06/05/2024
सिनेमा आज सिर्फ़ फूहड़ता परोशने का माध्यम भर बचा है और लड़कियाँ ( हीरोइन) सिर्फ showpiece भर रह गई हैं, मेरी हीरोइन फूली असली हीरोइन है, जो उड़ने की बात करती है, जो हर बेटी और माँ को बताने की कोशिश करती है कि जादू हो सकता है, और कहती है "Trust The Process" और कहती है पढ़ने से ही जीवन बदलेगा |
साथियों, मैं वो फिल्म मेकर नहीं हूँ जो अपनी हीरोइन को नुमाइश की तरह पेश करना चाहता हूँ, मैं उसे सच में हीरोइन साबित करना चाहता हूँ अपने सिनेमा में, जो किसी पहाड़ के कोने में दबी हुई है, कुचली हुई है , जो सच में उड़ना चाहती है, पंख फैलाना चाहती है, मेरी फूली अब सिर्फ़ हीरोइन नहीं है वो अब हीरो है, जो हर बेटी से, हर बहन से, हर माँ से कहना चाहती है कि " जो तुम्हारे जीतने की surity नहीं दे सकता, वो तुम्हारे हारने की surity कैसे दे सकता है, और तुमने कैसे मान लिया कि तुम सिर्फ़ हार ही सकती हो, फूली का जादूगर कहता है, फूली को और उन तमाम लड़कियों को जो हिंदुस्तान के किसी कोने में सपना देख रही है कि वो जीत सकतीं हैं | मेरी फ़िल्म का जादूगर कहना चाहता है उन हिंदुस्तान की तमाम बेटियों से कि - तुम अगर हारती हो, अपनी किताबों को छोड़ने का मन बनाती हो, और मान लेती हो की तुम हार गयी हो, तो ये हार सिर्फ़ तुम्हारी नहीं होगी, उन तमाम लड़कियों की होगी जो सोचती थीं की तुम जीत सकती हो |
यही मेरी फ़िल्म का जादूगर बताना चाहता है और यही फूली ने समझा और यही मेरा सिनेमा कहना चाहता है|
और कहना चाहता है कि महिला सिर्फ़ सिनेमा में अंग प्रदर्शन के लिए नहीं है, अपनी बात, अपने सपने और वो कैसे पूरे हो सकते हैं ये बताने के लिए भी है
मैंने देखा है मेरी माँ को, जो अनपढ़ ज़रूर थी पर गँवार नहीं थी, जिसने मुझे एक संवेदनशील फिल्म मेकर बनाया जिसकी वजह से मैं फूली बना पाया | मैंने देखा है मेरे हिंदुस्तान की महिलाओं को, गौरा बनते हुए, बछेंद्री पाल बनते हुए, किरन बेदी बनते हुए, मेरी कोम बनते हुए, कल्पना चांवला बनते हुए, पी. टी. उषा बनते हुए, और द्रोपदी मुर्मुर बनते हुए और अब आप सब देखोगे मेरी फूली को फूली बनते हुए, जो हमारी नाक का सिर्फ़ आभूषण नहीं है, हमारी शान है| और यही 7 june को फूली और उसका जादूगर कहने आ रहे हैं |