14/05/2021
इजराइल को जानो और उसपे हुए ज़ुर्म को जानो , मेरा यकीन है आप इजराइल से मोहब्बत करने लग जाओगे ।
कुल आबादी 93,44, 520
74.2% Judaism
17.8% Islam
2.0% Christianity
1.6% Druze
4.4% other
अंग्रेजों ने जो व्यवस्था यहूदियों को दिया उसे यहूदियों द्वारा तुरन्त मान्यता दे दी गयी , वहीँ अरब समुदाय ने नवेम्बर 1, 1947 तीन दिनों के बन्द की घोषणा की। इसी के साथ गृह युद्ध की स्तिथि बन गए और करीब 2,50,000 फिलिस्तीनी लोगो ने राज्य छोड़ दिया। 14 मई 1948 को यहूदी समुदाय ने ब्रिटिश से पहले स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी और इजराइल को राष्ट्र घोषित कर दिया, तभी सिरिया, लीबिया तथा इराक ने इजराइल पर हमला कर दिया और तभी से 1948 के अरब - इजराइल युद्ध की शुरुआत हुयी। सउदी अरब ने भी तब अपनी सेना भेजकर और मिस्त्र की सहायता से आक्रमण किया और यमन भी युद्ध में शामिल हुआ, लगभग एक वर्ष के बाद युद्ध विराम की घोषणा हुयी और जोर्डन तथा इस्राइल के बीच सीमा रेखा अवतरित हुयी जैसे green line (हरी रेखा) कहा गया और मिस्त्र ने गाज़ा पट्टी पर अधिकार किया, करीब 7,00,000 फिलिस्तीन इस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए।
इजराइल ने 11 मई 1949 में सयुक्त राष्ट्र की मान्यता हासिल की।
अरब समुदाय तथा मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नसीर ने इजराइल को मान्यता नहीं दी और 1966 में इजराइल - अरब युद्ध हुआ ! 1967 में मिस्त्र ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी दल को सनाई पनिसुलेना (1957) को बहार निकाल दिया और लाल सागर में इजराइल की आवागमन बन्द कर दी। जून 5, 1967 को इजराइल ने मिस्त्र जोर्डन सीरिया तथा इराक के विरुद्ध युद्ध घोषित किया और महज 6 दिनों में अपने अरब दुश्मनों को पराजित कर क्षेत्र में अपनी सैनिक प्रभुसत्ता कायम की। इस युद्ध के दौरान इजराइल को अपने हे राज्य में उपस्तिथ फलिस्तीनी लोगो का विरोध झेलना पड़ा इसमें प्रमुख था फिलिस्तीन लिबरेशन ओर्गानिज़शन (पी॰ एल॰ ओ॰) जो 1964 में बनया गया था। 1960 के अंत से 1970 तक इजराइल पर कई हमले हुए जिसमे 1972 में इजराइल के प्रतिभागियों पर मुनिच ओलंपिक में हुआ हमला शामिल है।
6 अक्टूबर, 1973 को सिरिया तथा मिस्त्र द्वारा इजराइल पर अचानक हमला किया गया जब इजराइली योम नमक त्यौहार मन रहे थे, जिसके जवाब में सिरिया तथा मिस्त्र को बहुत भरी नुक्सान उठाना पड़ा।
1976 के दौरान इजराइल के सैनिको ने बड़ी बहादुरी से 95 बन्धको को छुड़ाया।
1977 के आम चुनावो में लेबर पार्टी की हार हुयी और इसी के साथ मेनाचिम बेगिन सत्ता में आये तभी अरब नेता अनवर सद्दात ने इस्रैल की यात्रा को जिस से इजराइल-मिस्त्र समझोते (1979) की नीव पड़ी।
मार्च 11, 1978 में लेबनान से आये पी॰ एल॰ ओ॰ के आतंकियों ने 35 इजराइली नागरिकों की हत्या कर दे और 75 को घायल कर दिया जवाब में इजराइल ने लेबनान पर हमला किया और प॰एल.ओ के सदस्य भाग खड़े हुए।
1980 में इज़रायल ने जेरुसलेम को अपनी राजधानी घोषित किया जिस से अरब समुदाय नाराज़ हो गया।
जून 7, 1981 में इज़रायल ने इराक का सोले परमाणु सयन्त्र तबाह कर दिया।