05/12/2025
ज़िंदगी की कड़वी सच्चाई🥺💯
बचपन में हम सबको लगता था —
जल्दी बड़े हो जाएँगे तो पूरी आज़ादी मिलेगी,
जहाँ दिल चाहे वहाँ जाएँगे,
किसी की रोक‑टोक नहीं होगी।
लेकिन जैसे‑जैसे बड़े हुए,
समझ आया कि आज़ादी कम
और ज़िम्मेदारियाँ ज़्यादा मिलती हैं।
हर दोस्त अपनी‑अपनी दौड़ में खो गया —
कोई नौकरी में,
कोई शादी में,
कोई अपनी परेशानियों में।
और हम कहीं अंदर से ये महसूस करने लगे
कि असली आज़ादी तो शायद
बचपन के साथ ही पीछे छूट गई।
अगर तुम्हें भी अपना बचपन याद आ गया हो,
तो इस पोस्ट को Share करो
और Comment में लिखो: “काश बचपन लौट आता।