20/04/2026
जब भी हिंदी फिल्मों के प्यार भरे गीतों की बात होती है, तो एक नाम अपने आप ज़हन में आता है — शकील बदायूंनी । ग़ज़ल की रूह को फिल्मों में उतार देने वाले इस शायर ने मोहब्बत को सिर्फ लिखा नहीं, उसे जिया, महसूस किया और अमर कर दिया।
🌹 शकील बदायूँनी: मोहब्बत का शायर -
3 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के Badaun में जन्मे शकील साहब ने बचपन से ही अरबी, उर्दू, फारसी और हिंदी की शिक्षा प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने Aligarh Muslim University में पढ़ाई की, जहां का अदबी माहौल उनकी शायरी को नई ऊँचाइयाँ देता गया।
🎶 फिल्मी दुनिया में सफर -
1946 में एक मुशायरे के जरिए उनका रुख बॉम्बे की ओर हुआ, जहाँ उनकी मुलाकात मशहूर संगीतकार Naushad से हुई। यह जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार जोड़ियों में से एक बन गई।
उनकी पहली बड़ी सफलता फिल्म Dard से मिली, और फिर सिलसिला चलता गया —
Mughal-e-Azam, Baiju Bawra, Mother India, Chaudhvin Ka Chand जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।
🎵 अमर गीतों की विरासत -
उनके लिखे कुछ कालजयी गीत :-
“प्यार किया तो डरना क्या” (Mughal-e-Azam)
“मन तड़पत हरि दर्शन को आज” (Baiju Bawra)
“चौदहवीं का चाँद हो” (Chaudhvin Ka Chand)
“दुख भरे दिन बीते रे भैया” (Mother India)
“मधुबन में राधिका नाचे रे” (Kohinoor)
इन गीतों में सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जज़्बात, इबादत और इंसानी एहसासों की गहराई है।
✨ शायरी की खासियत -
जहाँ एक ओर उनके समकालीन शायर समाज और क्रांति की बात कर रहे थे, वहीं शकील बदायूँनी ने मोहब्बत को अपनी शायरी का केंद्र बनाया। उनकी शायरी में नज़ाकत, सादगी और गहराई का ऐसा मेल है, जो दिल को छू जाता है।
🕊️ आखिरी सफर -
20 अप्रैल 1970 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनके अल्फ़ाज़ आज भी ज़िंदा हैं — हर मोहब्बत में, हर गीत में, हर दिल में।
🌹 शकील बदायूँनी: आज उनकी पुण्यतिथि पर ख़िराज-ए-अक़ीदत -
आज 20 अप्रैल है — वह दिन जब उर्दू शायरी और हिंदी सिनेमा के महान गीतकार शकील बदायूंनी ने इस दुनिया को अलविदा कहा था।
शकील बदायूँनी सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि मोहब्बत की आवाज़ थे। उन्होंने अपने अल्फ़ाज़ से इश्क़ को ऐसी ऊँचाई दी, जो आज भी हर दिल में गूंजती है। उनके गीतों में दर्द भी है, इबादत भी, और मोहब्बत की पाकीज़गी भी।
“प्यार किया तो डरना क्या”, “मन तड़पत हरि दर्शन को आज”, “चौदहवीं का चाँद हो” — ये सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एहसास हैं, जो वक्त के साथ और भी गहरे होते जा रहे हैं।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें याद करते हैं, उनके फन को सलाम करते हैं, और उनके लिखे हर लफ्ज़ को दिल से महसूस करते हैं।
💐 ख़िराज-ए-अक़ीदत -
“ए मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया…”
आज के दिन, हम दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें जन्नत में आला मकाम अता फरमाए। 🤲
💬 आप बताइए…
शकील बदायूँनी का आपका सबसे पसंदीदा गीत कौन सा है?