23/04/2021
देश के जाने माने तीन चिकित्सक एम्स निदेशक डॉ गुलेरिया, मेदांता के डॉ नरेश त्रेहन तथा नारायण संस्थान बेंगलुरु के डॉ देवी शेट्टी दूरदर्शन के पर्दे पर एक साथ आये ....
चूंकि कोई बकबक चैनल नहीं, डीडी न्यूज़ का मंच था..अतः पूरा समय उन्हीं तीनों के पास था..बीच में कोई सम्पादक या एंकर नहीं !!
ऐसा प्रयोग दूरदर्शन ही कर सकता है, अतः आधे घण्टे तक कोविड के बारे में संतुष्ट करने वाली विशद जानकारी सामने आई..!!
यही फर्क है दूरदर्शन और नए-नए कमर्शियल न्यूज चैनल्स में ! बात एक बार फिर साफ हुई !
कोरोना की दूसरी लहर 2 - 3 वेरियंट लेकर आई है..और हमारी मूर्खताओं के कारण तेजी से फैल रही है..घबराई जनता अस्पतालों की तरफ दौड़ रही है, घरों में ऑक्सीजन, दवाएं और इंजेक्शन इकट्ठे किये जा रहे हैं..!!
नतीजा यह कि, ऐसे मरीजों से अस्पतालों के बैड्स भर गए हैं, जिन्हें घर पर ही इलाज की जरूरत है..कितना समझाएं कोई मानता नहीं.!!
बिना जरूरत रेमडिसिवर और ऑक्सीजन लेने की जिद की जा रही है..इस भीड़ ने सारा परिदृश्य ही बदल दिया है..डर, घर-घर फैल गया है.!!
बहुत सी बातें साफ हुईं..तीनों विशेषज्ञों ने माना कि केवल 10 से 15% लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत है..बाकी का इलाज घर पर हो सकता है.!!
दिक्कत यह है कि, कालाबाजारियों ने बाजार से दवा गायब कर दी है और मोटे ब्लैक में बेच रहे हैं..ऐसे मौत के सौदागरों को पकड़कर सड़कों पर बजाने की जरूरत है.!!
उनके घर भी जप्त किये जाएं, ताकि उस परिवार को भी पता चले, जो लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ में भागीदार हैं..पति की ब्लैक की कमाई पर जो गुलछर्रे उड़ा रहे हैं, वे भी कम दोषी नहीं.!!
ये वे ही जल्लाद हैं जो लाशों को भी नोचकर कबाड़ी की दूकान पर बेच देते हैं..राष्ट्रीय आपदा के दौर में ऐसे आदमखोरों को कड़ा सबक सिखाना जरूरी है.!!
हौसला बढ़ाइए, अपना भी और दूसरों का भी.!!
क्या आप जानते हैं कि, रोजाना एक लाख से ऊपर मरीज ठीक होकर भी लौट रहे हैं ?
क्या आपको पता है कि वैक्सीन और डबल वैक्सीन लगवा चुके 13 करोड़ लोगों में से केवल 7000 को कोरोना हुआ है.? क्
या आप जानते हैं कि,हमारी देसी “कोवैक्सीन” कोरोना के डबल और ट्रिपल वेरियंट पर भी कारगर है.??
नहीं जानते हैं, तो जान लीजिए.!!
मतलब वेक्सीनेशन कराइए, बेफिक्र हो जाइए.!!
उन लोगों की संख्या बेहद कम है, जिन्हें वेक्सीनेशन के बाद भी कोरोना हो रहा है.!!
यकीन रखिए अपने वैज्ञानिकों पर, बेवजह शोर मत मचाइए..घबराने से अधिक जरूरत सावधानी की है.!!
याद है न, सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी.!!
अच्छा हो यदि निजी न्यूज चैनल देखने से बचें..जितने अधिकतम प्रबंध हो सकते हैं, सरकार और अस्पतालों द्वारा किये जा रहे हैं..काम भी दिनरात चल रहा है.!!
पिछले साल से कहीं अधिक संसाधन जुटाए जा रहे हैं..बाजी तो जीतनी है, यकीनन जीत भी लेंगे.!!
फिलहाल जरूरत के हिसाब से बाहर निकलिए..!!
देखिए, हमें जीने का हक है..!!
एक भी घर उजड़ता है तो बड़ी चोट लगती है..दिलों को हौसले जगाकर मजबूत कीजिए.!
आखिर जीवन का सतत प्रवाह हमारा इंतजार कर रहा है..!!
“यह वसुधा हमारे लिए ही तो है”
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