25/06/2026
बुंदेलखंड का सिस्टम एक्सपोज्ड: क्या पानी के लिए जान दांव पर लगाना ही यहाँ की नियति है? 🚨
उत्तर प्रदेश का महोबा जिला, जो आबादी के मामले में सबसे छोटा क्षेत्र माना जाता है, आज वहां की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। ग्राम अकबई की यह जमीनी हकीकत देखकर किसी का भी दिल दहल जाएगा।
पिछले 11 महीनों से रेलवे के काम की वजह से गांव की सरकारी पानी की पाइपलाइन कटी हुई है。 बार-बार शिकायत करने, सीएम हेल्पलाइन (1076) पर रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं。
इस जल संकट की दर्दनाक तस्वीरें:
• पढ़ाई छोड़ कतारों में खड़े युवा: जो बच्चे और युवा पुलिस भर्ती या कॉलेज (BA) की पढ़ाई कर के अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उनका दिन और रात के 2-2 बजे तक का समय सिर्फ पानी की लाइनों में बर्बाद हो रहा है。
• 77 साल के बुजुर्ग की बेबसी: इस उम्र में जहां आराम करना चाहिए, वहां एक बुजुर्ग अपनी दिव्यांग (अंधी) पत्नी और खुद का पेट पालने के लिए साइकिल पर पानी ढोने को मजबूर हैं。
• भीषण गर्मी और बिजली की मार: इस तपती गर्मी में अगर बिजली चली जाए, तो लोगों को घंटों पानी के बोरवेल पर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है。
"नेताओं को चुनाव के वक्त तो सूट-बूट पहनकर जनता का वोट चाहिए होता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे गायब हो जाते हैं।
क्या महोबा की इस जनता के पास मूलभूत अधिकारों के लिए भी कोई हक नहीं है?"
हमारी शासन-प्रशासन से पुरजोर अपील है कि ग्राम अकबई में तुरंत पानी की व्यवस्था बहाल की जाए और रिंग बोर की व्यवस्था कराई जाए ताकि लोगों को इस नरक जैसी जिंदगी से निजात मिल सके।
👇 पूरा ग्राउंड रिपोर्ट वीडियो देखने और इस आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:
https://youtu.be/iWs_EpvMzwU?si=ZuFGNvXgAXk1K7p0
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