Jai Latu Devta

Jai Latu Devta jai latu devta

भगवान श्री कृष्ण का जन्म भले ही जेल में हुआ लेकिन जन्म लेते ही वह जेल से आजाद हो गए। लेकिन उत्तराखंड के एक देवता ऐसे हैं जो युगों से कैदखाने में बंद हैं। कैदखाना ही इनका मंदिर है।

साल में सिर्फ एक बार वैशाख पूर्णिमा को कुछ घंटों के लिए मंदिर का द्वार खुलता है। यह एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन पुजारी भी नहीं कर पाते हैं। क्योंकि मंदिर का द्वार खोलते समय पुजारी के आंखों पर पट्टी बंधी होती है।


रिश्ते में यह देवता भगवान शिव के साले और माता पार्वती के भाई हैं। लेकिन एक गलती के कारण देवी पार्वती ने इन्हें कैद में डाल दिया और तब से यह कैद में रहते हैं। इस देवता का नाम है लाटू देवता।

इस देवता का मंदिर नंदा देवी यात्रा के मार्ग में वांण क्षेत्र में है। लाटू देवता के विषय में ऐसी कथा है कि देवी पार्वती के साथ जब भगवान शिव का विवाह हुआ तो पार्वती जिसे नंदा देवी नाम से भी जाना जाता है। इन्हें विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े। इसमें चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे।

मार्ग में लाटू को इतनी प्यास लगी कि पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे। इस बीच लाटू देवता को एक घर दिखा और पानी की तलाश में घर के अंदर पहुंच गए। घर का मालिक बुजुर्ग था। बुजुर्ग ने लाटू देवता से कहा कि कोने में मटका है पानी पी लो।

संयोग से वहां दो मटके रखे थे। लाटू देवता ने एक मटके को उठाया और पूरा का पूरा मटका खाली कर दिया। प्यास के कारण लाटू समझ नहीं पाए कि जिसे वह पानी समझकर पी गए वह पानी नहीं मदिरा था।

कुछ देर में मदिरा ने असर दिखाना शुरु कर दिया और लाटू देवता नशे में उत्पात मचाने लगे। इसे देखकर देवी पार्वती क्रोधित हो गई और लाटू को कैद में डाल दिया। पार्वती ने आदेश दिया कि इन्हें हमेशा कैद में ही रखा जाए।

माना जाता है कि कैदखाने में लाटू देवता एक विशाल सांप के रुप में विरामान रहते हैं। इन्हें देखकर पुजारी डर न जाएं इसलिए यह आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर का द्वार खोलते हैं।

वांण क्षेत्र में लाटू देवता के प्रति लोगों में बड़ी श्रद्घा है। लोग अपनी मनोकामना लेकर लाटू के मंदिर में आते हैं। कहते हैं यहां से मांगी मनोकामना जरुर पूरी होती है।

22/12/2025

jai latu devta 👏👏👏

शहर के शोर-शराबे से बहुत दूर, एक ऐसा घना और प्राचीन वन था जहाँ सूरज की किरणें भी पेड़ों से छनकर धरती तक पहुँचती थीं। यह ...
11/12/2025

शहर के शोर-शराबे से बहुत दूर, एक ऐसा घना और प्राचीन वन था जहाँ सूरज की किरणें भी पेड़ों से छनकर धरती तक पहुँचती थीं। यह जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं था, बल्कि शांति का एक पवित्र धाम था।

इस वन के हृदय में एक चमत्कार छिपा था। यहाँ किसी इंसान ने छेनी और हथौड़े से मूर्ति नहीं बनाई थी, बल्कि स्वयं प्रकृति ने अपने सबसे सुंदर रूप को ढाला था। एक विशाल, सदियों पुराने वृक्ष की उलझी हुई जड़ों, तनों और छाल ने धीरे-धीरे प्रभु हनुमान के ध्यानमग्न रूप को धारण कर लिया था।

उनका पूरा शरीर हरी मखमली काई (moss) और जंगल के छोटे-छोटे फूलों से ढका हुआ था, मानो वन ने स्वयं अपने हाथों से अपने आराध्य का श्रृंगार किया हो। वे वहाँ शांत बैठे थे, जंगल के रक्षक के रूप में।

जो भी कोई भटका हुआ राही या शांति की तलाश में निकला साधक इस स्थान पर पहुँचता, तो इस अद्भुत, सजीव दृश्य को देखकर उसका मन असीम शांति से भर जाता। उसे यह गहरा अहसास होता कि ईश्वर को खोजने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है; वे तो प्रकृति के कण-कण में, हर पत्ते में और हर साँस में समाए हुए हैं।

यह 'वनवासी रूप' हमें सिखाता है कि अगर हम प्रकृति से जुड़ें, तो हम ईश्वर से जुड़ जाते हैं।

🌿 सीख: प्रकृति ही ईश्वर का सबसे सुंदर और जीवित मंदिर है। इसका सम्मान करें, इसमें ही प्रभु का वास है।
Facebook Caption के लिए सुझाव:
प्रकृति और प्रभु का इससे सुंदर मिलन और क्या हो सकता है? 🌿🙏
जब कुदरत खुद हनुमान जी का रूप धारण कर ले, तो वह दृश्य अलौकिक हो जाता है। यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि ईश्वर हरियाली में, शांति में और इस धरती के हर कण में बसे हैं।
जय बजरंगबली! 🌺🌳

11/12/2025

👏👏

https://youtu.be/3rRJFC_vN5o?si=-oI0lzWOIfGhX6tM
10/12/2025

https://youtu.be/3rRJFC_vN5o?si=-oI0lzWOIfGhX6tM

चमोली में स्थिति वाण के लाटू देवता को लेकर कई चीजें बोली और लिखी जाती हैं लेकिन असल में कौन हैं लाटू देवता? मां नंदा ....

13/09/2021

Maa nanda devi

6th day latu dham me barish ke liye puja cha rahi aaj chhthwan din hai
04/02/2021

6th day latu dham me barish ke liye puja cha rahi aaj chhthwan din hai

Jai Latu Devta, Jai Bholenath
22/12/2020

Jai Latu Devta, Jai Bholenath

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