Abhishek Sain

Abhishek Sain जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है।
इसके वास्ते ये तन है, मन है और प्राण है।।

तुम समय की रेत पर, छोड़ते चलो निशाँ,देखती तुम्हें ज़मीं, देखता है आसमाँ।।लिखते चलो नौजवान, नित नई कहानियाँ,तुम मिटा दो ठ...
17/12/2025

तुम समय की रेत पर, छोड़ते चलो निशाँ,
देखती तुम्हें ज़मीं, देखता है आसमाँ।।

लिखते चलो नौजवान, नित नई कहानियाँ,
तुम मिटा दो ठोकरों से, जुल्म की निशानियाँ।
कल की तुम मशाल हो, सबसे बेमिसाल हो,
तिनके-तिनके को बना दो, ज़िंदगी का आशियाँ।।

ये निशान एक दिन, जहान का अमन बने,
ये निशान एक दिन, प्रीत का चमन बने,
हँसते हुए हमसफ़र, गाते चले हो निडर,
आगे-आगे बढ़ता चले, ज़िंदगी का कारवाँ।।

तुम जिधर चलो उधर, ही रास्ता बने नया,
इक उठाए सबका बोझ, वक्त वह चल गया,
सब कमाएँ साथ-साथ, काम करें सबके हाथ,
जो भी आगे बढ़ रहा है, देखता उसे जहाँ।।

तुम समय की रेत पर, छोड़ते चलो निशाँ,
देखती तुम्हें ज़मीं, देखता है आसमाँ।।

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