IPTA Uttrakhand Uttarpradesh

IPTA  Uttrakhand Uttarpradesh भागो मत दुनिया को बदलो ।

23/02/2026

उत्तराखंड में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद वनकर्मियों पर हमला, कांग्रेस का CM पर तंज "हिन्दी ख़बर"* पर एंकर श्रेया दीक....

15/02/2026

भारत रंग महोत्सव, देहरादून 2026

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11/02/2026

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स्कूली छात्रों के लिए "ट्री ऑफ लाइफ" पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन
इन्डियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) ने कक्षा 7-9 में पढ़ रहे विद्यालयी छात्रों के लिए "ट्री ऑफ लाइफ" नाम से एक अखिल भारतीय पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। देहरादून के रेंजर्स ग्राउण्ड भवन में यह प्रतियोगिता इंटैक, नई दिल्ली के हेरिटेज एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन सर्विस (एचईसीएस) डिवीजन के तत्वावधान में दून पुस्तकालय शोध केन् केन्द्र के सहयोग से आयोजित की गई थी। सुश्री अंजलि भरतरी के मुताबिक इसमें से 100 विजेता और 10 राष्ट्रीय विजेता होंगे। 10 राष्ट्रीय विजेताओं को भारत में एक शैक्षिक यात्रा पर जाने का अवसर दिया जायेगा। क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विजेताओं को पुरस्कार और ट्रॉफी दी जाएगी। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
आज की इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों को पारिस्थितिकी के बारे में संवेदनशील बनाना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। आज के इस पोस्टर प्रतियोगिता में आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमेंटाउन, आर्मी पब्लिक स्कूल बीरपुर, ब्राइटलैंड्स स्कूल, ब्रुकलिन स्कूल, स्कॉलर्स होम, हिम ज्योति अकेडमी, ओएसिस स्कूल और वेल्हम गर्ल्स स्कूल ने प्रतिभाग किया, यह जानकारी इंटैक देहरादून की संयोजक भारती जैन ने दी।
प्रतियोगिता के दौरान डॉ. बिस्वास द्वारा एक ट्री वॉक और वार्ता भी आयोजित की गई। इको-संस्कृति एक सामाजिक उद्यम है जो पारिस्थितिकी और संस्कृति के चौराहे पर काम कर रहा है, जिसकी गतिविधियाँ वन्य और जैव विविधता संरक्षण पर केंद्रित हैं। इंटैक संस्था ने छात्रों को पारिस्थितिकी के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए नेचर वाक के लिए उनके साथ भागीदारी की है, यह जानकारी इंटैक, उत्तराखंड की सह-संयोजक अंजलि भरतरी ने दी। डॉ. बिस्वास एक प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक हैं जिनके पास अनुसंधान और शिक्षा क्षेत्र में 50 वर्षों से अधिक सालों का विशद अनुभव है।
यह आयोजन दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के बाल प्रखंड का भरपूर .सहयोग रहा. इसमें बाल प्रखण्ड समन्वयक मेघा भी मौजूद रहीं। पोस्ट प्रतियोगिता में प्रतिभागी छात्रों ने रेंजर्स कॉलेज के परिसर में पेड़ों को चित्रित करने का आनंद लिया, जहां से देश में वनस्पति विज्ञान की शुरुआत हुई थी।
इस दौरान दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के पुस्तकालयाध्यक्ष, डॉ.डी. के. पाण्डे, कार्यक्रम अधिकारी, चन्द्रशेखर तिवारी, संग्रहालय प्रभारी डॉ. लालता प्रसाद, आदि सहित प्रतिभागी स्कूलों की शिक्षिकाओं साहित कई लोग उपस्थित रहे।

07/02/2026
01/02/2026

देहरादून । परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में सामाजिक संस्था जन जागरण अभियान समिति द्वारा देश के सुप्रसिद्ध आलोचक/लेखक/साहित्यकार/रचनाकार डाॅo गया सिंह के 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर "साहित्यिक संगोष्ठी एवं नवरत्न साहित्य सम्मान" समारोह का आयोजन किया गया l संस्था देहरादून के 9 जाने माने साहित्यकार, लेखक और कवियों को 'नवरत्न सम्मान' से सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता देश के जाने-माने आलोचक/लेखक/साहित्यकार/रचनाकार वाराणसी निवासी डाॅo गया सिंह मौजूद रहें । विशिष्ट अतिथि फिल्म निर्माता/लेखक एम आर सकलानी जी, उत्तरांचल प्रेस कल्ब के अध्यक्ष अजय राणा जी और कार्यक्रम अध्यक्षता कवि और लेखक राजेश डोभाल (राज) संस्था के अध्यक्ष स्वप्निल सिन्हा और सचिव विवेक श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूवात की।

इस अवसर पर मुक्त अतिथि और वक्ता साहित्यकार/रचनाकार डाॅo गया सिंह जी ने संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मैं हजारी प्रसाद द्विवेदी का शिष्य रहा हूं, पंडित जी ने मेरी पुस्तक संरचना की थी उन्होंने बताया सहित तमाम विद्धान साहित्यकारों ने मेरी पुस्तक की समीक्षा लिखी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड साहित्यकारों की भी भूमि है इसलिए यहाँ मैं साहित्यकारों के साथ जन्मदिन मना कर बेहद आनंदित हूं।

वही फिल्म निर्माता/लेखक एम आर सकलानी ने कहा कि मैं जन जागरण अभियान समिति के इस साहित्यिक संगोष्ठी हेतु संस्था बधाई के पात्र है, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे साहित्यिक गोष्ठी और सम्मान समारोह के आयोजनो से हिंदी साहित्य से जुड़े लोगों को हौसला बढ़ता है।

साथ ही बतौर अतिथि पहुंचे उत्तरांचल प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा कहा कि ऐसे कार्यक्रम साहित्य जगत से जुड़े लोगों के हौसलाअफजाई में सहायक होते है ,समिति को इस आयोजन हेतु साधुवाद देता हूँ और नवरत्न साहित्य सम्मान प्रात करने वाले लोगों को बधाई देता हूं l

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ राजेश डोभाल ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता कर बहुत खुश हूं क्युकी मैं स्वयं साहित्य जगत से जुड़ा हूं मुझे आज सम्मानित होने वाली विभूतियों एवं आज के साहित्यकार अतिथियों को सम्मानित करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ ।

संस्था के सचिव विवेक श्रीवास्तव ने मंच संचालन किया ।इस दौरान धनंजय कुकरेती, डॉ गार्गी मिश्रा, सत्येंद्र शर्मा, लक्ष्मी प्रसाद बडोनी, शिवचरण शर्मा, रविन्द्र सेठ, अरविंद गंगवाल, सुभाषचंद्र वर्मा, पीयूष भटनागर, अंजलि बिड़ला, कनीका, श्रुति कुकरेती सहित अन्य लोगों कार्यक्रम में शामिल रहे l

8 फरवरी की महापंचायत के लिए तैयारियां तेज,अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की बैठक में 40 से अधिक संगठनों की भागीद...
31/01/2026

8 फरवरी की महापंचायत के लिए तैयारियां तेज,अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की बैठक में 40 से अधिक संगठनों की भागीदारी
गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने भी महापंचायत के समर्थन में अपील जारी की

8 फरवरी की महापंचायत के लिए तैयारियां तेज,अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की बैठक में 40 से अधिक संगठनों की भ.....

23/01/2026

*बर्लिनाले टैलेंट्स 2026 में 200 में से सात भारतीय शामिल*

निर्देशक, संपादक, साउंड डिज़ाइनर, निर्माता और एक क्यूरेटर
पिछले साल, स्वतंत्र फिल्म संपादक से निर्देशक बनीं तनुश्री दास को तब खास संतोष महसूस हुआ जब बर्लिनाले में उनकी निर्देशन में बनी पहली फिल्म बक्शो बॉन्दी (शैडोबॉक्स) देखने के बाद लोग भावुक हो उठे। किसी को अपना पूर्वी बर्लिन का बचपन याद आ गया, तो किसी को अपनी माँ का अदृश्य श्रम। एक सैनिक ने बताया कि अपने परिवार से अपने किए गए कामों के बारे में बात न कर पाने की मनोवैज्ञानिक घुटन कैसी होती है। बक्शो बॉन्दी बैरकपुर की एक मध्यवर्गीय महिला की खामोश दृढ़ता की कहानी है, जो घर चलाती है और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रहे अपने पूर्व सैनिक पति के साथ जीवन संभालती है।
तनुश्री दास, स्वतंत्र संपादक और निर्देशक, बर्लिनाले टैलेंट 2026
दास ने इस संवेदनशील बंगाली फिल्म का सह-निर्देशन अपने सिनेमैटोग्राफर-पार्टनर सौम्यनंदन साहि (ऑल दैट ब्रीद्स, ईब अलाय ऊ, नासिर, ट्रायल बाय फायर, ब्लैक वारंट) के साथ किया है। साहि 2005 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में बर्लिनाले टैलेंट कैंपस का हिस्सा बने थे, जिससे वे इस कार्यक्रम के लिए चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बने। दास भी पहले एक संपादक के रूप में चयनित हुई थीं, लेकिन यूरोप की यात्रा का खर्च वहन नहीं कर सकीं। इस साल वे 3,500 वैश्विक आवेदनों में से चुने गए 200 प्रतिभागियों में शामिल छह भारतीयों में से एक हैं। बर्लिनाले टैलेंट्स 13 से 18 फरवरी तक नए स्थल रैडियलसिस्टम में आयोजित होगा।
“जब आपकी फिल्म दुनिया के शीर्ष पाँच फिल्म समारोहों में से किसी एक में प्रदर्शित होती है, तो लोग उसे अलग नज़र से देखते हैं,” दास कहती हैं। उनके लिए यह भारत के एनएफडीसी फिल्म बाज़ार को छोड़कर “अपने तरह का पहला शिखर सम्मेलन” होगा, जहाँ वे ईब अलाय ऊ और ऐसे ही जैसी वर्क-इन-प्रोग्रेस (WIP) परियोजनाओं के साथ एक संपादक के रूप में शामिल रही हैं।
फिल्म समुदाय का निर्माण
बर्लिनाले टैलेंट्स के दुनिया भर में 10,000 से अधिक पूर्व छात्र (एलुमनाई) हैं और यह विश्व के सबसे बड़े तथा सबसे जुड़े हुए फिल्म नेटवर्क्स में से एक है। इस वर्ष टैलेंट्स लैब में 20 एलुमनाई प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे—फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन और प्रयोगधर्मी रूपों में—जो रचनात्मक दृष्टियों को परिष्कृत करने और निर्माण को गति देने के लिए एक सहयोगी मंच प्रदान करेंगे। टैलेंट प्रोजेक्ट मार्केट भी एलुमनाई को प्रस्तुत करेगा, जहाँ 10 परियोजनाएँ बर्लिनाले को-प्रोडक्शन मार्केट में संभावित साझेदार तलाशेंगी। यह बाज़ार न्यूनतम 10 लाख यूरो बजट वाली परियोजनाओं के लिए है।
“जब बर्लिनाले मुझे दोबारा बुलाता है, तो वह मुझे अपने समुदाय का हिस्सा बना रहा है। अगली बार मैं एलुमनाई फोरम्स में पिच कर सकूँगी,” दास कहती हैं। “यह एक जीवंत स्थान है, जहाँ कई स्तरों पर सहभागिता हो रही है।”
निहारिका नेगी, स्वतंत्र फिल्मकार, बर्लिनाले टैलेंट 2021, इस वर्ष यूरोपियन फिल्म मार्केट (EFM) और बर्लिन को-प्रोडक्शन मार्केट में अपनी फिल्म पिच कर रही हैं।
संगीतकार से निर्माता बने नरेन चंद्रवाकर की मूनवीव फ़िल्म्स (बक्शो बॉन्दी; 2025 सनडांस वर्ल्ड सिनेमा ग्रैंड जूरी प्राइज़—ड्रामैटिक विजेता सबर बोंडा [कैक्टस पियर्स]) निहारिका नेगी की फेरल का सह-निर्माण कर रही है।
फेरल इस साल के EFM और बर्लिन को-प्रोडक्शन मार्केट में शामिल है। बहु-विषयक कलाकार, थिएटर अभिनेता और प्रयोगधर्मी फिल्मकार नेगी ने पुषन कृपलानी की फिल्म द थ्रेशहोल्ड (2015) लिखी थी, जिसमें नीना गुप्ता और रजित कपूर ने अभिनय किया था। फेरल 1950 के दशक के भारत में स्थित एक जॉनर फिल्म है—दो आंशिक-आदिवासी दासी महिलाओं की कहानी—जो औपनिवेशिक आघात पर आधारित, ब्लैक ह्यूमर से सनी एक उन्नत हॉरर है। नेगी बाज़ार में संभावित बिक्री और वितरण साझेदार ढूँढने की उम्मीद कर रही हैं। वे 2021 में बर्लिनाले टैलेंट रह चुकी हैं। “हमारी आपसी मित्रता और सक्रिय नेटवर्क खास हैं,” वे कहती हैं।
सुबर्णा दास, स्वतंत्र फिल्मकार, बर्लिनाले टैलेंट 2026
एक और वापसी सुबर्णा दास की है। 31 वर्षीय दास इस साल की एकमात्र भारतीय फिल्म टैलेंट हैं जो एफटीआईआई, पुणे से नहीं हैं। कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एसआरएफटीआई) की स्नातक दास एक एनीमेशन फिल्मकार हैं, जिनका काम शरीर, पहचान और एकांत जैसे विषयों को, अक्सर व्यंग्य और हास्य के साथ, टटोलता है। उनकी ग्रेजुएशन फिल्म द गर्ल हू लिव्ड इन द लू का प्रीमियर बर्लिनाले 2024 में हुआ था। “मैं अपनी पहली मिक्स्ड-मीडिया फीचर इन हीट, ऑन लूप के साथ बर्लिनाले टैलेंट्स में लौटकर उत्साहित हूँ। स्क्रिप्ट मेंटरशिप, परियोजना को आगे बढ़ाने और सह-प्रतिभागियों से जुड़ने की प्रतीक्षा है,” वे कहती हैं।
अनादी अथालय, स्वतंत्र संपादक और निर्माता, बर्लिनाले टैलेंट 2026
मुंबई के 38 वर्षीय अनादी अथालय, जो 11 वर्षों से फिल्म संपादक और निर्माता हैं (बॉर्डरलैंड्स, द अनरिज़र्व्ड, सबर बोंडा, रलांग रोड, होली कर्स, दारावथा), मास्टरक्लास, चर्चाओं और खासकर संपादन-केंद्रित सत्रों को लेकर उत्साहित हैं। “एक तेजी से अस्थिर होती दुनिया में मेरे साथी जिन चुनौतियों से जूझ रहे हैं, उन्हें समझना चाहता हूँ,” वे कहते हैं।
दिल्ली के 37 वर्षीय किसलय, जो इन दिनों अपनी अगली पटकथा ए डेथ फोरटोल्ड लिख रहे हैं, बर्लिन में “स्वतंत्र सिनेमा के सामने मौजूद रचनात्मक और संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा” की उम्मीद करते हैं। “आज की दुनिया, जो दृश्यों, मास मीडिया और हिंसा से भरी है, उसमें सिनेमा एक आलोचनात्मक माध्यम के रूप में कैसे खड़ा हो सकता है?” वे पूछते हैं। “सोशल मीडिया के आगमन के साथ वास्तविकता ही कथाओं में बदल गई है, जहाँ शक्तिशाली संस्थाएँ अपनी-अपनी वास्तविकताओं को फैलाने की होड़ में हैं।”
दिल्ली विश्वविद्यालय और एफटीआईआई के स्नातक किसलय, 2015 में एफटीआईआई अध्यक्ष के रूप में भाजपा सदस्य और टीवी अभिनेता गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के विरोध में दर्ज चार्जशीट में, प्रतीक वत्स (ईब अलाय ऊ) और कान ग्रां प्री विजेता पायल कपाड़िया (ऑल वी इमैजिन ऐज़ लाइट) के साथ शामिल थे।
“एक समाज के रूप में हमें चिंता करनी चाहिए कि संस्कृति के साथ आलोचनात्मक संवाद का तत्व गायब होता जा रहा है,” किसलय कहते हैं। वे यह भी जोड़ते हैं कि आज कई युवा फिल्मकार बहुत जल्दी अपनी पहली फिल्म बना रहे हैं, जबकि “स्वतंत्र सिनेमा के लिए न तो वितरण प्रणाली है और न ही समर्पित दर्शक वर्ग। यह मुर्गी-अंडा जैसी समस्या है—गैर-व्यावसायिक कला के लिए ढाँचे की कमी दर्शकों के निर्माण में बाधा बनती है।”
विषयगत बदलाव
इस वर्ष टैलेंट्स की थीम है—“क्रिएटिंग (एंड) कन्फ्यूज़न — सिनेमा, कैओस एंड द पावर ऑफ डिस्कम्फ़र्ट”। बैरिसेंटर फिल्म्स के स्वतंत्र निर्माता थानिकाचलम एस.ए. (इन रिट्रीट—कान; थिएटर—आईएफएफआर रॉटरडैम) कहते हैं, “यह सूक्ष्म स्वीकारोक्ति है कि सिनेमा को अत्यधिक योजनाबद्ध नहीं किया जा सकता। पथ-प्रदर्शक सिनेमा कभी डिज़ाइन करके नहीं बनाया गया; अराजकता रचना की अनिवार्य शर्त है। स्टोरीबोर्डिंग और प्री-विज़ का हवाला देने वाला स्टीव जॉब्स का वीडियो केवल एनीमेशन और बड़े बजट की फिल्मों पर लागू होता है।”
थानिकाचलम एस.ए., स्वतंत्र निर्माता, बर्लिनाले टैलेंट 2026
दास कहती हैं, “मेरी मौजूदा परियोजना एक ऐसे चरित्र की यात्रा का अनुसरण करती है जो अटका हुआ, भ्रमित और खोया हुआ है—जो जल्द समाधान की ओर भागने के बजाय अपरिचितता और असहजता के साथ बैठना सीखता है।” अथालय का काम भी अक्सर भ्रम से संवाद करता है—कभी जानबूझकर उसी में ठहरता है। ये भ्रम व्यक्तिगत पहचान, लैंगिकता और नैतिकता से लेकर वर्तमान क्षण को आकार देने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं तक फैले हैं। “कठिन सवाल पूछना और असहजता के साथ बैठना ही आगे बढ़ने का रास्ता है—और सिनेमा इसके लिए एक सशक्त माध्यम है,” वे कहते हैं।
हार न मानना
अथालय के लिए यह सातवाँ आवेदन था, और देवराज भौमिक के लिए पाँचवाँ। थानिकाचलम को यहाँ तक पहुँचने में 21 साल लगे। “2005 में दिल्ली के ओसियन सिनेफैन फिल्म फेस्टिवल के साथ साझेदारी में आयोजित बर्लिनाले टैलेंट्स के इंडिया संस्करण में मेरा चयन हुआ था। तब सोचा था कि अगले साल बर्लिन के मुख्य संस्करण में पहुँच जाऊँगा,” वे कहते हैं। उसी बैच में राही अनिल बर्वे भी थे, जो अब बॉलीवुड लेखक हैं (तुम्बाड)। “इन 21 वर्षों में बर्लिनाले टैलेंट्स का आकार बहुत बढ़ गया है,” थानिकाचलम कहते हैं। “मैंने जिन फिल्मों का निर्माण किया है, उनका आकार टैलेंट प्रोजेक्ट मार्केट के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।”
देवराज भौमिक, साउंड डिज़ाइनर, बर्लिनाले टैलेंट 2026
कानपुर में पले-बढ़े भौमिक, जो कभी बड़े बॉलीवुड संगीतकार बनना चाहते थे—और आश्रम व भेड़िया पर काम कर चुके हैं—अब आयरलैंड में रहते हैं और वहाँ की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना रहे हैं। “एफटीआईआई ने सिनेमा में ध्वनि के प्रति मेरी जिज्ञासा की नींव रखी,” भौमिक कहते हैं। उन्होंने स्वतंत्र फिल्मकारों के साथ भी काम किया है, जिनमें आर्या रोथे शामिल हैं—जो क्रिस्टीना मिखाइलोवा की रिवर ड्रीम्स (फोरम स्पेशल सेक्शन) की भारतीय संपादक थीं; यह बर्लिनाले के इतिहास में प्रदर्शित होने वाली पहली कज़ाख डॉक्यूमेंट्री फिल्म थी।
भौमिक को उम्मीद है कि यह कार्यक्रम उन्हें दृश्यता और अर्थपूर्ण परियोजनाओं पर सहयोग का अवसर देगा। “सबसे महत्वपूर्ण यह कि मैं साउंड डिज़ाइनर के रूप में अपनी आवाज़ को मज़बूत करना चाहता हूँ। ध्वनि में अपार, अनछुई शक्ति है। यदि स्क्रिप्टिंग के चरण से ही इसे शामिल किया जाए, तो यह कहानियों को सुंदरतम ढंग से गढ़ सकती है। आइए, खुद को ‘साउंड डायरेक्टर’ कहना शुरू करें,” वे कहते हैं।
मुख्यधारा भारतीय सिनेमा की मौजूदा “तेज़ आवाज़” पर भौमिक कहते हैं, “यह तेज़ी हमारे परिवेश का प्रतिबिंब है—जहाँ लोग अब कट्टर और असहिष्णु विचार खुलकर व्यक्त करते हैं। लेकिन हर तेज़ चीज़ प्रभावशाली नहीं होती।” अथालय जोड़ते हैं, “भारतीय फिल्म उद्योग समग्र रूप से कठिन दौर से गुजर रहा है, और स्वतंत्र सिनेमा इसका असर सबसे तीखे रूप में महसूस करता है।”
इस वर्ष की सूची में एक युवा प्रोग्रामर-क्यूरेटर वेदांत भी शामिल हैं।
— तनुश्री घोष
[email protected]

20/01/2026

आवाज़ सुनो पहाड़ों की फिल्म फेस्टिवल ने अपने प्रथम संस्करण के लिए आधिकारिक चयन की घोषणा , होगा भव्य आयोजन

देहरादून । आवाज़ सुनो पहाड़ों की फिल्म फेस्टिवल का प्रथम संस्करण 22 जनवरी से 28 जनवरी 2026 तक देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित होने जा रहा है। इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2026 को उत्तराखंड की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमान पुष्कर सिंह धामी जी करेंगे। सात दिवसीय यह आयोजन अजबपुर स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में होगा। यह आयोजन हिमालयी क्षेत्र के सांस्कृतिक और सिनेमाई परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। फेस्टिवल का नेतृत्व फेस्टिवल डायरेक्टर नरेंद्र रौथाण कर रहे हैं, जो उत्तराखंड के एक प्रतिष्ठित निर्माता, निर्देशक, लेखक, लोकगायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता हैं। संगीत, फिल्म, टेलीविजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा और लोक-संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शारदा स्वर संगम के संस्थापक के रूप में उन्होंने कई अग्रणी फिल्म, टेलीविजन और सांस्कृतिक पहलों का नेतृत्व किया है, जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने वाला मंच आवाज़ सुनो पहाड़ों की भी शामिल है। स्वतंत्र रचनात्मक आवाज़ों और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता फेस्टिवल की मूल दृष्टि को आकार देती है।

फेस्टिवल को वैश्विक स्तर पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसमें दुनिया भर के 100 से अधिक देशों से 1,238 शॉर्ट और फीचर फिल्मों की प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। प्रस्तुत फिल्मों की विविधता और गुणवत्ता फेस्टिवल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुँच और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से सशक्त सिनेमाई आवाज़ों को मंच देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

फेस्टिवल की चयन समिति द्वारा की गई कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद 98 फिल्मों को आधिकारिक चयन के लिए अंतिम रूप दिया गया है। ये फिल्में विभिन्न श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगी, जहाँ प्रत्येक श्रेणी में 10 नामांकन होंगे, जो कहानी, शिल्प और सिनेमाई दृष्टि में उत्कृष्टता को रेखांकित करते हैं। चयनित फिल्में विषयवस्तु, प्रारूप और कलात्मक दृष्टिकोण की व्यापक विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं।

आधिकारिक चयन श्रेणियाँ:

एनीमेशन शॉर्ट फिल्म
डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म
एक्सपेरिमेंटल शॉर्ट फिल्म
लाइव एक्शन शॉर्ट फिल्म
फीचर फिल्म
डॉक्यूमेंट्री फीचर फिल्म

चयन समिति में अनुभवी फिल्मकार और सांस्कृतिक पेशेवर शामिल हैं, जिनमें श्रीश दोभाल (जिनकी चर्चित कृतियाँ भेड़िया धसान (2024), गडेरा (2024) और रैबार (2025) हैं), संतोष सिंह और दीपशिखा शर्मा शामिल हैं। समिति ने मिलकर एक संतुलित, समावेशी और गुणवत्ता-आधारित चयन प्रक्रिया सुनिश्चित की।

आवाज़ सुनो पहाड़ों की फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य उन फिल्मकारों को एक सार्थक मंच प्रदान करना है, जिनकी कहानियाँ सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और मानवीय सरोकारों से जुड़ी हों, साथ ही कलात्मक प्रयोग और सिनेमाई उत्कृष्टता का उत्सव मनाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।

अपने प्रथम संस्करण के रूप में यह फेस्टिवल देहरादून को स्वतंत्र और क्षेत्रीय सिनेमा के एक जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है, जिससे भारत और विदेशों के फिल्मकारों, दर्शकों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा मिलेगा। यह फेस्टिवल फिल्म, मीडिया और एनीमेशन के छात्रों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, क्योंकि देहरादून को एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। स्क्रीनिंग, चर्चाओं और उद्योग पेशेवरों से संवाद के माध्यम से छात्रों को समकालीन सिनेमा की व्यावहारिक समझ और सीखने के महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होंगे।
पाँच दिनों के दौरान फेस्टिवल में फिल्म स्क्रीनिंग, पैनल चर्चाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो उत्तराखंड की सुरम्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पृष्ठभूमि में फिल्मकारों, उद्योग विशेषज्ञों, छात्रों और सिनेप्रेमियों को एक साथ लाएँगे।
फेस्टिवल के कार्यक्रम, स्क्रीनिंग और अन्य आयोजनों से संबंधित विस्तृत जानकारी शीघ्र ही घोषित की जाएगी।
प्रेस वार्ता में उपस्थित सदस्य नरेंद्र राठौड़ बलवीर सिंह पवार हेमंत कुमार थपलियाल प्रशांत जी संतोष रावत अरुण फारसी पूजा चौहान आरती बडोला कौशल्या देवी प्रियांशु प्रोग्राम मनोज दसवानी अमन नौटियाल आनंद सिंह रावत

*अरविन्द पांडे को बागी तेवर भारी पड़े*खुद जमीन कब्जाने के आरोपों से घिरे*"हिन्दी ख़बर" पर सुनील सिंह पौरुष के साथ उत्तरा...
19/01/2026

*अरविन्द पांडे को बागी तेवर भारी पड़े
*खुद जमीन कब्जाने के आरोपों से घिरे
*"हिन्दी ख़बर" पर सुनील सिंह पौरुष के साथ उत्तराखंड का नंबर वन डिबेट शो बिग बुलेटिन
*डिबेट पैनलिस्ट
1. मथुरा दत्त जोशी, भाजपा
2. आशीष सैनी, कांग्रेस
3. प्रबीन रमोला, यूकेडी
4. डॉ. वीके डोभाल, वरिष्ठ पत्रकार
https://youtu.be/FG7eSVaF5LM
https://www.facebook.com/share/v/1AqFrB5psZ/
https://x.com/HindiKhabar/status/2012865214560248289?s=20

Debate Live: अरविन्द पांडे को बागी तेवर भारी पड़े, खुद जमीन कब्जाने के आरोपों से घिरे | Hindi KhabarArvind Pandey, Rebel, Land Encroachment, Allegations, Pol...

16/01/2026

देहरादून । अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच'' का 08 फ़रवरी 2026 को देहरादून में महापंचायत का ऐलान ।

आज शहीद समारक देहरादून में, *अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच* की बैठक में अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP के खुलासे और इसमे ViP को बचाने में संलिप्त लोगों को भी सजा दिलाने की मांग न्को लेकर 08 फ़रवरी 2026 को देहरादून में महापंचायत का ऐलान किया गया जिसमे देश-प्रदेश से लोग जुटेंगे l

मंच की कमला पंत ने कहा कि जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक संघर्ष जारी रहेगा l उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सुप्रीम कोर्ट के सिटींग जज की निगरानी में VIP को मद्देनज़र रखते हुए सीबीआई जाँच की माँग करी थी तब मुख्यमंत्री ने केवल अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जाँच की संतुस्ती करी है, जो दिखाता है कि अभी भी VIP को बचाने का काम किया जा रहा है l

संघर्ष मंच के मोहित डिमरी ने कहा जब अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर अंकिता भंडारी हत्याकांड में सिटींग जज की निगरानी में सीबीआई की जाँच की माँग करी थी तो उसे ही FIR मानते हुए सीबीआई जाँच का आधार बनाना था लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने अचानक से प्रकट हुए अनिल प्रकाश जोशी की FIR को सीबीआई जाँच का आधार बनाया l इससे साफ़ होता कि सरकार की मंशा सही नहीं है और वो अभी VIP को बचाने के लिए षड़यंत्र रच रही है , अन्यथा ऐसा करने की जरूरत ही क्या थी I

मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा ये बड़े ताज्जुब की बात है कि जिस उर्मिला सनावर को पुलिस, ख़ुफ़िया विभाग, मुख्यमंत्री तक ढूढ़ नहीं पा रहे थे वो कई दिनों बाद अचानक से दर्शन भारती के साथ दिखती है l पुलिस को दर्शन भारती के फोन की भी जाँच करनी चाहिए कि वो कितने दिनों से उर्मिला सनावर के संपर्क में था, उसने कैसे उर्मिला सनावर को ढूँढा और उर्मिला सनावर को ढूंढने में उसकी मदद किसने करी l
सभा में विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बातों और शंकाओं को रखते हुए मंच की ओर से अंकिता भंडारी हत्याकांड में निम्न बातों की माँग रखी :
1 . अंकिता भंडारी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में VIP को मद्दे नज़र रखते हुए ही सीबीआई जाँच हो l

2. अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को गए ज्ञापन को ही FIR मानते हुए सीबीआई जाँच का आधार बनाया जाये l

3. अंकिता भंडारी हत्याकांड में उर्मिला सनावर के गायब होने पर उन्हें ढूंढ का लाने का दावा करने वाले दर्शन भारती की भूमिका की भी जाँच की जाय l

4.अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच के लिए अनिल प्रकाश जोशी की FIR रद्द हो और उनकी भूमिका की भी जाँच हो I

5.अंकिता भंडारी हत्या कांड में वनंतरा रिसोर्ट को ढहाने का आदेश जिसने भी दिया हो इसकी जाँच हो और उसको सबूत मिटाने का अपराधी मानते हुए , उसके विरुद्ध भी कानूनी कार्यवाही करके उसे भी दण्डित किया जाए I

बैठक में वक्ता के रूप मे, पी सी थपलियाल, सुजाता कौल, समदर्शि badthwal ,पद्मा गुप्ता, संजीव ghildiyal , कमलेश खंतवाल ,विमला कोली, आशुतोष कोठारी, सोनिया आनंद, राजू सिंह , स्मृति नेगी, मनीष, मंजू बलोदी, तुषार , कृष्णा सकलानी, हेमलता नेगी, आदि ने भी अपने विचार रखे l

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