19/04/2025
"एक शाम दोगे क्या"
एक शाम दोगे क्या,
साथ गुजारने के लिए,
मुझे तुमसे रूबरू होना है।
तुम्हें अपने पलकों में
ताउम्र कैद करना है,
साथ चलोगे क्या,
मेरा हाथ थाम कर,
मुझे तुमसे गुफ्तगू करना है l
ये जो भावनाओं से भरा हुआ
मेरा हृदय तुम्हे पुकार रहा है,
क्या तुम उनको विराम दोगे।
मेरी हर एक सवाल का,
क्या तुम जवाब दोगे,
बिखर चुकी हूं तुम बिन,
क्या तुम मुझे आके थाम लोगे।