे बैठाया और सारा सामान निकाल कर पैग बनाने लगा.
हम दोनों दारू पीने लगे.
तभी लाइट आ गई और ट्यूबवेल चलने लगा.
रिया बोली- आओ नहाते हैं, मैं कभी ऐसी जगह पर नहीं नहाई हूँ.
मैंने कहा- नहीं, तुम जाओ नहा लो. मैं तुम्हें नहाते हुए देखूँगा.
मैंने ट्यूबवेल में पैर डाल कर उसकी कोर पर बैठ गया.
तभी रिया ट्यूबवेल में उतर गई और पानी से खेलने लगी.
वह पूरी भीग गई थी.
उसकी ब्रा और पैंटी दिख रही थी.तभी उसने मुझे भी पानी में खींच लिया.
अब हम दोनों पानी में ही मस्ती करने लगे और पैग बना कर पीने लगे.
वह बोली- यार ऐसे घर कैसे चलेंगे. मैं तो पूरी भीग गई हूँ.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, अभी घर से किसी से कपड़ा मँगवा लेते हैं.
वह बोली- हां ये ठीक रहेगा.
वह फिर से मस्त होने लगी और अचानक झटके से घूमी तो उसकी हिप मुझसे टच हो गई.
मेरा तो तुरंत खड़ा हो गया.
अब तक अंधेरा भी होने लगा था.
हम दोनों ने चार चार पैग मार लिए थे, खासा नशा भी हो चुका था और ठंडी भी लग रही थी.
रिया नहाने में मस्त थी.
मैं रिया के पीछे गया और सिगरेट लेने के बहाने से उसकी हिप में अपना सामान उसकी सटा दिया.
मेरे सामान का कड़कपन रिया ने महसूस कर लिया और मुझे तिरछी निगाहों से देखने लगी.

मैंने सिगरेट जलाई और पीने लगा.
तभी मैंने पानी में ही अपनी शर्ट उतार दी.
तो रिया नशीली आवाज में बोली- अभि तुम्हारी बॉडी बहुत मस्त है.
मैंने भी बोल दिया- हां मैं रोज 2 घंटे जिम करता हूँ.
वह मेरे बगल में आकर सिगरेट पीने लगी और मेरे सामान को घूरने लगी.
मैंने भी ऐसे शो किया कि मैं कुछ नहीं देख रहा हूँ.
हमने एक एक पैग और पिया. अब रात हो चुकी थी.
मैंने रिया से कहा- चलो, घर चलें … काफी अंधेरा हो रहा है. हमें पैदल जाना है.
उसने कहा- थोड़ी देर और रुको यार … फिर चलते हैं.
यह बोल कर वह मेरे ऊपर पानी फेंकने लगी.
मैं भी वही करने लगा.
हम दोनों एक दूसरे के साथ खेलने लगे.
तभी मैंने रिया को पकड़ लिया और उसको पानी के सामने कर दिया.
अब पंप से तेज धार से निकलता पानी उसके ऊपर गिर रहा था और उसका टॉप जैसे उतरने वाला हो गया था.
उसकी रेड ब्रा पूरी दिख रही थी.
पीछे से मैं था तो मेरा सामान उसकी हिप में टच हो रहा था.
मैंने उसको कमर से पकड़ा हुआ था.
तभी वह मेरी तरफ घूम गई.
अब उसका चेहरा मेरी तरफ था.
उसकी संतरे मेरे सीने से सटी थी और मेरा हाथ उसके पीछे था.
वह मेरी तरफ देख रही थी और मैं भी उसे देख रहा था.
हमारी आंखों में वासना का नशा छाया हुआ था.
मैं हिम्मत करके उसको किस करने लगा और उसकी हिप को दबाने लगा, अपने सामान को उसकी गुफा से सटाने लगा.
उसकी कमर भी सामान से रगड़ने लगी.
कुछ मिनट बाद वह भी मेरा साथ देने लगी और मैंने उसका टॉप भी उतार दिया.
उसने खुद ही अपनी ब्रा को निकाल दिया और मेरे मुँह में अपनी संतरे देने लगी.
मैं उसकी संतरो को अपने होंठों में दबा कर खींचते हुए पीने लगा.
वह भी अपनी संतरो को दबा दबा कर मेरे मुँह में डाल रही थी.
कुछ देर बाद उसने खुद ही अपना लोवर उतार दिया.
लोअर के साथ ही पैंटी भी उतर गई थी.
वह एकदम नंगी मेरी बांहों में मचल रही थी.
मेरा अब खतरनाक पोजीशन में आ गया था और वह मेरे सख्त सामान को पकड़ कर बड़ी खुश हो रही थी.
मैंने भी उसकी टांगों के बीच में हाथ डाला तो उसकी चिकनी गुफा मुझे कामांध करने लगी.
तुरंत मैंने उसको उठाया और ट्यूबवेल के बाहर निकाल कर फर्श पर बैठा दिया.
वह एकदम नंगी थी.
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि अभी सुबह मैं इस लौंडिया से मिला और शाम को वह मेरे सामने नंगी है.
मैं तुरंत उसकी चिकनी गुफा में अपनी जीभ लगा कर चाटने लगा, जीभ से ही उसको पेलने लगा.
वह भी अपनी टांगें फैला कर मेरे मुँह को अपनी गुफा पर रगड़वाने लगी.
साथ ही वह खुद अपने हाथों से अपनी दोनों संतरो को मसलने लगी- आह अभि … और जोर से … आह खा जाओ मेरी गुफा को
उसने अपने पैरों से मुझे जकड़ लिया और दबाने लगी, मेरे सिर को पकड़ कर अपनी गुफा में घुसेड़ने लगी.
उसी के साथ उसने अपनी पूरी बॉडी को टाइट कर लिया और एक गर्म पानी की धार मेरे मुँह में छोड़ दी.
मैंने उसका सारा पानी पी लिया और वह आह ओह ओह करती रही.
अब रिया थोड़ी शांत हुई और मैं उसके होंठों को चूसने लगा, दबाने लगा.
मैंने अब उसको वापस ट्यूबवेल के अन्दर उतार लिया और खुद किनारों को पकड़ कर मेंढक जैसा बन कर उसके मुँह के ऊपर अपना सामान लगाने लगा.
वह अपनी जीभ को मेरे सुपाड़े पर फेरने लगी और फिर मेरे सामान को किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
कुछ मिनट बाद मेरे सामान का पानी उसके मुँह में था.
उसने मेरी तरफ देखते हुए सारा पानी पी लिया.
हम फिर एक दूसरे को किस करने लगे, एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे.
उसने मेरे सामान को हिला कर वापस खड़ा किया और बोली- अब जल्दी से मुझे कर दो. अब रहा नहीं जा रहा.
वह ट्यूबवेल के बाहर निकल गई और वहां पड़ी खटिया पर गुफा खोल कर चित लेट गई.
उसने अपने पैरों को किसी बाजारू के जैसे फैला दिया.
मैंने भी अपने सामान को उसकी गुफा पर सैट किया और एक बार में अन्दर डाल दिया.

मेरा अन्दर जाते ही रिया इतनी जोर से चिल्लाई कि मेरी फट गई.
मैंने तुरंत उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया, पर वह पूरी दम लगा कर मुझे अपने से दूर करने लगी.
मैंने एक दो मिनट तक कुछ नहीं किया. जब रिया को दर्द से आराम हुआ, तो मैं धीरे धीरे सामान को चलाने लगा.
अब रिया को मजा आने लगा और वह भी अपनी गुफा को उठा उठा कर पूरा अन्दर लेने लगी.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और रिया के मुँह से तेज तेज आवाज निकलने लगी- आज मेरी गुफा बना दो … बहुत सामान लिए इस गुफा ने … पर आज इसकी गर्मी शांत होगी … आह पेलो और तेज उई मर गई आह!

वह अपनी हिप उठा उठा कर ले रही थी.
तभी उसका पानी निकल गया और उसके पानी से उसकी गुफा और गीली हो गई.
सामान फछ फछ की आवाज करने लगा.
दस बारह झटकों में मेरा पानी आ गया.
मैंने पूरा पानी रिया की गुफा में निकाल दिया और उसके ऊपर लेटा रहा.
ठुकाई पूरा ही हुआ था कि तभी दीदी का फोन आया- तुम लोगों को घर नहीं आना क्या?
अब हम दोनों ने उठ कर एक दूसरे को किस किया और कपड़े पहन कर घर आ गए.
रात हो चुकी थी तो किसी को गीले कपड़े समझ नहीं आए.
फिर रात में सबके सोने के बाद हमने फिर से ठुकाई के मजे लिए.
इस तरह से पूरी शादी में हम दोनों ने अठारह बार ठुकाई किया.

रिया की ठुक ठुक कर ढीली हो गई थी. दीदी को जब मालूम हुआ तो उन्होंने मेरे सामने रिया की खूब खिंचाई की.

अगले भाग के लिए 𝗟𝗶𝗸𝗲 करे 𝗼𝗿 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗲𝗻𝘁 मे 𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟯 लिखें

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟮 दोस्तो, कैसे हो आप सब!मेरा नाम जीशान खान है और मैं राजस्थान से हूं। मेरी उम्र 21 साल है और मैं कंप्यूटर जॉब करता ...
15/03/2026

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟮 दोस्तो, कैसे हो आप सब!
मेरा नाम जीशान खान है और मैं राजस्थान से हूं। मेरी उम्र 21 साल है और मैं कंप्यूटर जॉब करता हूं।
यह मेरी ज़िंदगी की पहली कहानी है जिसमें मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी मौसी की लड़की की शादी में एक रिश्तेदार लड़की के साथ किया।
तो आपका ज्यादा समय व्यर्थ न करते हुए आता हूं सीधे कहानी पर।
यह कहानी हाल ही की है जब मैं अपनी मौसी के यहां शादी में गया हुआ था.

मैं कई दिन पहले पहुंच गया था।
वहां शादी में मेरा ज्यादा मन नहीं लग रहा था इसलिए छत पर ही बैठकर मोबाइल में मूवी देख रहा था।
तभी छत पर एक 40 साल की औरत आयी और मुझे चाय दी।
मैंने उनकी तरफ देखा तो वो बहुत ही सुंदर दिख रही थी और मुझसे बात करने की कोशिश कर रही थी।
फिर मैंने ही बात की शुरुआत की तो पता चला कि उनके पति बिहार में काम करते हैं और उनकी 2 संतान हैं।
बड़ी लड़की 19 साल की और लड़का अभी 9-10 साल का था।
धीरे धीरे हम दोनों ने खूब बातें कीं और उनसे अच्छी दोस्ती भी हो गई।
उन्होंने बताया कि वे मासी के ससुराल वालों के परिवार वालों की बेटी हैं यानी उनकी ननद।
मुझे उनसे बाते करके अच्छा लग रहा था।
तभी एक बेहद खूबसूरत लड़की ऊपर आयी।
मैं तो उसे देख कर अवाक् रह गया।
क्या होंठ थे उसके … क्या फिगर, सच में गजब का माल थी वो!
फिर वह उस औरत के पास आई और बोली- मम्मी, आपको नीचे बुलाया है।
मैंने पूछा- ये आपकी बेटी है?
तो वे बोली- हां मेरी बेटी है, इसका नाम रूही है।
मैं बोला- लगता ही नहीं आपकी इतनी बड़ी बेटी है, आप तो जवान लगती हो।
तो उन्होंने बताया कि छोटी उम्र में उनकी शादी हो गयी थी इसलिए जवान दिखती हैं।
वह लड़की भी अब वहीं पर खड़ी होकर बातें करने लगी।
इस बहाने मेरी भी उससे जान-पहचान हो गई।

धीरे-धीरे उससे भी अच्छा सम्पर्क हो गया।
2-3 दिन तक उस लड़की और उसकी मम्मी यानी उस औरत से मैंने खूब बातें कीं और खुलकर कीं।
फिर शादी से एक दिन पहले नाच-गाने का प्रोग्राम रखा गया।
सब अच्छे से एन्जॉय कर रहे थे।
मैं भी नाच रहा था।
तभी वह लड़की रूही मेरी तरफ आयी और हंसने लगी।
मुझे लगा मेरे साथ नाचना चाहती है।
मैं भी हंसकर उसके पास चला गया और नाचने लगा।
तभी मैं रुक गया।
तो रूही बोली- क्या हुआ! रुक क्यों गए?
मैं बोला- हाथ में दर्द हो रहा है।
तो उसने मेरे हाथ दबाने शुरू कर दिए।
मुझे थोड़ा अच्छा लगा।
फिर वो बोली- अब ठीक है?
मैं बोला- इससे तो 10 या 15 मिनट ही आराम रहेगा। अगर दोबारा दर्द हुआ तो?
तो वह बोली- फिर से दबा दूंगी।
मैं बोला- और फिर भी हुआ तो?
वो बोली- दबाती रहूंगी, जब तक आराम न आए।
मैं बोला- इतनी हिम्मत है क्या?
तो वह बोली- हिम्मत की बात ही मत करो। बोलो और क्या करके दिखाना है?

मैं बोला- अगर ये बात है तो रात को सोऊं, तब दबाना … मान जाऊंगा।
वो बोली- ठीक है, दबा दूंगी।
मैं खुश हो गया और फिर नाचने लगा।
हमें नाचते-नाचते वहीं पर रात के 1 बज गए
सब फिर नाच गाना बंद करके सोने के लिए कहने लगे।
फिर मैं भी सोने के लिए चला गया।
छत पर कोई नहीं सोता था और गर्मी भी थी तो मैं ऊपर चला गया।
तभी मुझे किसी के आने की आहट सुनाई दी।
मैंने देखा तो रूही मेरे सामने आकर खड़ी हो गई थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह बोली- अब बताओ और दबाने हैं क्या हाथ?
मैं बोला- अब तो पैर भी दर्द कर रहे हैं।
तो वह बोली- कोई बात नहीं, मैं पैर भी दबा दूंगी। आप बस हुक्म करो!
मैं बोला- क्या बात है, इतना जोश कहां से आता है तुममें?
उसने कहा- आप कह रहे थे न कि इतनी हिम्मत है? तो बस, वही हिम्मत दिखा रही हूं।
मैं बोला- आपकी मम्मी आ जाएगी।
वह बोली- सब सो गए हैं, बेफिक्र रहो। और मम्मी को पता है कि मैं यहीं सोने वाली हूं। इसलिए वे नहीं आयेंगी क्योंकि वे पहले ही बोलकर सो चुकी है।
मैंने कहा- ओह, चलो फिर तो बढ़िया है, कोई चिंता की बात नहीं है, हम भी यहां आराम से सो सकते हैं।

उसने एकदम से पूछा- बढ़िया है, इसका क्या मतलब?
मैं बोला- कुछ नहीं, ऐसे ही।
वह बोली- इरादा क्या है आपका?
मैं बोला- बस आपसे पैर दबवाने का!
वह बोली- पैर दबाकर आपको तो आराम मिल जाएगा, पर मुझे भी दर्द हो रहा है, उसका क्या?
मैं बोला- मैं दबा दूंगा।
इस बात पर फिर वह हंसने लगी।
मैं भी हंस दिया और हम दोनों ने काफी देर तक बातें कीं।
बातें करते हुए कब रात के 3 बज गए हमें पता ही नहीं चला।
उस वक्त तक मुझे ठरक चढ़ने लगी थी।
उसके गुलाबी होंठ, उसके चमकते दांत, उसकी हंसी, उसकी जुल्फें, और उसका उन जुल्फों में बार-बार हाथ फिराना! ये सब देखकर मैं जैसे दीवाना सा हुआ जा रहा था।
तो मैंने बेकाबू होकर उसका हाथ पकड़ लिया।
एकदम से उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया।
मैंने फिर धीरे से उसकी जुल्फों, जो उसकी संतरो को ढके थीं, पर हाथ फिराते हुए उसकी संतरो को भी प्यार से सहला दिया।
उसने एकदम मेरी ओर थोड़ी हैरानी से देखा और फिर शरमाकर नीचे नजरें कर लीं।
फिर बोली- दर्द वहां नहीं है!
मैंने कहा- सॉरी, गलती से लग गया। मैं तो तुम्हारे बालों को छू रहा था।

फिर उसने मेरे हाथ पर हाथ रख कर कहा- आपको ये गलती दोबारा करने का भी हक है.
दोस्तो, मेरे तो जैसे मन में लड्डू फूट गए।
बस फिर क्या था … इससे पहले वो कुछ और कहती, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को सटा दिया।
उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नर्म होंठों पर मैं चुम्बन करने लगा।
फिर हम दोनों की जीभ भी बाहर निकलने लगी और जल्द ही लार का आदान-प्रदान होने लगा।
काफी देर तक हमारा स्मूच चलता रहा।
मैं उसके कमीज को ऊपर उठाने लगा तो बोली- नहीं, कपड़े नहीं, ऊपर से ही कर लो।
मैंने कहा- ओके, कोई बात नहीं।
फिर मैं सूट के ऊपर से ही उसके दबाने लगा।

धीरे धीरे वो गर्म होने लगी।
मैं उसकी पजामी को खोलने लगा।
उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोली- गेट बस हल्का सा ही खुलेगा, सिर्फ दर्शन करने के लिए! जो देखना, करना है, जल्दी कर लेना।
फिर उसने खुद अपनी पजामी खोली।
मैंने जल्दी से उसकी पैंटी नीचे खींच दी।
हाय … एकदम साफ़ गुलाबी थी उसकी!
मैंने छूकर देखा तो जैसे तप रही थी।

बिल्कुल रुई के जैसी नर्म, लेकिन बहुत गर्म!
मुझसे रुका न गया और मैंने पलभर से भी कम देर में अपनी पैंट उतार कर उसे नीचे पटक लिया।
मैंने उसके ऊपर लेटते हुए सामान को गुफा पर सटा दिया।
वह थोड़ी हैरान और परेशान सी दिखी, बोली- मैंने बस देखने के लिए कहा था।
मैंने कहा- मैं तो तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूं, मैं नहीं रुक सकता, चाहे जो सजा देना, लेकिन मैं तुम्हें पाना चाहता हूं, तुममें समाना चाहता हूं जान!
मेरी बातों से उसे भी यकीन हो गया और उसने मुझे अपनी बांहों में समा लिया।
तब मैंने उसी पूरी नंगी कर लिया. सामान का विश्वास पाते ही गुफा ने अपने द्वार खोल दिए।
मैंने पकड़ कर छेद पर नीचे ही नीचे सेट किया और धक्का दे दिया।
झटका जोर का था इसलिए भेदता हुआ अंदर जा फंसा।
पहली ठुकाई में रूही की चीख निकलती इससे पहले मेरा हाथ उसके मुंह पर जा चुका था

मैं एक हाथ से उसके मुंह को दबाए रहा और दूसरे से उसके कंधे, सिर को सहलाते हुए उसे शांत करने की कोशिश करता रहा।
वह भी मेरी सहलाहट को मरहम की तरह स्वीकार करके साथ निभाने के लिए आगे बढ़ती दिखी।
मैंने सामान को गुफा में चलाना शुरू किया लेकिन गुफा टाइट थी और मोटा … इसलिए थोड़ा थूक लगाकर मैंने टोपा थोड़ा बाहर तक किया लेकिन बिल्कुल नहीं निकाला।
धीरे-धीरे करके मैंने पूरा चिकना कर लिया।
अब तक रूही की गुफा भी नाप-तौल कर उसके लिए खुद को तैयार कर चुकी थी।
मैंने शुरू की और रूही मेरा साथ देने लगी।
हम दोनों के बदन चिपक गए थे।

दोस्तो, क्या बताऊं, गर्म, गुलाबी गुफा करने में जो स्वर्ग है, वो दुनिया की किसी और चीज में नहीं है।
मैं तो बस आनंद में डूबता जा रहा था।
ऐसी गुफा भगवान को सबको दे।
दो मिनट बाद मैंने नीचे झांका तो खून लगा हुआ दिखा।
मैं समझ गया कि रूही की सील टूटी है आज!

हालांकि रूही अब तक मजे और दर्द में बदहवास सी हो चुकी थी।
लग रहा था जैसे बेहोश हो जाएगी।
लेकिन मैंने फिर उसकी वासना को भड़काया, मैं उसकी संतरो को मैं मुंह लगाकर पीने लगा; निप्पलों को दांतों से हल्के हल्के चुभलाने लगा।
वह सिसयाने लगी-
नीचे से मैं हल्के हल्के धक्के लगा रहा था ताकि उसे ऊपर, और नीचे दोनों जगह मजा मिलता रहे।
मेरी इस मेहनत ने रंग दिखाया और रूही ने मुझे कसकर बांहों में भींचते हुए मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया।
उसकी टांगें थोड़ा खुल गईं जिससे मैंने थोड़ा और अंदर तक सरका दिया।

मैं फिर से उसे करने लगा।
अब वह हल्के से दर्द भरी आहें तो ले रही थी लेकिन उसमें मजे का अहसास ज्यादा मालूम चल रहा था।
धीरे-धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी।
अब इतनी रसीली और गर्म-टाइट गुफा मिले तो भला कोई कब तक धीरे-धीरे करेगा ।
मैंने गुफा की चक्की बना दी।
मैं तेजी से उसे करने लगा तो वो रोने लगी।
उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।

फिर उसका चेहरा देख मुझे स्पीड कम करनी पड़ी।
मैं नहीं चाहता था कि वो मुझे बाद में दर्द के कारण गालियां देती जाए और कभी दोबारा न मिलने का फैसला कर ले।
इसलिए मैंने खुद की हवस पर भी काबू रखना बेहतर समझा।
कुछ देर का विराम देकर मैंने मध्यम गति में करना दोबारा से शुरू कर दी।
अब रूही मुझसे बार बार लिपट रही थी, कभी मेरी छाती पर हाथ लगाकर धकेलने की कोशिश करती तो अगले ही पल पीठ पर नाखून गड़ाते हुए मुझे अपने में समाने की कोशिश करने लगती।

मैं समझ गया था कि अब उसे असली स्वाद मिलना शुरू हो गया है।
धीरे धीरे मेरी स्पीड फिर से बढ़ने लगी।
रूही को तकलीफ तो हो रही थी लेकिन वह अब धक्के झेल जा रही थी।
तेजी से करते हुए मैंने उसकी सांसें चढ़ा दीं।
अब मैं पानी को गिरने से रोकने की सोच रहा था लेकिन उसकी गुफा में एक कसाव आया और उसने भींच लिया।
इसी फीलिंग में मेरा पानी उसकी गुफा में छूट गया।
मैं बेहाल सा हो गया था, इतने ज्यादा वेग से बहुत दिनों बाद फेंका था।
अब मैं भी हांफने लगा था।
मैंने कहा- बस हो गया!
वह बोली- तो आराम से बाहर निकालना … बहुत दर्द हो रहा है मुझे!
मैं 10 मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा।
फिर उसने मुझे धक्का दिया और बोली- बस अब मुझे दर्द हो रहा है बहुत ज्यादा, मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है। ये बात हम दोनों के बीच रहनी चाहिए। वरना मम्मी मुझे मार डालेगी।
इतना कहकर वह धीरे से उठी और पजामी ऊपर करके चलने लगी।
लेकिन वो चल नहीं पाई और वहीं लड़खड़ा गई।

मैंने कहा- थोड़ी देर लेट लो। आराम कर लो, फिर चली जाना।
वह बोली- ठीक है, लेकिन अब ऐसी-वैसी हरकत कुछ नहीं!
मैंने कहा- नहीं, बिल्कुल नहीं; तुम बेफिक्र रहो।
कुछ देर लेटने के बाद वह चलने लगी।
लेकिन फिर भी उससे चला नहीं जा रहा था।
फिर मैंने उसे सहारा दिया और धीरे-धीरे नीचे सीढ़ियां खत्म होने तक छोड़कर आया।
मैं आकर सो गया।
मेरी आंख देर से खुली।
उठा तो पता चला रूही को बुखार आ गया है और वह अस्पताल गई हुई है।
मुझे भी थोड़ा खुद के लिए बुरा लगा कि उसके साथ कहीं ज्यादा तो नहीं कर दिया।
मैं उसका इंतजार करने लगा।
वह शाम के लगभग घर लौटी।
वह मुझसे बात नहीं कर रही थी और इग्नोर कर रही थी।
मैंने सोचा कि उससे सॉरी कह दूं।
लेकिन उसने मौका नहीं दिया।
अगले दिन वह चली गई और फिर मेरा भी वहां मन नहीं लगा।
लेकिन रूही के लिए मेरे मन में हल्का सा मलाल रह गया।
काश … उससे एक बार उस दिन बात हो पाती

अगले भाग के लिए 𝗟𝗶𝗸𝗲 करे 𝗼𝗿 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗲𝗻𝘁 मे 𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟯 लिखें

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟭 अगर पति के सामने ही किसी की पत्नी ठुकने लगे तो आप खुद सोचिये क्या होता होगा और वो भी बाप अपने बेटे के सामने उसी क...
15/03/2026

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟭 अगर पति के सामने ही किसी की पत्नी ठुकने लगे तो आप खुद सोचिये क्या होता होगा और वो भी बाप अपने बेटे के सामने उसी की बीवी को। जी हां दोस्तों मेरा ससुर मेरे पति के सामने ही मेरी करता है और मेरा पति सिर्फ बैठ कर हिलाता है। आज अपनी कहानी आप लोगों के सामने पेश कर रही हूँ। कई बार ऐसा होता है जब मन की बात किसी और से शेयर करने में डर लगता है

मेरा नाम सलमा है मैं 22 साल की हूँ। मेरे पति का मेरे का उम्र 24 साल है। मेरे ससुर का उम्र 48 साल है। शादी के हुए अभी दो ही महीने हुए है। पर आज तक मुझे पति का नसीब नहीं हुआ है। पति मुझे कर नहीं पता है क्यों की वो मानसिक रूप से कमजोर है।

वो जब भी मेरे पास आता है उसका खड़ा नहीं होता। जब वो मेरे से दूर खड़ा रहता है उसका मोटा लंबा रहता है। ससुर मेरा बहुत बड़ा हरामी है। वो शायद ही अपने घर में किसी को नहीं किया होगा। यहाँ तक की उसका अपनी बेटी से ही सम्बन्ध था और जब वो पेट से हो गयी तो तुरंत ही उसका शादी कर दिया। और बच्चे का नाम उसके शौहर को दे दिया जब की ये बच्चा उसी का था।

अब आपको मेरी पूरी कहानी समझ में आ गई होगी। मेरे ससुर ने अपने बेटे के लिए शादी नहीं किया था वह अपने अपने लिए किया था। शादी के चौथे दिन है मेरा ससुर मेरे कमरे में आ गया मेरे साथ बैठ गया और मेरे होंठ पर अपनी उंगली रख कर कहने लगा तुम बहुत खूबसूरत हो। तो मैंने कहा आप ऐसा मुझे नहीं कह सकते इतना कहते ही मेरे ससुर ने मेरे गाल पर एक किस कर लिया और कहने लगा कि देखो तुम्हें अगर खुश रहना है तो तुम्हें मेरे साथ रहना पड़ेगा जिसको तुम पति कह रही हैं वह नामर्द है.

मैंने कहा कि आप मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकते मैं आज अपने घर पर बात करके सारे कुछ बता दूंगी। उन्होंने मेरे घर का नंबर मिला दिया और बोला यह अपनी मां से बात कर ले। मेरी अपनी मां नहीं है मेरी सौतेली मां है जैसे ही मैंने हेलो किया तो मेरी मां बोली तेरे ससुर जैसा कहते हैं वैसा ही तो कर इसके बदले में उन्होंने मुझे ₹200000 दिए हैं।

और यहां आओगी तो तुम्हें घर से निकाल दूंगी मेर ज़िंदगी अब मेरे ससुर के हाथ में चली गयी थी। मैं अब कुछ भी नहीं कर सकती थी। मैं चुपचाप हो गयी। मेरा ससुर मेरे जिस्म को टटोलने लगा। मैं अब चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी।
धीरे धीरे उन्होंने मेरे कपडे उतारने शुरू किया। पहले वो मेरे नंगी जिस्म को खूब निहारा देखा। फिर मेरी संतरो को मसलते हुए पीने लगा। वो जब मेरी निप्पल को अपनी दांतो से काटता तो दर्द भी होता और सुरसुराहट भी होती। धीरे धीरे मुझे ये सब अच्छा लगने लगा। अब मैं भी अपनी जिस्म को धीरे धीरे अपने ससुर को सौंपने लगी। वो अब मेरी निहारने लगा। धीरे धीरे वो सहलाते हुए अपनी ऊँगली मेरी में डालने लगा। अब मैं कामुक होने लगी क्यों की मेरा पति मुझे छुआ तक नहीं था। अब मुझे अपनी ससुर की छुअन अच्छी लगने लगी।

मैं अपना पैर फैला दी। और उनको अपनी जांघ के बिच में ले आई। अब वो मेरी चाटने लगा। मैं आह करने लगी। धीरे धीरे मैं काफी गर्म हो गयी मेरी गीली हो गयी थी मेरी संतरे तन गयी थी। मेरे निप्पल काफी ज्यादा टाइट हो गए थे। अब मैं ठुकने के लिए तैयार थी। ससुर ने अपने सारे कपडे उतार दिए और मेरे ऊपर लेट गए। मैं अपनी बाहों में भर ली उनको। कभी वो मेरी संतरे दबाते तो कभी वो मेरे हिप के तरफ हाथ करके मेरी हिप में ऊँगली करते। मैं कामुकता की हद को पार कर गयी थी। मैं बेपनाह मुहब्बत में थी।

तभी मेरा पति आ गया। उसने देखा उसका बाप मेरे साथ क्या कर रहा था। अब हम दोनों एक पल के लिए चुपचाप हो गए थे। तभी मेरा पति कुर्सी लाया और दिवार के पास कुर्सी लगा कर बैठ गया और अपना हाथ में ले लिया। अब उसका मोटा और लम्बा हो गया था। जैसा की मैं पहले बता चुकी हु जब वो मेरे से दूर रहता है खड़ा रहता है और जैसे ही करीब आता है उसका सूटक जाता है यानी मूंगफली की तरह हो जाता है।

अब मेरा ससुर जोश में आ गया यानी की बड़े के तरफ से भी हरी झंडी मिल गयी थी और मुझे भी मिल गयी थी मेरा पति मेरे सामने बैठा था ताकि मैं ठुक सकूँ। अब क्या था दोस्तों मैं ससुर को बोली चल निचे वो निचे आया और मैं उसपर बैठ गयी. पहले मैं जम कर उसका चूसी। फिर चूमि फिर हिप चाटी। और मैं खुद ही उसके ऊपर रेंगने लगी। तभी मेरा ससुर अपना हाथ में लिया और मेरी गुफा के मुँह पर रखा और निचे से धक्के दे दिया। क्या बताऊँ दोस्तों मजा आ गया था उसके सामान को अपने जिस्म के अंदर घुसाते हुए। करने लगी वो मुझे निचे से धक्के देने लगा मेरी संतरो को मसलते हुए।

अब मैं हिप घुमाने लगी उसके सामान को अपने अंदर लेते हुए। मैं कामुक हो गयी थी मैं जोर जोर से धक्के देने लगी। मेरा ससुर मेरी निप्पल को अपनी ऊँगली से रगड़ते हुए मेरी संतरो को दबाते हुए। जोर जोर से धक्के देने लगी मेरा ससुर मुझे गलियां दे रहा था और जोर जोर से कर रहा था। मेरा पति चुपचाप देख रहा था और हिला रहा था। मैं अब निचे आ गयी और मेरा ससुर ऊपर आ गया। अब मेरी टांगो के बिच बैठ गया। अपना मेरी गुफा पर लगाया और जोर जोर से लगा पेलने। मैं भी कहा कम थी मैं भी करवाने लगी।

करीब एक घंटे तक उन्होंने मुझे किया फिर जाकर दोनों शांत हुए।
उस दिन के बाद मैं अपने ससुर के लिए हो गयी।

अगले भाग के लिए 𝗟𝗶𝗸𝗲 करे 𝗼𝗿 𝗖𝗼𝗺𝗺𝗲𝗻𝘁 मे 𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟮 लिखें

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟭 दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी आज अपनी एक  कहानी लेकर आई हूं.आपको जानकारी के लिए बता देती हूं कि मैं बाड़मेर राजस्थान स...
14/03/2026

𝗣𝗮𝗿𝘁-𝟭 दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी आज अपनी एक कहानी लेकर आई हूं.
आपको जानकारी के लिए बता देती हूं कि मैं बाड़मेर राजस्थान से हूं.
तो दोस्तो, यह कहानी 2023 के नए साल की है.
यह कहानी मेरी और मेरे पति और मेरे देवर और देवरानी के बीच हुए नए साल पर ठुकाई की है.
मेरी शादी तो तीन साल पहले यानि 2019 में हो गई थी और मेरे देवर की शादी अभी पिछले साल मई में हुई थी.
सबसे पहले आपको मेरे और हमारे चारों के बारे में बता देती हूं.
मैं वृत्ति चौधरी. मेरी उम्र 23 साल है,
और मेरा वजन 45 किलो है.
मेरे पति वीरेंद्र चौधरी की उम्र 25 साल है. उनके
पति का वजन लगभग 65 किलो के आसपास है.
अब मैं आपको मेरे देवर नरेश के बारे में बताती हूं.
नरेश की उम्र लगभग मेरे बराबर यानि 23- 24 साल की है. वजन लगभग 75 किलो है.
मेरी देवरानी सीमा की उम्र 20 साल है.
देवर देवरानी की शादी अभी 5- 6 महीने पहले हुई है.
उनकी शादी से पहले देवर और मेरा ठुकाई हो चुका है.
मेरे पति जब घर पर नहीं होते थे तो मैं और देवर आपस में करते थे

यह कहानी में आपको किसी और कहानी में बताऊंगी इसमें ज्यादा लंबी हो जाएगी!

लेकिन मेरे पति इन सब बातों से अनभिज्ञ थे.
जब मेरे देवर नरेश की शादी हो गई तो रात को मैं और मेरे पति घर में ऊपर बने कमरे में सोते थे. उसके पास वाले कमरे में ही देवर और देवरानी सोते थे.
यानि हमारे दोनों कपल के कमरे अगल बगल ही थे.
देवरानी ज्यादा पतली थी और काफी मस्त थी.
लेकिन वह संकोच भी ज्यादा करती थी.
अपने देवर से मैं कई बार उनकी ठुकाई के बारे में पूछती थी. देवर अच्छी तरीके से बता देते थे कि रात कितनी बार किया था, कैसे किया था, क्या क्या हुआ था आदि!
इस तरह देवर अपनी कहानी मुझे बताते थे, तब सुनकर बहुत मजा आता था.
वैसे मैं आपको एक बात बता भूल गई कि मेरे पति सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. वे सुबह स्कूल जाते हैं और वापस शाम को ही घर आते हैं.
और मेरे देवर लकड़ी का काम करते हैं.
वे ज्यादातर राजस्थान से बाहर गुजरात में काम करते हैं.

लेकिन शादी से पहले वे घर पर ही ज्यादा रहते थे, इस कारण हम कर पाते थे!
देवर की शादी के बाद जब दोनों कपल रात को जब भी करते थे तब आपस में ठुकाई की आवाज आती थी यानि थप थप की आवाज सुनाई देती थी.
हमारी आवाज भी देवर और देवरानी को सुनाई देती थी.
वैसे तो मेरे पति करने में काफी एक्सपर्ट हैं, उन्का स्टेमिना सांड के जैसा है, घोड़े के जैसा दमदार हथियार है और गधे की तरह फुल स्पीड में करते हैं.
तब पलंग भी ऐसी आवाज करता है जैसे रहम की भीख मांग रहा हो … चर्र चर्र आदि की आवाज आती हैं.
लेकिन हमारे घर में कमरे ऊपर की मंजिल पर होने से किसी को भी कोई दिक्कत नहीं होती है, न ही आवाज सुनाई देती है.
इस तरह हम लोग बिंदास होकर करते थे.
एक दिन मैंने देवर को कहा था- मुझे आप दोनों की देखनी है!
तब उन्होंने खिड़की को थोड़ा सा खुला रख के मुझे अपनी दिखाई थी.
मैंने देखा था उस पलंग पर देवरानी सीमा पूरी नंगी लेटी हुई थी.

सीमा के शरीर के ऊपर यानि संतरे के आसपास देवर का माल गिरा हुआ था तथा देवर शायद तीसरा राउंड कर रहे थे.
देवरानी के संतरे ज्यादा बड़े नहीं थे क्योंकि नई नई शादी ही हुई थी तब उनकी!
हालांकि जब हमने स्वेपिंग किया था तब तो सीमा के संतरे काफी ज्यादा बड़े हो गए थे और बदन भी काफी ज्यादा भर गया था, हिप भी अच्छी थी यानि उस समय छोटी सी ही थी और देवर जमकर उसकी कर रहे थे.
लेकिन मेरे एक मन में एक बात थी कि अगर हम चारों ही एक कमरे में आकर करते हैं तो बहुत ज्यादा मजा आयेगा.

मुझे और एक नए जिस्म के साथ, सामान के साथ मजे लेने का मौका मिलेगा.
और मेरे पति को भी नई गुफा करने का मौका मिलेगा क्योंकि मेरी अब कुछ ढीली हो गई थी, ऐसा कई बार पति कहते थे.
मैं सोचती थी कि क्यों ना हम इस दीवार को गिरा दें ताकि चारों एक ही बिस्तर पर आकर करें.
इससे ज्यादा इंटरेस्ट आता है, ठुकाई में भी ज्यादा मजा आता है.
और वैसे भी मेरे पति हिप मारने में ज्यादा इंटरेस्टेड होते हैं लेकिन मैं उन्हें कभी भी नहीं देती हूं पीछे!
क्योंकि एक दो बार ट्राई किया था, अंदर गया ही नहीं था, बहुत दर्द कर रहा था.

फिर मैं करते कभी-कभी देवरानी के बखान करती थी पति को उत्तेजित करने के लिए!
और देवर को भी एक दो बार कहा था कि हम चारों मिल कर कर लें!
तब उन्होंने कहा- सीमा मानेगी या नहीं मानेगी, पता नहीं! मैं तो तैयार हूं!
धीरे-धीरे मैंने ऐसे करते-करते मैंने पति को तैयार कर लिया था.
क्योंकि बहुत सारी बातें करके मैंने अपने पति की देवरानी के प्रति नजर ही बदल दी थी.
अब वे भी दिन में देवरानी के संतरर और हिप की तरफ देखते थे.
दिन में कई बार वे किसी न किसी बहाने टच भी करते थे.
हालांकि देवरानी ने कुछ भी नहीं कहा था, उसे लगा होगा कि यह अचानक हुआ होगा!
मैं देवरानी सीमा से भी ठुकाई की बातें करती थी. उसको भी उसकी ठुकाई की बातें पूछती थी.
फिर वह भी मुझसे पूछती थी कि रात को पलंग ज्यादा आवाज कर रहा था … आदि!
इस तरह हम दोनों एक दूसरी को काफी उत्तेजित करती रहती थी.
मैं कई बार उसकी हिप पर थप्पड़ भी मार देती थी, वह भी वापस मार देती थी.

इस तरह हम काफी खुल गई थी एक दूसरी से!
और उधर मेरे देवर भी सीमा को ठुकाई के लिए उत्तेजित करते थे- क्यों ना हम भी ऐसे करें!
तो एक दो बार तो उसने मना किया था लेकिन बाद में वह भी मान गई थी.
और मेरे पति भी देवरानी का फिगर देखकर मान गए थे मुझे अपने भाई से ठुकवाने के लिए.
मैं और देवर तो पहले से ही तैयार थे.
लेकिन मैंने पति को कभी भी यह अहसास नहीं होने दिया था कि मेरे और देवर के बीच पहले ही ठुकाई का खेल खेला जाता रहा है.

मैंने बताया था कि देवरानी सीमा को मैंने मनाया था.
और देवर को सीमा ने ही मनाया था.
अब ठुकाई में मुझे भी मजा आने वाला था क्योंकि मेरे पति के नीचे देवरानी लेटी होगी.
मेरे पति ऐसी दमदार करते हैं कि देवरानी की चीखें निकाल देंगे.
मैं भी बड़ी मुश्किल से उन्हें झेल पाती हूं.
और सीमा तो पतली और छोटी है, कैसे झेल पायेगी?
देवरानी भी मेरे पति को देखकर थोड़ा डरी हुई थी. इस कारण देवर ने भी बड़ी मुश्किल से देवरानी को मनाया था.
फिर नए साल से पहले दिन हम सब ने प्लान बनाया कि हम एक ही कमरे में आकर करेंगे.
फिर नए साल की पूर्व संध्या को 31 दिसंबर को मैं और मेरे पति दोनों कमरे में बैठे थे.
लगभग 9 बज रहे थे.
उस समय मैंने साड़ी पहनी हुई थी, मेरे पति पैंट और शर्ट में थे.
शुरुआत में मेरे देवर नरेश हमारे कमरे में आए.
फिर देवरानी भी आग.
सीमा उस समय राजस्थानी वेशभूषा में बहुत ही सुंदर लग रही थी.
गुलाबी वेशभूषा, घूंघट ओढ़े … ऐसा लग रहा था जैसे सुहाग रात मनाने आई है.

वैसे हमारे यहां प्रथा हैं कि कोई भी स्त्री अपने जेठ और सास ससुर के सामने बिना घूंघट नहीं आएगी.
हमारे कमरे में दो पलंग हैं, एक हम सोते हैं.
हमने दोनों पलंग को पास पास लगा लिया था.
हम चारों बैठ गए, आपस में बातें करने लगे.
तभी देवर जी बाहर गए और सीढ़ियों से आने वाले दरवाजे को बंद किया ताकि कोई नीचे से अचानक ऊपर नहीं आ जाए.
उस समय भयंकर सर्दी का मौसम था.
काफी देर की बातों के बाद मैं देवर के पास जाकर बैठ गई और सीमा को मैंने मेरे पति के पास जाने को बोला.

तो वह संकोच के मारे मुंह दूसरी तरफ करके खड़ी हो गई थी!
बाद में मेरे पति हाथ पकड़ कर सीमा को अपने पलंग पर ले गए.
मैं देवर के पास बैठ कर मस्ती करने लगी.
मेरे पति सीमा को अपने पलंग पर बैठाकर उसके संतरे मसलने लगे थे!
हमारे दोनों पलंग आपस में चिपके हुए थे.
काफी देर बाद देवर ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए.
साथ साथ हमने आपस में करना शुरू किया.
धीरे-धीरे देवर ने मेरी साड़ी, ब्लाउज पेटीकोट उतार दिए.
मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह गई थी.
मेरी पेंटी काफी ज्यादा गीली हो गई थी गुफा के पानी से!
मैंने भी देवर के पैन्ट और शर्ट उतार दिए.
अब वे सिर्फ चड्डी और बनियान के अंदर थे.
चड्डी के अंदर उनका बहुत मोटा सा मूसल का उभार आसानी से दिखाई दे रहा था.
फिर उन्होंने मेरी ब्रा को उतार दिया.
मेरे संतरे एकदम आजाद हो गए जैसे कोई पिंजरे में कैद थे.
और देवर ने उन्हें बस मसलना शुरू किया, मेरे होंठों और गालों पर किस करना शुरू किया.
धीरे-धीरे ऐसे करते-करते मैं काफी उत्तेजित हो गई.
मैंने भी देवर की बनियान उतार दी और चड्डी को भी निकाल कर फेंक दी.
फिर उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी और अपनी भाभी की गुफा पर जुबान लगाकर चाटने लगे.
मेरे शरीर में अजीब सिहरन दौड़ने लगी.
आज तो मुझे मेरे देवर का कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा दिखाई दे रहा था.
यानि एक बार तो मैं देखकर डर गई थी कि आज यह मेरी फाड़ देगा.

देवर का वजन लगभग 75 किलो के आसपास है.
फिर हम दोनों पोजिशन में आ गए.
में उनके बॉल और सामान चूसने लगी थी और वे मेरी गुफा की फांकों को चाटने लगे थे.
मैंने पानी छोड़ दिया तो उन्होंने पूरा पानी पी लिया.
और उन्होंने रस निकलने से थोड़ा पहले मुंह से निकाल कर मेरे पेट पर गिरा दिया.
मेरी देवरानी और मेरे पति पास वाले पलंग पर थे वैसे मैं और सीमा दोनों अगल-बगल में लेटी थी, हम दोनों के सर एक ही दिशा में थे.
तभी मेरी नजर देवरानी पर पड़ी.
अरे … मैं आपको देवरानी का बताना भूल गई कि मेरे पति उसे पकड़ कर अपने पलंग पर लेकर गए थे उसके बाद क्या क्या हुआ था.
वह बहुत ही शरमाई हुई थी, उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था क्योंकि वह मेरी तरह खुले विचारों वाली नहीं थी.

मेरे पति ने उसे नंगी कर दिया तथा अपने कपड़े भी खुद ही उतारे थे.
शुरूआत में जब सीमा नंगी हुई तो वह बहुत संकोच कर रही थी, उसे अपनी गुफा को हाथों से ढक भी लिया था.
लेकिन अब धीरे धीरे वह खुल रही थी.
मस्ती में सीमा के बाल खुल गए थे जो बहुत लंबे थे जो कमर तक आते थे.
तब वे पोजिशन में आए थे.
बाद में पति ने देवरानी को सीधा लिटाकर टांगों को अपने कंधे पर ले लिया.
फिर मेरे पति ने सीमा की हिप के नीचे एक तकिया लगाए और उसे चाटने लगे.

और उसके बाद सामान पर ढेर सारा थूक लगाकर अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगे.
मैं अपनी जगह पर लेटी हुई देवरानी और अपने पति को देख रही थी. मुझे पहले से ही देवरानी की ठुकाई ( उसके पति से) देखना पसंद था.
मेरे पति ने सीमा की टांगें कंधे पर लेकर सामान को उसकी गुफा के छेद पर सेट करके एक धक्का लगाया, लगभग आधा अंदर गया और सीमा की एकदम चीख निकल गई क्योंकि मेरे पति की ठुकाई हर कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता था.

फिर उन्होंने दूसरा ही झटका लगाया और पूरा का पूरा सीमा की गुफा के अंदर समा गया, सीधा बच्चेदानी से जाकर टकराया.
जेठ जी के सामान से सीमा की शरीर में अजीब सी झनझनाहट होने लगी थी.
मेरे पति उसे पूरे जोश से कर रहे थे.
आज पलंग आज कुछ ज्यादा चर्रे चर्रे कर रहा था जैसे अभी टूटा.
इस तरह जबरदस्त ठुकाई से सीमा की तो मानो जान निकल गई हो.
इधर मेरे देवर ने भी अपना हथियार मेरी गुफा पर सेट किया और एक ही झटके में अंदर डाल दिया.
मेरे को गुफा को ठुकते हुए काफी लंबा टाइम हो गया था इसलिए मुझे कुछ ज्यादा दर्द नहीं हुआ था.
फिर वह भी पति के जैसे मुझे पलने लगे.
लगभग 10 मिनट के बाद देवर के जब निकलने वाला हुआ, तब उन्होंने बाहर निकाल कर मेरे पेट और संतरो पर अपना पूरा रस एकदम गर्म लावा डाल दिया और मेरे ऊपर ही लेट गए.

दूसरी तरफ मेरे पति अभी भी देवरानी को कर रहे थे.
हमारे झड़ने के लगभग 5 मिनट बाद उन्होंने भी अपना रस देवरानी के पेट और संतरो और मुंह और बाल तक उछाल कर खाली कर दिया और उसके ऊपर लेट गए.

सीमा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि घोड़े जैसे स्टैमिना और गधे जैसे सामान से पहली बार उसकी हुई थी.
उसके बाद मेरे पति और देवर दोनों ही हमारे दोनों के आसपास लेट गए.
लगभग 10 मिनट के बाद उनके हथियार फिर से तैयार हो गए.
इस बार उन्होंने लेटे-लेटे पीछे से करना शुरू किया यानि एक पलंग पर देवरानी और दूसरे पर मैं … हमारे चेहरे आमने सामने थे.
जबरदस्त करने के लगभग 10 मिनट के बाद मेरे पति और देवर नीचे लेट गए और हम दोनों उनके सामान के ऊपर बैठकर उछलने लगी, यानि सामान की सवारी करने का मौका मिला.
हम दोनों ने जम कर की.
उसके बाद काफी ज्यादा थक गई थी तो लेट गई.
फिर घड़ी में टाइम देखा तो लगभग 11 बज रहे थे.
यानि हमको करते हुए लगभग 2 घंटे हो गए.
आज दिन तक इतनी ठुकाई कभी नहीं हुई थी.
उसके बाद उन भाइयों ने हम दोनों को घोड़ी बनाया.
यानि इस बार मेरा सर और देवरानी का सर आपस में टकरा रहे थे, हम आमने-सामने थी.
सीमा की हिप के पीछे मेरे पति थे, मेरे पीछे मेरे देवर थे.
घोड़ी स्टाइल में उन दोनों ने हम दोनों को करना शुरू किया.
लगभग 10-12 मिनट तक उन्होंने किया , काफी मजा आया सबको … जैसे जन्नत की सैर कर ली हो!
इस दौरान मेरे पति ने मेरी देवरानी की हिप भी मारने की सोची.
उन्होंने अपना गुफा में से निकाल कर थूक लगाकर सीमा की हिप में डाल दिया.
सीमा ने आज तक कभी भी हिप नहीं ठुकवाई थी.
मेरे पति का जब हिप में घुसा तो उसकी हिप फट सी गई थी, उसकी आंखों में आंसू आ गये, वह रोने लग गई.
लेकिन देवर ने मेरी हिप नहीं मारी थी क्योंकि मैंने मना किया था.
उस रात मेरे पति ने देवरानी की जबरदस्त तरीके से हिप मारी.
सीमा उठने लायक हालत में नहीं थी.
उसके बाद हम काफी थक गए थे और मेरे पति ने सीमा को अपने साथ सुला लिया क्योंकि वह चलने की स्थिति में नहीं थी.
मैं और देवर उनके कमरे में चले गए, काफी देर तक हमने प्यार भरी बातें की.
उसके बाद लगभग 1 बजे हम सो गए.
सुबह लगभग 5 बजे मेरी नींद खुली तो मैं अपने कमरे में आई.
तब मेरे पति सीमा को पेल रहे थे.
मेरे पति ने बताया कि सुबह भी उन्होंने एक बार हिप मारी और एक बार गुफा मारी.

उसके बाद मैं भी देवर के कमरे में जाकर उनको जगा कर उनसे ठुक गई.
उधर देवरानी चलने लायक स्थिति में नहीं थी तो मेरे पति ने उसे कपड़े पहनाए और देवर के कमरे में छोड़ गए.
जब मेरे पति सीमा को छोड़ने आए, उस समय देवर मेरे को घोड़ी बनाकर कर रहे थे.
सीमा हमारे पास आकर एकदम निढाल होकर लेट गई.
ठुकाई के बाद मैं नंगी अपने कमरे में चली गई.

सीमा तीन दिन तक चलने लायक की स्थिति में नहीं रही थी क्योंकि उसकी हिप बहुत ज्यादा सूज गई थी और गुफा भी काफी दर्द कर रही थी.
मैंने उसे पेनकिलर गोलियां दी, उसके बाद उसकी हालत सामान्य हुई.
अब जब भी मेरा मन होता है, तब मैं देवर से कर लेती हूं.
और पति का जब भी हिप मारने का मन होता है तो वे अपने छोटे भाई की बीवी की जबरदस्त तरीके से मारते हैं.
मेरे पति सीमा को बाथरूम में, छत पर, किचन में आदि कई जगह नंगी करके पेल चुके हैं.
रात को अकसर हम चारों नंगे सोते हैं.
कभी मैं देवर के कमरे में सोती हूं तो कभी देवर हमारे कमरे में चारों एक साथ बेड पर सोते हैं.
उसके बाद देवर वापस काम पर चले गए, तब पति मुझे और देवरानी दोनों को पेलते हैं.
अब जेठ से ठुक ठुक कर सीमा की गुफा भी ढीली हो गई है और हिप का छेद भी काफी बड़ा हो गया है, अब इतना दर्द नहीं करता है.
अगली बार हम दोनों देवरानी जेठानी का एक साथ दो लेने का विचार है.
हालांकि मैंने अभी तक एक बार भी हिप नहीं मरवाई है.

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