Mussoorie

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kampty Fall.....
26/10/2012

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20/08/2012
19/08/2012

गन हिल
मसूरी की दूसरी सबसे ऊंची चोटी पर रोप-वे द्वारा जाने का आनंद लें। यहां पैदल रास्ते से भी पहुंचा जा सकता है, यह रास्ता माल रोड पर कचहरी के निकट से जाता है और यहां पहुंचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है। रोप-वे की लंबाई केवल 400 मीटर है। सबसे ज्यादा इसकी सैर में जो रोमांच है, वह अविस्मरणीय है।
गन हिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला अर्थात् बंदरपंच, श्रीकांता, पिठवाड़ा और गंगोत्री समूह आदि के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं, साथ ही मसूरी और दून-घाटी का विहंगम दृश्य भी यहां से देखे जा सकते हैं। आजादी-पूर्व के वर्षों में इस पहाड़ी के ऊपर रखी तोप प्रतिदिन दोपहर को चलाई जाती थी ताकि लोग अपनी घड़ियां सैट कर लें, इसी कारण इस स्थान का नाम गन हिल पड़ा।

म्युनिसिपल गार्डन
मसूरी का वर्तमान कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन आजादी से पहले तक बोटेनिकल गार्डन भी कहलाता था। कंपनी गार्डन के निर्माता विश्वविख्यात भूवैज्ञानिक डॉ. एच. फाकनार लोगी थे। सन्‌ 1842 के आस-पास उन्होंने इस क्षेत्र को सुंदर उद्यान में बदल दिया था। बाद में इसकी देखभाल कंपनी प्रशासन के देखरेख में होने लगा था। इसलिए इसे कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन कहा जाने लगा।
तिब्बती मंदिर
बौद्ध सभ्यता की गाथा कहता यह मंदिर निश्चय ही पर्यटकों का मन मोह लेता है। इस मंदिर के पीछे की तरफ कुछ ड्रम लगे हुए हैं। जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें घुमाने से मनोकामना पूरी होती है।
चाइल्डर्स लॉज
लाल टिब्बा के निकट यह मसूरी की सबसे ऊंची चोटी है। टूरिस्ट कार्यालय से यह 5 कि.मी. दूर है, यहां तक घोड़े पर या पैदल भी पहुंचा जा सकता है। यहां से बर्फ के दृश्य देखना बहुत रोमांचक लगता है।
कैमल बैक रोड
कुल 3 कि.मी. लंबा यह रोड रिंक हॉल के समीप कुलरी बाजार से आरंभ होता है और लाइब्रेरी बाजार पर जाकर समाप्त होता है। इस सड़क पर पैदल चलना या घुड़सवारी करना अच्छा लगता है। हिमालय में सूर्यास्त का दृश्य यहां से सुंदर दिखाई पड़ता है। मसूरी पब्लिक स्कूल से कैमल रॉक जीते जागते ऊंट जैसी लगती है।
झड़ीपानी फाल
यह फाल मसूरी-झड़ीपानी रोड पर मसूरी से 8.5 कि.मी. दूर स्थित है। पर्यटक झड़ी- पानी तक 7 कि.मी. की दूरी बस या कार द्वारा तय करके यहां से पैदल 1.5 कि.मी. दूरी पर झरने तक पहुंच सकते हैं।
भट्टा फाल
यह फाल मसूरी-देहरादून रोड पर मसूरी से 7 कि.मी. दूर स्थित है। पर्यटक बस या कार द्वारा यहां पहुंचकर आगे की 3 कि.मी. दूरी पैदल तय करके झरने तक पहुंच सकते हैं। स्नान और पिकनिक के लिए यह अच्छी जगह है।
कैम्पटी फाल
यमुनोत्री रोड पर मसूरी से 15 कि.मी. दूर 4500 फुट की ऊंचाई पर यह इस सुंदर घाटी में स्थित सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत झरना है, जो चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों से घिरा है। झरने की तलहटी में स्नान तरोताजा कर देता है और बच्चों के साथ-साथ बड़े भी इसका आनंद उठाते हैं। मसूरी-यमुनोत्री मार्ग पर नगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना पांच अलग-अलग धाराओं में बहता है, जो पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यह स्थल समुद्रतल से लगभग 4500 फुट की ऊंचाई पर है। इसके चारों ओर पर्वत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं। अंगरेज अपनी चाय दावत अकसर यहीं पर किया करते थे, इसीलिए तो इस झरने का नाम कैंपटी (कैंप+टी) फाल है। यमुनोत्री के रास्ते में 1370 मीटर की ऊंचाई पर कैम्प्टी जलप्रपात स्थित है। मसूरी से इसकी दूरी 15 किलोमीटर है। यह मसूरी घाटी का सबसे सुंदर जलप्रपात है।
ऊंचे-ऊंचे पर्वतों से घिरे इस जलप्रपात के मनभावन नजारे लोगों का दिल जीत लेते हैं। यहां की शीतलता में नहाकर पर्यटकों का मन तरोताजा हो जाता है। खासतौर से गर्मी के मौसम में कैम्प्टी जलप्रपात में स्नान करने का अनुभव आप जिंदगी भर नहीं भुला पाएंगे।
कैम्प्टी जलप्रपात के निकट कैम्प्टी झील है। लोग यहां पर अपने परिवार एवं मित्रों के साथ समय बिताने के लिए आते हैं। यहां उपलब्ध नौकायन और टॉय ट्रेन की सुविधा बच्चों को खासा लुभाती है। यही नहीं, यह स्थल पिकनिक मनाने के इच्छुक लोगों में बहुत ही लोकप्रिय है।
नाग देवता मंदिर
कार्ट मेकेंजी रोड पर स्थित यह प्राचीन मंदिर मसूरी से लगभग 6 कि.मी. दूर है। वाहन ठीक मंदिर तक जा सकते हैं। यहां से मसूरी के साथ-साथ दून-घाटी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
मसूरी झील
मसूरी-देहरादून रोड पर यह नया विकसित किया गया पिकनिक स्पॉट है, जो मसूरी से लगभग 6 कि.मी. दूर है। यह एक आकर्षक स्थान है। यहां पैडल-बोट उपलब्ध रहती हैं। यहां से दून-घाटी और आसपास के गांवों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
वाम चेतना केंद्र
टिहरी बाई-पास रोड पर लगभग 2 कि.मी. की दूरी पर यह एक विकसित किया गया पिकनिक स्पॉट है, इसके आसपास पार्क है जो देवदार के जंगलों और फूलों की झाड़ियों से घिरा है। यहां तक पैदल या टैक्सी/कार से पहुंचा जा सकता है। पार्क में वन्य प्राणी जैसे घुरार, कण्णंकर, हिमालयी मोर, मोनल आदि आकर्षण के मुख्य केंद्र हैं।
सर जॉर्ज एवरेस्ट हाउस
6 कि.मी. की दूरी पर भारत के प्रथम सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट की दि पार्क एस्टेट है, उनका आवास और कार्यालय यहीं था, यहां सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया है।
ज्वालाजी मंदिर (बेनोग हिल)
मसूरी से 9 कि.मी. पश्चिम में 2104 मी. की ऊंचाई पर ज्वालाजी मंदिर स्थित है। यह बेनोग हिल की चोटी पर बना है, जहां माता दुर्गा की पूजा होती है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल है, जहां से हिमालय की चोटियों, दून घाटी और यमुना घाटी के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।
क्लाउड्स एंड
यह बंगला 1838 में एक ब्रिटिश मेजर ने बनवाया था, जो मसूरी में बने पहले चार भवनों में से एक है। अब इस बंगले को होटल में बदला जा चुका है, क्लाउड्स एंड कहे जाने वाला यह होटल मसूरी हिल के एकदम पश्चिम में, लाइब्रेरी से 8 कि.मी. दूर स्थित है। यह रिजार्ट घने जंगलों से घिरा है, जहां पेड़-पौधों की विविध किस्में हैं साथ ही यहां से हिमालय की हिमाच्छादित चोटियां और यमुना नदी को देखा जा सकता है। विदेशी पर्यटकों और हनीमून पर आने वाले दंपत्तियों के लिए यह सबसे उपयुक्त रिजार्ट है।

19/08/2012

मसूरी का इतिहास सन 1825 में कैप्टन यंग, एक साहसिक ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी और श्री.शोर, देहरादून के निवासी और अधीक्षक द्वारा वर्तमान मसूरी स्थल की खोज से आरम्भ होता है। तभी इस छुट्टी पर्यटन स्थल की नींव पड़ी, जिसके अभी तक भी कुछ ही विकल्प कहलाते हैं। 1827 में एक सैनिटोरियम बनवाया गया, लैंढ़ौर में, जो आज कैन्टोनमैन्ट बन चुका है।[1], कर्नल एवरेस्ट ने यहीं अपना घर बनाया 1832 में, और 1901 तक यहां की जनसंख्या 6461 थी, जो कि ग्रीष्म ऋतु में 15000 तक पहुंच जाती थी। पहले मसूरी सड़क द्वारा सहारनपुर से गम्य था, 58 कि.मि.दूर। सन 1900 में इसकी गम्यता सरल हो गयी यहां रेल के आने से, जिससे सड़क मार्ग छोटा होकर केवल 21 कि.मी. रह गया।}}.[2] इसके नाम के बारे में प्रायः लोग यहां बहुतायत में उगने वाले एक पौधे ”’मंसूर”’ को इसके नाम का कारण बताते हैं, जो लोग, अभी भी इसे मन्सूरी कहते हैं।

19/08/2012

मसूरी भारत के उत्तराखंड प्रान्त का एक नगर है। देहरादून से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मसूरी उन स्थानों में से एक है जहां लोग बार-बार जाते हैं। घूमने-फिरने के लिए जाने वाली प्रमुख जगहों में यह एक है। यह पर्वतीय पर्यटन स्थल हिमालय पर्वतमाला के शिवालिक श्रेणी में पड़ता है, जिसे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। निकटवर्ती लैंढ़ौर कस्बा भी बार्लोगंज और झाड़ीपानी सहित वृहत या ग्रेटर मसूरी में आता है। इसकी औसत ऊंचाई समुद्र तल से 2005 मी. (6600फ़ीट) है, जिसमें हरित पर्वत विभिन्न पादप-प्राणियों समेत बसते हैं। उत्तर-पूर्व में हिम मंडित शिखर सिर उठाये दृष्टिगोचर होते हैं, तो दक्षिण में दून घाटी और शिवालिक श्रेणी दिखती है। इसी कारण यह शहर पर्यटकों के लिये परीमहल जैसा प्रतीत होता है। मसूरी गंगोत्री का प्रवेश द्वार भी है। देहरादून में पायी जाने वाली वनस्पति और जीव-जंतु इसके आकर्षण को और भी बढ़ा देते हैं। दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए यह लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन पर्यटन स्थल है।

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19/08/2012

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19/08/2012

Mussoorie is known to hold a year full of cultural, spiritual and religious events, beginning with the popular Siddha Fair. This religious fair and gathering is held every Sunday. It holds the most importance on the last Sunday of April, which is when people from all over the region and country join to offer prayers. The sight is touching and educational, not to mention a large moment of pride for the people of Mussoorie. Kunjapuri Fair is another major fair, held every year in October during the celebrated Navrataras. Mussoorie’s style of events are always large and powerful, and Kunjapuri Fair is a prime example – over fifty thousand people arrive each year to both offer and purchase from the vibrant displays of local handicrafts and handmade items, all unique in their own splendour. The Surkhanda Devi Fair focuses on the religious side of festivities, as it is held on the precious Ganga Dussehra day at the renowned Surkhanda Devi temple. This fair is dedicated to the Goddess Durga, and serves as a highly involved pilgrimage center during worship of the Goddess. The main attraction is the holy ceremony, which then proceeds into celebrating through music and dance; and more beautiful handicrafts are put on display. The rich blend of culture and lifestyle welcomes a great opportunity to experience Mussoorie’s grand way of showing appreciation and excitement during these festivals.

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19/08/2012

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19/08/2012

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Mall Road
Dehra Dun
248179

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