08/09/2026
तुमसे कोई वादा नहीं था,
फिर भी तुम्हें खोने का डर था।
अजीब था ना
तुम मेरे थे ही नहीं,
फिर भी तुम्हारे जाने से
मेरे भीतर कुछ कम हो गया।
मैंने तुम्हें रोकना चाहा,
मगर मोहब्बत में
हाथ पकड़ना आता था,
हक़ माँगना नहीं।
तुम चले गए...
और मैं आज भी
उस आख़िरी मुलाक़ात को
अपने भीतर ऐसे रखे हूँ
जैसे जेब में कोई पुरानी पर्ची
स्याही मिट गई,
मगर उँगलियाँ अब भी
उसके शब्द पहचानती हैं।
तुम्हें शायद याद भी न हो
कि तुमने मुझे क्या दिया था।
मुझे याद है
तुमने मेरे अंदर
एक ऐसा इंसान जगा दिया
जो तुम्हारे बाद
किसी और को
पूरा दिल दे ही नहीं पाया।
कुछ लोग
ज़िंदगी में आते नहीं...
बस एक बार छूकर
उम्र भर के लिए
अंदर रह जाते हैं।