10/07/2025
*किस द्रव्य से रुद्राभिषेक*
वैसे तो शुद्ध जल पर्याप्त है परंतु विभिन्न मनोकामना के लिए विभिन्न द्रव्य (गंगाजल, तीर्थजल, दूध, पञ्चामृत, शहद, घी, गन्ने का रस, विभिन्न जड़ी बूटियों नक रस, फल का रस आदि आदि) से अभिषेक का विधान है।
*_"पञ्चामृतस्याभिषेकादमृत्वम् समश्नुते"_*
पञ्चामृत से अभिषेक करने वाला अमरत्व प्राप्त करता है।
‘वीरमित्रोदयापूजाप्रकाश’ के अनुसार भगवान शिव को ब्रह्म-स्नान कराने वाला सभी पापों से छूटकर रुद्रलोक को प्राप्त करता है। कपिला गाय की पञ्चगव्य में कुशोदक मिलाकर (अभिषेक के) मंत्रों द्वारा स्नान कराना ब्राह्म-स्नान कहलाता है।
*_कपिलापञ्चगव्येन कुशवारियुतेन च। स्नापयेत् मन्त्रपूतेन ब्राह्मं स्नानं हि तत्स्मृतम्।।_*
*_एकाहमपि यो लिङ्गे ब्राह्मं स्नानं समाचरेत्। विधूय सर्वपापानि रुद्रलोके महीयते।।_*
*शास्त्रों से संकलित कुछ विशेष द्रव्य*
वृष्टि (वर्षा) हेतु जल से अभिषेक करें *_"जलेन वृष्टिमापनोति"_*
व्याधि की शांति के लिए कुशोदक जल (ऐसा जल जिसमें कुश घास की पत्तियाँ छोड़ी गई हों) से अभिषेक करें *_"व्याधिशान्तयै कुशोदकैः"_*
पशु प्राप्ति के लिये दही से अभिषेक करें *_"दध्रा च पशुकामाय"_*
लक्ष्मी प्राप्ति के लिये गन्ने के रस से अभिषेक करें *_"श्रिया इक्षुरसेन च" “श्रीकामीक्षुरसेन वै”_*
धन प्राप्ति के लिये शहद तथा घी से अभिषेक करें *_"मध्वाज्येन धनार्थी"_*
मोक्ष प्राप्ति के लिये तीर्थ के जल से अभिषेक करें *_"स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा"_*
पुत्र प्राप्ति के लिये दूध से अभिषेक करें *_"पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात्"_*
पुत्रप्राप्ति की इच्छा वाले शर्करा मिश्रित जल से अभिषेक करें *_“पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेच्छिवं तथा”_*
वन्ध्या, काकवन्ध्या तथा मृतवत्सा स्त्री पुत्र प्राप्ति के लिये गौदूध से अभिषेक करें *_"वन्ध्या वा काकवन्ध्या वा मृतवत्सा च याङ्गना, सघः पुत्रमवाप्रोति पयसा चाभिषेचनात्"_*
ज्वर उतारने के लिये जल से अभिषेक करें *_“ज्वरप्रकोपशन्त्यर्थं जलधारा शिवप्रिया”_*
वंश विस्तार के लिये घी की धारा से अभिषेक करें *_“घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्, तदा वंशस्य विस्तारो जायते नात्र संशयः”_*
प्रमेह रोग के विनाश के लिये दूध की धारा से अभिषेक करें इससे मनोभिलषित कामना की पूर्ति भी होती है *_“प्रमेहरोगशान्त्यर्थं प्राप्नुयान्मानसेप्सितम्, केवलं दुग्धधारा च तदा कार्या विशेषतः”_*
बुद्धि की जड़ता को दूर करने के लिये शक्कर मिले दूध से अभिषेक करें *_“शर्करामिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्, श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शंकरस्य च”_*
शत्रु विनाश के लिये सरसों के तेल से अभिषेक करें *_“सार्षपेणैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह”_*
यक्ष्मायोग (तपेदिक) रोग दूर करने के लिये मधु से अभिषेक करें *_“मधुना यक्ष्मराजोअपि गच्छेद्वै शिवपूजनात्”_*
पापक्षय के लिए शहद से अभिषेक करें *_“पापक्षयार्थी मधुना”_*
आरोग्य के लिये घी से अभिषेक करें *_“निर्व्याधिः सर्पिषा तथा”_*
दीर्घायु के लिये गौदुग्ध से अभिषेक करें *_“जीवनार्थी तु पयसा”_*
जो व्यक्ति कोल्हू से निकले तिल के तेल से शिवलिंग का अभिषेक करता है, वह शिवपद प्राप्त करता है *_“य: पुमांस्तिलतैलेन करयन्त्रोद्भवेन च। शिवाभिषकं कुरुते स शैवं पदमाप्रुयात्।।”_*
जो कपूर और अगुरु मिश्रित जल से लिंग को स्नान कराता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर शिव-सायुज्य को प्राप्त करता है *_“कर्पूरागुरुतोयेन यो लिङ्गं स्नापयेत्सकृत्। सर्वपापविनिर्मुक्त: शिवसायुज्यमाप्रुयात्।।”_*
जो वस्त्र से छाने हुए जल से शिव लिंग को स्नान कराता है वह अपनी कामनाओं को पूरा कर वरुणलोक को प्राप्त करता है *_“वस्त्रपूतेन तोयेन यो लिङ्गं स्नापयेत्सकृत। सर्वकामसुतृप्तात्मा वारुणं लोकमाप्रुयात्।।”_*
साभार गीताप्रेस गोरखपुर
acharykrishna3248