06/10/2026
दिल्ली की सर्वश्रेष्ठ रामलीलाओं का चयन
रामलीला कमिटियों की तैयारियों के साथ 'NBT दशहरा दर्पण 2026' महा मुकाबले की तैयारी भी तेज हो गई है। राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से छोटे-बड़े 100 से ज्यादा आयोजकों ने एंट्री NBT को भेजी। सोमवार को NBT दफ्तर में जूरी के सदस्यों विजय गोयल, अरविंद गौड़ ( Arvind Gaur ), सुनंदा शर्मा और मंजरी चतुर्वेदी ने दो घंटे से ज्यादा समय तक प्रविष्टियों को देख-परखकर गहन विमर्श करके रामलीलाओं को शॉर्टलिस्ट कर लिया।
जूरी ने ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल, साउथ और नॉर्थ बाहरी दिल्ली जोन से कई रामलीलाओं को छांटा है। पॉपुलर और क्रिएटिव कैटिगरी में अवॉर्ड मिलेग। चयनित लीलाओं में NBT की टीम पांचों जेन में 11 से 20 अक्टूबर तक दौरा करके अदाकारी, संवाद, वेशभूषा, मंच, सामाजिक संदेश का जायजा लेगी। आखिर में दिल्ली की सर्वश्रेष्ठ रामलीला की घोषणा होगी।
जूरी को ये बातें आई पसंद:
बड़े मंच, भीड नियंत्रण, CCTV, इको फ्रेंडली, ग्रीन रामलीला, पुरानी और नई रामलीलाओं को लेकर लंबी मंत्रणा चली। रावण के पुतलों की ऊंचाई, मुकुट की भव्यता और शैली ने भी जूरी को आकर्षित किया। दिल्ली में बाल रामलीलाएं भी होती है, जिनमें स्कूली बच्चे हिस्सा लेते है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुराने समय से रामलीलाएं होती रही है। कई कमिटियां अंगदान और रक्तदान जैसे शिविर भी आयोजित कर रही है।
'रामलीला के भाव बच्चों तक पहुंचें, यह जरूरी है'
'दशहरा दर्पण' के लिए मिली लीलाओं में से कुछ लीलाओं को चुनना एक खास अनुभव रहा। एनबीटी की इस मुहिम के साथ रामलीला करने वालो को भी और लीला देखने वालों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। जो लीला कमिटी कुछ हटकर कर रही है, उन लीलाओं ने खींचा। आगे जब जज लीलाओं में जाएंगे तो सबसे जरूरी यह देखना होगा कि क्या लीला सबके समझ में आ रही है? खासतौर पर बच्चों को, क्योंकि रामलीला के भाव उन तक पहुंचे, यह सबसे जरूरी है।
- विजय गोयल, वाइस चेयरपर्सन, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति
यह देखना सुखद रहा कि दिल्ली में रामलीला में तकनीक और अभिनय के स्तर पर बदलाव आ रहे है। अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं से जुड़ी पारंपरिक लीलाएं भी है। हमारी कोशिश रही कि परपरा और आधुनिकता, दोनों को साथ लेकर चले। जिन्होंने क्रिएटिव लिबर्टी के स्तर पर विशेष काम किया है, उन्हें भी शामिल किया गया है। इस बार सबसे खास बात युवाओ और बच्चों की भागीदारी रही। जूरी सदस्यों के साथ विस्तार से चर्चा के बाद हमने श्रेष्ठ रामलीलाओं का चयन करने की कोशिश की है।
- अरविंद गौड, रंगमंच निर्देशक, अस्मिता थियेटर।
बतौर जूरी कई रामलीलाओं के कई पहलुओं को जानने का मौका मिला। जिस हिसाब से इतनी एंट्री मिली है, यह अच्छा संकेत है कि लोग लीला परपरा को आगे बढ़ा रहे है। यह ऐसा मंच है, जो स्थानीय स्तर पर भी प्रयास करने वाली लीलाओं को आगे बढ़ने का मौका दे रहा है। लीलाओं की जो एंट्री मिली, उनमें हमे क्रिएटिविटी और इनोवेशन भी देखने को मिले। हालाकि, हमें यह भी देखना चाहिए कि ऐसा क्या नया नयापन लाए कि नई जनरेशन कनेक्ट हो सके।
-मंजरी चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार
जूरी का हिस्सा बनकर पूरी दिल्ली की रामलीलाओं और हमारी पौराणिक परंपराओं को और करीब से देखने जानने का मौका मिला। यह अनुभव बहुत अच्छा और आखे खोलने वाला रहा। पता चला कि दिल्ली में कई रामलीलाएं दशको पुरानी है और किस-किस तरह से नयापन भी ला रही है। सबसे खास यह लगा कि स्कूली बच्चों को भी रामलीलाओं से जोड़ा जा रहा है। AI के दौर और Gen Z कल्चर के बीच हमारे अच्छे संस्कार भी दिए जाएं तो उसका बहुत अच्छा परिणाम निकल सकता है।
- सुनंदा शर्मा, शास्त्रीय संगीत गायिका
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