Amrita Prakash_curator

Amrita Prakash_curator Art Exhibition

07/08/2026

Celebrating creativity, expression, and artistic excellence. ✨

Art Spectra is delighted to present the inspiring works of Leeladhar Mandloi at our Group Art Exhibition.

Every artwork tells a unique story, reflecting imagination, passion, and the artist's creative journey.
Join us and experience an exhibition where diverse artistic voices come together under one roof.

📍 Venue: Open Palm Art Gallery, India Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi

📅 Dates: 11th–16th August 2026
🕚 Time: 11:00 AM – 7:00 PM

We look forward to welcoming you!

07/08/2026

Celebrating creativity, expression, and artistic excellence. ✨

Art Spectra is delighted to present the inspiring works of Amit Vardhan at our Group Art Exhibition.
Every artwork tells a unique story, reflecting imagination, passion, and the artist's creative journey.
Join us and experience an exhibition where diverse artistic voices come together under one roof.

📍 Venue: Open Palm Art Gallery, India Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi

📅 Dates: 11th–16th August 2026
🕚 Time: 11:00 AM – 7:00 PM
We look forward to welcoming you!

11/07/2026
सुरों से सजी एक अविस्मरणीय संध्या…  २२ जून को सोपोरी संगीत एवं प्रदर्शन कला अकादमी (समापा) द्वारा आयोजित तृतीय विश्व संत...
10/07/2026

सुरों से सजी एक अविस्मरणीय संध्या…
२२ जून को सोपोरी संगीत एवं प्रदर्शन कला अकादमी (समापा) द्वारा आयोजित तृतीय विश्व संतूर दिवस में शामिल होने का अवसर मिला। यह आयोजन पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी जी की जयंती पर उन्हें समर्पित था। पिछले तीन वर्षों से उनके पुत्र पंडित अभय रुस्तम सोपोरी इस आयोजन के माध्यम से अपने पिता की संगीत साधना, उनकी सोच और उनकी समृद्ध विरासत को पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। यह केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक परंपरा को जीवित रखने का सुंदर प्रयास है।
संगीत हमेशा से मेरे जीवन का प्रिय विषय रहा है। अलग-अलग प्रकार का संगीत सुनना मुझे बहुत पसंद है, लेकिन वाद्य संगीत का अपना ही आकर्षण होता है। जब संतूर के मधुर स्वर वातावरण में गूंजते हैं, तो मन अपने आप शांत हो जाता है। इस संध्या ने वही सुकून फिर से महसूस कराया।
कार्यक्रम में पंडित अभय रुस्तम सोपोरी की प्रस्तुति ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके दिव्यांश श्रीवास्तव और पंडित संदीप चटर्जी की प्रस्तुतियाँ भी उतनी ही प्रभावशाली रहीं। तबले पर खुर्रम अली नियाज़ी, पंडित दुर्जय भौमिक और उस्ताद अकरम ख़ान, घटम पर वरुण राजशेखरन तथा पखावज पर महंत पंडित विश्वम्भर नाथ मिश्र की संगत ने पूरे कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन साधना श्रीवास्तव ने अत्यंत सुंदर ढंग से किया।
अभय जी से मेरी पहली मुलाकात कई वर्ष पहले हुई थी। दूरदर्शन के लिए उन पर एक विशेष कार्यक्रम बनाया जा रहा था और उसी दौरान उनसे मिलने का अवसर मिला। आज भी कैंटीन में उनके साथ चाय पीते हुए हुई छोटी-सी बातचीत याद आती है। पहली ही मुलाकात में उनका सहज, शांत और विनम्र स्वभाव मन को छू गया था। बाद में वे मेरी एक कला प्रदर्शनी में मुख्य अतिथि के रूप में भी आए। हमारी मुलाकातें बहुत अधिक नहीं रहीं, लेकिन किसी न किसी रूप में जुड़ाव हमेशा बना रहा।
आज पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी संगीत परंपरा को पंडित अभय रुस्तम सोपोरी जिस समर्पण और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, वह वास्तव में प्रेरणादायक है। अपने पिता को समर्पित इस आयोजन को लगातार तीसरे वर्ष सफलतापूर्वक आयोजित करना इस बात का प्रमाण है कि वे केवल उनकी स्मृतियों को संजो नहीं रहे, बल्कि उनकी साधना और संगीत की विरासत को नई पीढ़ी तक भी पहुँचा रहे हैं। उन्हें एक कलाकार के रूप में निरंतर आगे बढ़ते देखना, श्रोताओं का बढ़ता स्नेह और सम्मान प्राप्त करते देखना मन को सच्ची खुशी देता है।
यदि आप भारतीय शास्त्रीय संगीत और वाद्य संगीत से प्रेम करते हैं, तो ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनने का अवसर कभी न छोड़ें। कुछ संगीत केवल सुना नहीं जाता, बल्कि जीवन भर महसूस किया जाता है।

10/07/2026

A beautiful throwback from my curatorial journey... 🎨✨
Looking back at Colour Spectra–2 (2018), a memorable group art exhibition held at ICCR Art Gallery, Hyderabad.
It was a wonderful experience bringing together talented artists from across India and abroad on a single platform to celebrate creativity and artistic expression.
Heartfelt gratitude to all the participating artists, distinguished guests, supporters, and everyone who made this exhibition a memorable success. Every exhibition has been a stepping stone in my journey, and this one will always hold a special place in my heart.
Participating Artists:
Ashuma Dewan, Ambika Wahi, Agnes D'Cruz Rajesh, Alekhya Anandesi, Babita Hundal, Chandana Khan, Ch. Sreepathy, Dinesh Bajantri, Debabrata Biswas, Goutham Vavilala, Ipek Denizli Kargoz (North Cyprus), Dr. Meera Kumar, M. Sreenu, Naresh Kumar Pallati, Prasuna Murali, Pramila Giria, Dr. Ritu Johri, Rashmi Pradhan, Rayapuraju Sanjay, Renu M. J. Singh, Sastry Sanyasayya, Shweta Kamlakar Rukme, Sravanthi Peddireddy, Tuljanand Manik, T. Tavitraju, Violette Mischchenko (Ukraine), U. Vijay Kumar, and Vasu Nadimini.
Forever grateful for the memories, the artists, and the journey. ❤️

हाल ही में वरिष्ठ कलाकार बीरेंद्र पानी जी की एकल प्रदर्शनी "Neo Urban Avatar: A Mythopoesis of the Contemporary Times–II...
09/07/2026

हाल ही में वरिष्ठ कलाकार बीरेंद्र पानी जी की एकल प्रदर्शनी "Neo Urban Avatar: A Mythopoesis of the Contemporary Times–II" देखने का अवसर मिला, जो इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (नई दिल्ली) में आयोजित है। उनके निमंत्रण पर इस प्रदर्शनी में जाना मेरे लिए केवल एक प्रदर्शनी देखने भर का अनुभव नहीं था, बल्कि समकालीन कला को एक अलग दृष्टि से समझने का अवसर भी था।

बीरेंद्र पानी जी मूल रूप से ओडिशा से हैं और वर्तमान में बड़ौदा स्थित अपने स्टूडियो से सक्रिय रूप से सृजन कर रहे हैं। उनके काम को इतने विस्तार से देखने और उन पर बातचीत करने का अवसर मिला। उनकी पत्नी से भी मुलाकात हुई, जो स्वयं एक कलाकार हैं। कला से जुड़े लोगों के बीच होने वाली बातचीत हमेशा विचारों के नए द्वार खोलती है, और इस मुलाकात में भी वही आत्मीयता महसूस हुई।

प्रदर्शनी में प्रदर्शित उनकी कृतियाँ पहली नज़र में ही दर्शक का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं। लेकिन जैसे-जैसे आप हर चित्र के सामने थोड़ा समय बिताते हैं, उनमें छिपी अनेक परतें धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। उनकी कला केवल देखने के लिए नहीं है, बल्कि वह दर्शक को सोचने, ठहरने और अपने समय से जुड़े सवालों पर मनन करने के लिए प्रेरित करती है।

उनकी रचनाओं में भारतीय मिथक, लोक-संस्कृति, स्मृतियाँ, प्रकृति, बदलता शहरी परिवेश, उपभोक्तावाद और आज के समय की जटिलताएँ बेहद सहजता से एक साथ दिखाई देती हैं। वे परंपरा और समकालीन जीवन के बीच एक ऐसा संवाद रचते हैं, जिसमें भारतीयता की गहरी छाप भी बनी रहती है और वर्तमान समय की बेचैनियाँ भी स्पष्ट रूप से महसूस होती हैं। यही संतुलन उनके काम को विशिष्ट बनाता है।

उनकी ड्रॉइंग-आधारित चित्र-भाषा, बारीक रेखांकन और प्रतीकों का प्रयोग बेहद प्रभावशाली है। हर चित्र में कई छोटे-छोटे दृश्य और संकेत मौजूद हैं, जो दर्शक को बार-बार उसी कैनवास के पास लौटने के लिए प्रेरित करते हैं। एक ही कृति हर बार कुछ नया कहती हुई प्रतीत होती है। यही किसी गंभीर कलाकार की पहचान भी है कि उसकी कला समय के साथ नए अर्थ खोलती चली जाए।

कई वर्षों की उनकी साधना, अनुशासन और निरंतर प्रयोगधर्मिता उनके हर कार्य में स्पष्ट दिखाई देती है। वे अलग-अलग विषयों पर काम करते हैं, लेकिन उनकी कला की जड़ें भारतीय सांस्कृतिक चेतना से गहराई से जुड़ी हुई हैं। साथ ही, समकालीन समाज और बदलती दुनिया पर उनकी दृष्टि भी उतनी ही संवेदनशील और विचारोत्तेजक है।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (नई दिल्ली)t जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान में इस प्रदर्शनी को देखने का अनुभव मेरे लिए बेहद प्रेरणादायक रहा। बीरेंद्र पानी जी को इस सफल प्रदर्शनी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। मैं विश्वास करती हूँ कि उनकी कला आगे भी इसी तरह दर्शकों को नए विचारों, नए प्रश्नों और नई संवेदनाओं से जोड़ती रहेगी।

आज प्रलय दत्ता जी की एकल प्रदर्शनी त्रिवेणी कला संगम में देखने का अवसर मिला। उनसे मिलना हमेशा ही अच्छा लगता है। पिछले लग...
05/07/2026

आज प्रलय दत्ता जी की एकल प्रदर्शनी त्रिवेणी कला संगम में देखने का अवसर मिला। उनसे मिलना हमेशा ही अच्छा लगता है। पिछले लगभग दस वर्षों से हम लोग कला के माध्यम से जुड़े हुए हैं। इस दौरान कई प्रदर्शनियों में साथ काम करने का मौका मिला इतने वर्षों में उनकी कला यात्रा को बहुत करीब से देखने का अवसर मिला है।

हर कलाकार की अपनी एक अलग यात्रा होती है और समय के साथ उसकी सोच, उसका काम और उसकी अभिव्यक्ति भी बदलती रहती है। पिछले कुछ वर्षों से प्रलय जी ने एकल प्रदर्शनियों पर ध्यान देना शुरू किया है। मुझे लगता है कि यह उनके लिए एक बहुत अच्छा निर्णय है। एकल प्रदर्शनी किसी भी कलाकार को अपनी पूरी सोच और अपनी पहचान के साथ दर्शकों के सामने आने का अवसर देती है।

उनके काम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह लगातार प्रयोग करते रहते हैं। अमूर्त कला (Abstract Art) में उन्होंने अपनी एक अलग भाषा विकसित की है। रंगों का चयन, उनका संतुलन और कैनवास पर उन्हें व्यवस्थित करने का तरीका हर बार कुछ नया देखने का अनुभव देता है। उनके चित्रों को देखकर महसूस होता है कि वे केवल रंगों से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों और विचारों से संवाद कर रहे हैं।

इस प्रदर्शनी में उनके कई काम विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। एक कलाकार के रूप में उनकी सोच कितनी विकसित हुई है, यह उनके प्रत्येक कार्य में दिखाई देता है। उन्हें इस नई दिशा में आगे बढ़ते देखना सचमुच खुशी की बात है।

यदि आप कला प्रेमी हैं और समय निकाल सकते हैं, तो इस प्रदर्शनी को अवश्य देखें। मुझे विश्वास है कि यह प्रदर्शनी आपको भी एक अलग अनुभव देकर जाएगी।

20/06/2026

A heartfelt thank you to every Artists who has been part of my Curotrial journey.
A special thanks to Ram Krishna Agrawal for his kind words..
Thank you for being an important part of my Journey. ❤️

......

20/06/2026

A heartfelt thank you to every Artists who has been part of my Curotrial journey.
A special thanks to Great Actor, Painter and Poet Mr. Pankaj Jha for his Kind words.. What a lovely Person...
I am grateful to him for his lovely words.🙏
Thank you for being an important part of my Journey. ❤️

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