25/05/2022
ख्वाहिश ,,,,( नज़्म )
अगर ख्वाहिश हो ज़िंदा रहने की,मरने के बाद भी,
तो फिर मज़हब को भुला कर ,खुद को इंसान कर के देख //
तेरे किरदार का लोहा ,मान लेगा ये ज़माना ,
वतन की खातिर ,अपनेआप को क़ुर्बान कर के देख //
निकल जायेगा अपनेपन का वहम ,एक ही पल में ,
अपने दिवालिये का बस झूठा , ऐलान कर के देख //
सिर्फ महबूब ही होता है खुदा, इश्क़ में "बक्शी",
ज़मी पे खुद को रख और,उसको आसमान कर के देख //
अगर ये देखना है लुत्फ़ ,कितना ज़िन्दगी में है ,
कभी किसी की खातिर ,खुद को परेशान कर के देख //
ये वो सौदा है जिसमें घाटा ,रत्ती भर भी नहीं है ,
दिल दे कर तू अपनी हसरतें ,वीरान कर के देख //
इबादत का असर दिखने लगेगा ,खुद-बा-खुद "बक्शी",
छोड़ कर सांसें लेना ,जिस्म को सुनसान कर के देख //
अगर तुझको यकीन है कि ,सब का मालिक एक है ,
तो फिर खुद को ,ना सिख ,ईसाई ,हिन्दू ना मुसलमान कर के देख //
छिपी हुई है कुछ-न-कुछ अच्छाई ,दुनियाँ की हर एक शै में ,
तू सब को,ना तो गीता और,ना ही क़ुरान कर के देख //
अगर वो है तो मिल जायेगा,दिखावा ना कर बन्दे ,
चालाकी से ना ,पूजा-पाठ,ना ही अज़ान कर के देख //
छोड़ दे उसको दिनों ,और त्योहारों में बाँटनां ,
भुला के नफरत कायनात ,आलीशान कर के देख //
लूटनी हैं अगर तुझको ,उसकी रहमत की दौलतें ,
तो बेटी पैदा होने दे ,और कन्यादान कर के देख //
तारीख ,,,,30-10-2016,,,,वक़्त,,,,18:46 जगह ,,,,चंडीगढ़ (दीवाली की शाम)
sanjeev Bakshi songsmith
poet, lyricist , scriptwriter ,
motivational speaker ,
self confidence booster
and social worker