Fankaar Academy - Khalid Nadeem Budauni

Fankaar Academy - Khalid Nadeem Budauni خالد ندیم بدایونی کے نام
Khalid Nadeem Budauni...
(In Memory of the Departed – Dedicated to Khalid Nadeem Budauni) Literary arts

हाल-ए-दिल तूने कभी फोन पे पूछा मेरा ये मुझे तू ही बता कैसे मैं अच्छा हो जाऊँ~ ख़ालिद नदीम बदायूँनीحال‌ِ دل تو نے کبھی فون...
31/05/2026

हाल-ए-दिल तूने कभी फोन पे पूछा मेरा
ये मुझे तू ही बता कैसे मैं अच्छा हो जाऊँ
~ ख़ालिद नदीम बदायूँनी

حال‌ِ دل تو نے کبھی فون پہ پوچھا میرا
یہ مجھے تو ہی بتا کیسے میں اچھا ہو جاؤں
~ خالد ندیم بدایونی
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आज अदब, शायरी और ग़ज़ल की दुनिया का एक चमकता सितारा हमसे जुदा हो गया।आधुनिक ग़ज़ल के बेहद मक़बूल, नफ़ीस एहसासात के तरजुम...
28/05/2026

आज अदब, शायरी और ग़ज़ल की दुनिया का एक चमकता सितारा हमसे जुदा हो गया।
आधुनिक ग़ज़ल के बेहद मक़बूल, नफ़ीस एहसासात के तरजुमान और लाखों दिलों की आवाज़, डा. बशीर बद्र साहब का इंतिक़ाल हो गया।

उन्होंने अपनी शायरी से मोहब्बत, तन्हाई, रिश्तों और इंसानी जज़्बात को जिस खूबसूरती से अल्फ़ाज़ दिए, वह हमेशा याद रखे जाएंगे।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम चाहने वालों को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमाए।

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

17/05/2026

"Teeragi se humne sauda kar liya..." 🕊️🌙
तीरगी से हमने सौदा कर लिया... 🥀✨

A beautiful line by Khalid Nadeem Budauni Sahab.

Sometimes, the shadows feel safer than the blinding light.
🙂‍↕️🥀✨

مجھ کو کوئی شکایت نہیں آپ سےآپ کو مجھ سے کوئی گلہ ہو تو ہو~خالد ندیم بدایونی ❤️‍🔥🥀
06/05/2026

مجھ کو کوئی شکایت نہیں آپ سے
آپ کو مجھ سے کوئی گلہ ہو تو ہو
~خالد ندیم بدایونی

❤️‍🔥🥀

जब भी हिंदी फिल्मों के प्यार भरे गीतों की बात होती है, तो एक नाम अपने आप ज़हन में आता है — शकील बदायूंनी । ग़ज़ल की रूह ...
20/04/2026

जब भी हिंदी फिल्मों के प्यार भरे गीतों की बात होती है, तो एक नाम अपने आप ज़हन में आता है — शकील बदायूंनी । ग़ज़ल की रूह को फिल्मों में उतार देने वाले इस शायर ने मोहब्बत को सिर्फ लिखा नहीं, उसे जिया, महसूस किया और अमर कर दिया।

🌹 शकील बदायूँनी: मोहब्बत का शायर -

3 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के Badaun में जन्मे शकील साहब ने बचपन से ही अरबी, उर्दू, फारसी और हिंदी की शिक्षा प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने Aligarh Muslim University में पढ़ाई की, जहां का अदबी माहौल उनकी शायरी को नई ऊँचाइयाँ देता गया।

🎶 फिल्मी दुनिया में सफर -

1946 में एक मुशायरे के जरिए उनका रुख बॉम्बे की ओर हुआ, जहाँ उनकी मुलाकात मशहूर संगीतकार Naushad से हुई। यह जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार जोड़ियों में से एक बन गई।

उनकी पहली बड़ी सफलता फिल्म Dard से मिली, और फिर सिलसिला चलता गया —
Mughal-e-Azam, Baiju Bawra, Mother India, Chaudhvin Ka Chand जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।

🎵 अमर गीतों की विरासत -

उनके लिखे कुछ कालजयी गीत :-

“प्यार किया तो डरना क्या” (Mughal-e-Azam)
“मन तड़पत हरि दर्शन को आज” (Baiju Bawra)
“चौदहवीं का चाँद हो” (Chaudhvin Ka Chand)
“दुख भरे दिन बीते रे भैया” (Mother India)
“मधुबन में राधिका नाचे रे” (Kohinoor)

इन गीतों में सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जज़्बात, इबादत और इंसानी एहसासों की गहराई है।

✨ शायरी की खासियत -

जहाँ एक ओर उनके समकालीन शायर समाज और क्रांति की बात कर रहे थे, वहीं शकील बदायूँनी ने मोहब्बत को अपनी शायरी का केंद्र बनाया। उनकी शायरी में नज़ाकत, सादगी और गहराई का ऐसा मेल है, जो दिल को छू जाता है।

🕊️ आखिरी सफर -

20 अप्रैल 1970 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनके अल्फ़ाज़ आज भी ज़िंदा हैं — हर मोहब्बत में, हर गीत में, हर दिल में।

🌹 शकील बदायूँनी: आज उनकी पुण्यतिथि पर ख़िराज-ए-अक़ीदत -

आज 20 अप्रैल है — वह दिन जब उर्दू शायरी और हिंदी सिनेमा के महान गीतकार शकील बदायूंनी ने इस दुनिया को अलविदा कहा था।

शकील बदायूँनी सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि मोहब्बत की आवाज़ थे। उन्होंने अपने अल्फ़ाज़ से इश्क़ को ऐसी ऊँचाई दी, जो आज भी हर दिल में गूंजती है। उनके गीतों में दर्द भी है, इबादत भी, और मोहब्बत की पाकीज़गी भी।

“प्यार किया तो डरना क्या”, “मन तड़पत हरि दर्शन को आज”, “चौदहवीं का चाँद हो” — ये सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एहसास हैं, जो वक्त के साथ और भी गहरे होते जा रहे हैं।

आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें याद करते हैं, उनके फन को सलाम करते हैं, और उनके लिखे हर लफ्ज़ को दिल से महसूस करते हैं।

💐 ख़िराज-ए-अक़ीदत -
“ए मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया…”
आज के दिन, हम दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें जन्नत में आला मकाम अता फरमाए। 🤲

💬 आप बताइए…
शकील बदायूँनी का आपका सबसे पसंदीदा गीत कौन सा है?



⚠️ महत्वपूर्ण सूचना ⚠️मोहतरम ख़ालिद नदीम बदायूनी साहब के नाम से किसी अज्ञात व्यक्ति ने फेसबुक पर एक फर्जी (Fake) प्रोफाइ...
16/04/2026

⚠️ महत्वपूर्ण सूचना ⚠️

मोहतरम ख़ालिद नदीम बदायूनी साहब के नाम से किसी अज्ञात व्यक्ति ने फेसबुक पर एक फर्जी (Fake) प्रोफाइल बना ली है।

सभी दोस्तों से निवेदन है कि इस फर्जी अकाउंट से सावधान रहें। इससे किसी भी प्रकार की बातचीत, अपनी निजी जानकारी साझा करना या पैसे का लेन-देन बिल्कुल न करें।

कृपया इस प्रोफाइल को तुरंत Report करें, ताकि किसी को भी किसी तरह की परेशानी न हो।

केवल असली और प्रमाणित अकाउंट पर ही भरोसा करें।

धन्यवाद 🙏

Fake Profile Link 🔗
https://www.facebook.com/share/18UWB3NYDT/

14/04/2026

Hamare Khoon Se Kab Tak 💦 | Khalid Nadeem Budauni ❤️‍🔥

आज़माइश, इम्तिहाँ, ईसार तक जाना पड़ाजाँ-निसारी को रज़ा-ए-यार तक जाना पड़ाآزمائش، امتحاں، ایثار تک جانا پڑاجاں نثاری کو ر...
30/03/2026

आज़माइश, इम्तिहाँ, ईसार तक जाना पड़ा
जाँ-निसारी को रज़ा-ए-यार तक जाना पड़ा
آزمائش، امتحاں، ایثار تک جانا پڑا
جاں نثاری کو رضاۓ یار تک جانا پڑا

ज़िंदगानी की हदों के पार तक जाना पड़ा
चाहने वालों को आख़िर दार तक जाना पड़ा
زندگانی کی حدوں کے پار تک جانا پڑا
چاہنے والوں کو آخر دار تک جانا پڑا

आगही को बस उसूल-ए-यार तक जाना पड़ा
बे-ख़ुदी को एहतरामन दार तक जाना पड़ा
آگہی کو بس اصولِ یار تک جانا پڑا
بے خودی کو احتراماً دار تک جانا پڑا

गुंच-ओ-गुल को बहारें पेश करने के लिए
बागबाँ को सरहदों के पार तक जाना पड़ा
غنچۂ و گل کو بہاریں پیش کرنے کے لیے
باغباں کو سرحدوں کے پار تک جانا پڑا

हो चुका बीमार-ए-ग़म जब हर दवा से ला-इलाज
चारागर को ख़ुद दिल-ए-बीमार तक जाना पड़ा
ہو چکا بیمارِ غم جب ہر دوا سے لا علاج
چارہ گر کو خود دلِ بیمار تک جانا پڑا

ख़ुश्बुओं की जब से उल्फ़त छोड़ बैठा बागबाँ
ख़ुश्बुओं को कूच-ओ-बाज़ार तक जाना पड़ा
خوشبوؤں کی جب سے الفت چھوڑ بیٹھا باغباں
خوشبوؤں کو کوچہ و بازار تک جانا پڑا

वक़्त के मुंसिफ़ की देखो तो करम फ़रमाइयाँ
शहसवारों को भी दश्त-ए-ख़ार तक जाना पड़ा
وقت کے منصف کی دیکھو تو کرم فرمائیاں
شہسواروں کو بھی دشتِ خار تک جانا پڑا

नाज़-बरदारी ग़ज़ल की हम सुख़नवर क्या करें
‘मीर’ को तो साया-ए-दीवार तक जाना पड़ा
ناز برداری غزل کی ہم سخنور کیا کریں
'میر' کو تو سایۂ دیوار تک جانا پڑا

~ KHALID NADEEM BUDAUNI
▪️Fankaar Academy, Budaun U.P.
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عید کی خوشیاں تو ہیں، لیکن دل میں ایک گہرا خالی پن بھی ہے...آج اسٹاد خالد ندیم بدایونی صاحب کے بغیر ہم سب کی یہ پہلی عید...
21/03/2026

عید کی خوشیاں تو ہیں، لیکن دل میں ایک گہرا خالی پن بھی ہے...
آج اسٹاد خالد ندیم بدایونی صاحب کے بغیر ہم سب کی یہ پہلی عید ہے۔ ان کا مسکراتا چہرہ، ان کی باتیں اور ان کی موجودگی ہر عید کی رونق ہوا کرتی تھی۔ یقین نہیں آتا کہ اس بار وہ ہمارے درمیان نہیں ہیں، لیکن ان کی یادیں ہمارے دلوں میں ہمیشہ زندہ رہیں گی۔

آپ تمام چاہنے والوں سے گزارش ہے کہ اپنی عید کی خوشیوں اور دعاؤں میں انہیں بھی ضرور شامل رکھیں۔ اللہ تعالیٰ مرہوم کی مغفرت فرمائے، ان کے درجات بلند کرے اور انہیں جنت الفردوس میں اعلیٰ مقام عطا فرمائے۔ (آمین)

آپ سبھی کو عید الفطر کی پُر خلوص مبارکباد۔ 🌙✨

आज उस्ताद ख़ालिद नदीम बदायूँनी साहब के बिना हम सब की यह पहली ईद है। उनका मुस्कुराता चेहरा, उनकी बातें और उनकी मौजूदगी हर ईद की रौनक हुआ करती थी। यकीन नहीं होता कि इस बार वो हमारे दरमियान नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी।

आप तमाम चाहने वालों से गुजारिश है कि अपनी ईद की खुशियों और दुआओं में उन्हें भी शामिल रखें। अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनके दरजात बुलंद करे और उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए। (आमीन)

आप सभी को ईद-उल-फितर की पुर-खुलूस मुबारकबाद। 🌙✨

बदायूँ की अदबी रिवायत को अपनी शायरी से ज़िंदा रखने वाले उस्ताद शायर मरहूम ख़ालिद नदीम बदायूनी साहब का मंसबिया/करबला से म...
10/03/2026

बदायूँ की अदबी रिवायत को अपनी शायरी से ज़िंदा रखने वाले उस्ताद शायर मरहूम ख़ालिद नदीम बदायूनी साहब का मंसबिया/करबला से मुतअल्लिक़ कलाम का मजमूआ "अनवार-ए-करबला" अब रेख़्ता पर डिजिटल रूप में उपलब्ध है।

यह किताब 2017 में ग़ाज़ी किताब घर, बहराइच से प्रकाशित हुई थी (कुल पेज: 115) और इसमें वाक़िया-ए-करबला, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, अहल-ए-बैत की शान में मनक़बत और अन्य रूहानी कलाम शामिल हैं। उनकी गहरी अकीदत और करबला की याद को दिल को छूने वाले अंदाज़ में बयान किया गया है – एक ऐसा मजमूआ जो हर आशिक़-ए-हुसैन के लिए ज़रूरी है।

अल्लाह तआला मरहूम ख़ालिद नदीम बदायूनी साहब की मग़फिरत फरमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन। 🤲

🔗 किताब का लिंक: https://www.rekhta.org/ebooks/detail/anwar-e-karbala-khalid-nadeem-budauni-ebooks
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