Mahadev Kripa

Mahadev Kripa Ganesh Darshan Burhanpur

समाज की इस कड़वी सच्चाई को बदलने की शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी। बेटा और बेटी में फर्क करना बंद करें और दोनों को सम...
16/06/2026

समाज की इस कड़वी सच्चाई को बदलने की शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी। बेटा और बेटी में फर्क करना बंद करें और दोनों को समान अधिकार दें। आइए मिलकर एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएं। ⚖️✨

परेशानियों से घिरे हैं? महादेव पर विश्वास रखें 🔱एक परेशान लड़के की कहानी जिसे महादेव की भक्ति से जीवन में शांति और सफलता ...
15/06/2026

परेशानियों से घिरे हैं? महादेव पर विश्वास रखें 🔱

एक परेशान लड़के की कहानी जिसे महादेव की भक्ति से जीवन में शांति और सफलता मिली। महादेव सिर्फ हमारी मुश्किलें नहीं हटाते, बल्कि उन्हें झेलने की ताकत भी देते हैं। रोज़ सुबह सच्चे मन से शिव जी को जल चढ़ाएं और अपनी मेहनत करते रहें। आपकी जिंदगी भी बदल जाएगी। 🙏✨

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पुरुष की इज्जत पैसा है"जब तक पुरुष की जेब में गरम नोट हैं, तब तक वह 'घर का चिराग' और 'रीढ़ की हड्डी' है।। जैसे ही जेब खा...
15/06/2026

पुरुष की इज्जत पैसा है

"जब तक पुरुष की जेब में गरम नोट हैं,
तब तक वह 'घर का चिराग' और
'रीढ़ की हड्डी' है।। जैसे ही जेब खाली हुई,
वह सिर्फ एक 'अतिरिक्त बोझ' बन जाता है।
दुनिया बहुत व्यावहारिक है मेरे दोस्त।
यहाँ 'निस्वार्थ प्रेम' की बातें सिर्फ किताबों में
अच्छी लगती हैं। हकीकत तो यही है कि
पुरुष की इज्जत उसकी सीरत से नहीं,
उसकी 'हैसियत' से तय होती है।
बेरोजगारी आते ही बरसों का त्याग और
प्यार पल भर में 'नाकामयाबी' के मलबे में
दबा दिया जाता है। सलाह मशविरे की
जगह ताने ले लेते हैं, और इज्जत की
जगह तिरस्कार।
पुरुष को बचपन से सिखाया जाता है कि
उसका एकमात्र उद्देश्य 'कमाकर देना' है।
नतीजा? अगर वह कमा रहा है तो भगवान
नहीं तो बेजान। उसे एक इंसान नहीं, बल्कि
सिर्फ एक "मनी मशीन" समझा जाता है।

अब जमाना बदल चुका है1. लोगों के पास वक्त और सब्र दोनों की कमी हो गई है।2. किसी से नाराज होने से पहले सौ बार सोच लेना। आज...
14/06/2026

अब जमाना बदल चुका है

1. लोगों के पास वक्त और सब्र दोनों की कमी हो गई है।
2. किसी से नाराज होने से पहले सौ बार सोच लेना। आजकल लोग मनाने से ज्यादा छोड़ना पसंद करते हैं।
3. आज के समय में लोगों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है, चाहे वह सोशल मीडिया के वर्चुअल रिश्ते हों या असल जिंदगी के। एक जाता है दूसरा आ जाता है।
4. सामने वाला आपकी नाराजगी की वजह समझने के बजाय आपसे दूरी बना लेना ज्यादा आसान समझता है। ईगो इतना बढ़ गया है कि कोई झुकना नहीं चाहता।

नाराजगी को अब आत्मसम्मान से जोड़कर देखा जाने लगा है। इसलिए, आज के दौर का सीधा सा नियम है—अगर आप रिश्तों में हद से ज्यादा उम्मीदें या नाराजगी रखेंगे, तो लोग आपको मनाने में अपनी ऊर्जा लगाने के बजाय चुपचाप आगे बढ़ जाएंगे। रिश्ता चाहिए तो लंबी नाराजगी मत रखना।

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Title: नेकी (Kindness) ❤️एक सर्द रात में एक गरीब बूढ़े की मदद करने वाले युवक की यह दिल छू लेने वाली कहानी साबित करती है ...
14/06/2026

Title: नेकी (Kindness) ❤️

एक सर्द रात में एक गरीब बूढ़े की मदद करने वाले युवक की यह दिल छू लेने वाली कहानी साबित करती है कि नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती। जब हम बिना किसी स्वार्थ के किसी की मदद करते हैं, तो वह लौटकर हमारे पास जरूर आती है।

पूरी कहानी पढ़ें और जानें कि कैसे एक छोटी सी मदद ने सालों बाद उस युवक की जिंदगी बदल दी! ✨

क्या आपने भी कभी किसी अजनबी की बिना स्वार्थ मदद की है? अपने अनुभव कमेंट्स में जरूर बताएं! 👇

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दौलत नहीं, रिश्ते सबसे बड़ी ताकत हैंएक घमंडी अमीर आदमी अपने गरीब सगे भाई से इतनी नफरत करता था कि उसने उसे अपनी पार्टी से...
13/06/2026

दौलत नहीं, रिश्ते सबसे बड़ी ताकत हैं

एक घमंडी अमीर आदमी अपने गरीब सगे भाई से इतनी नफरत करता था कि उसने उसे अपनी पार्टी से धक्के मारकर निकाल दिया था। उसने कहा, "तेरी औकात नहीं है मेरे साथ खड़े होने की।"

कुछ दिन बाद अमीर भाई का भयंकर एक्सीडेंट हो गया। उसका बहुत सारा खून बह गया और ब्लड ग्रुप इतना दुर्लभ था कि पूरे शहर में नहीं मिल रहा था।

जब अमीर भाई को होश आया तो डॉक्टर ने बताया, "एक अनजान आदमी ने अपना खून देकर आपकी जान बचाई है, पर कमज़ोरी की वजह से वो अभी भी बेहोश है।"

जब अमीर भाई ने बगल वाले बेड पर देखा, तो वहाँ उसका वही गरीब भाई लेटा था। जिस भाई को उसने धक्के मारे थे, उसी ने अपनी जान दांव पर लगाकर उसकी जान बचाई थी।

अमीर भाई फूट-फूट कर अपने गरीब भाई के पैरों में गिर पड़ा।

क्या मुसीबत में दौलत नहीं, सिर्फ अपना खून ही काम आता है? अपना जवाब ज़रूर लिखें!

रिश्तों की सीख

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सच्चा साथ ❤️अस्पताल के एक कमरे में एक बुजुर्ग आदमी भर्ती था।डॉक्टरों ने कहा था कि उसकी हालत गंभीर है।उसकी पत्नी सुबह से ...
13/06/2026

सच्चा साथ ❤️

अस्पताल के एक कमरे में एक बुजुर्ग आदमी भर्ती था।
डॉक्टरों ने कहा था कि उसकी हालत गंभीर है।
उसकी पत्नी सुबह से शाम तक उसके सिरहाने बैठी रहती।
दवा का समय हो, खाना खिलाना हो या रात भर जागना हो -
वह हर पल उसके साथ रहती।

एक दिन पति ने कमजोर आवाज़ में कहा -
"तुम थक जाती होगी... घर चली जाया करो।"
पत्नी मुस्कुराई और बोली -
"जब हमारी शादी हुई थी, तब तुमने कहा था कि हर सुख-दुख
में साथ निभाओगे। अब मैं अपना वादा कैसे भूल जाऊँ?"
पति की आँखें भर आईं।

कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई।
उसने पत्नी का हाथ पकड़कर कहा -
"अगर मैं चला जाऊँ, तो रोना मत..."
पत्नी ने आँसू छुपाते हुए कहा -
"तुम कहीं नहीं जाओगे, तुम तो मेरी हर याद में रहोगे।"

कुछ ही देर बाद पति ने आखिरी साँस ली। 💔
पत्नी चुपचाप उसके पास बैठी रही।
लोग उसे संभालने आए तो वह बस इतना बोली -
"आज मेरा पति नहीं गया है... आज मेरी आधी ज़िंदगी चली गई है।"

यह सुनकर वहाँ खड़े हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं। 😢

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#सच्चा_साथ

खामोशी का दर्द 😔एक लड़का हर रोज़ अपने दोस्तों के साथ हँसता था, मज़ाक करता था और सबको खुश रखता था।लेकिन एक दिन उसने अचानक...
12/06/2026

खामोशी का दर्द 😔

एक लड़का हर रोज़ अपने दोस्तों के साथ हँसता था, मज़ाक करता था और सबको खुश रखता था।
लेकिन एक दिन उसने अचानक सबसे बात करना कम कर दिया।
दोस्तों ने सोचा-शायद उसे घमंड हो गया है।
घरवालों ने सोचा-शायद वह बदल गया है।
किसी ने उसकी खामोशी की वजह जानने की कोशिश नहीं की।
दिन बीतते गए...
एक रात उसकी माँ उसके कमरे में गई तो देखा कि वह अपने पुराने फोटो एल्बम को देखते हुए रो रहा था।
माँ ने पूछा, "क्या हुआ बेटा?"
उसकी आँखों से आँसू बह निकले।
वह बोला, "माँ, मैं थक गया हूँ... सबकी उम्मीदों पर खरा उतरते-उतरते। मैं सबको खुश रखता रहा, लेकिन कभी किसी ने नहीं पूछा कि मैं कैसा हूँ।"
माँ ने उसे गले लगा लिया।
उस दिन माँ को समझ आया कि हर मुस्कुराता चेहरा खुश नहीं होता।
कुछ लोग इसलिए चुप हो जाते हैं क्योंकि उनके दर्द को समझने वाला कोई नहीं होता।

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सबकुछ पहले से तय है मगरजो तय है, वह होकर रहेगाहमारी मौत कब और कहाँ होगी,और हमारे हिस्से का दाना-पानीकहाँ लिखा है, यह सब ...
12/06/2026

सबकुछ पहले से तय है मगर

जो तय है, वह होकर रहेगा
हमारी मौत कब और कहाँ होगी,
और हमारे हिस्से का दाना-पानी
कहाँ लिखा है, यह सब पहले से तय है।
इस बात की चिंता छोड़ दीजिए।
लेकिन आगे क्या होगा?
हम 84 लाख योनियों के चक्कर में फँसेंगे
या मोक्ष पाएंगे, इसका फैसला कोई
और नहीं बल्कि हमारे आज के कर्म करेंगे।
सीधी सी बात है, अगर पेड़ बबूल का
लगाओगे, तो मीठे आम खाने को कैसे
मिलेंगे? बुरे कर्मों का नतीजा कभी
अच्छा नहीं हो सकता।
प्यारे, वक़्त अभी भी हाथ में है।
इस जीवन का फायदा उठा लो,
नेक राह पर चल पड़ो, क्योंकि जाना तो
सबको एक दिन यहीं से है।

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!!बहु हो तो ऐसी!! - रिश्तों की सीखयह कहानी सास और बहू के बीच के अटूट प्रेम और विश्वास को दर्शाती है। जब एक पड़ोसन ने सास...
11/06/2026

!!बहु हो तो ऐसी!! - रिश्तों की सीख

यह कहानी सास और बहू के बीच के अटूट प्रेम और विश्वास को दर्शाती है।
जब एक पड़ोसन ने सास-बहू की आपसी अनबन का फायदा उठाकर घर तोड़ने की कोशिश की और सास को बुरा-भला कहा, तो बहू ने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया: "पंचायती मत करो, वो मेरी माँ है।"

यह सुनकर सास की आँखों में खुशी के आँसू आ गए और उन्होंने अपनी बहू को गले से लगा लिया।

सीख: बाहरी लोगों की बातों में आकर कभी अपने परिवार के रिश्तों को नहीं टूटने देना चाहिए। अपनों का साथ हमेशा निभाएं।

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