Sonroopa Vishal

Sonroopa Vishal This is the official page of well known poetess Sonroopa Vishal. Sonroopa Vishal is a well known Indian poetess, writer, author and TV personality.
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The Government of Uttar Pradesh awarded her with the Harivansh Rai Bachchan Navodit Geetkaar Award in 2015 and Jagadish Gupta Sarjana Award in 2019 for her significant contribution in the field of literature. Sonroopa has a vivid, vibrant and versatile persona. Her love for music and poetry descends from her bloodline . Her Grandfather Pandit Bhoop Ram Sharma was a famous Jan kavi (folk poet) and

her father Dr. Urmilesh Shankhdhar was one of the greatest poets of contemporary hindi literature. He was honoured by Yash Bharti Samman. Sonroopa herself is an acclaimed accomplished poetess and ghazal singer. She has performed at many prestigious events on national and International platforms such as Lal qila mushayara , Sahitya Academy events, events of Indian Society of Authors etc. Internationally she has performed in 24 cities across the USA and Canada in kavi sammelan organised by ' antarrashtriya Hindi Samiti "US". She has also performed in 12 cities across the UK in Kavi Sammelan organized by Indian High Commission UK & ICCR. She is a known face on Indian Television, Literary magazines and Indian newspapers. She is a very famous, elegant and a class apart respected poetess of contemporary Indian literature. She got many accolades and awards by national and International forums, to name a few -
- Kala Shri Award by Adharshila Foundation in Mahahtma Gandhi Foundation Mauritius.
- Udbhav vishisht award by Udabhav sanstha & ICCR given by health minister Shri Ashok Valia.
- Badaun Gaurav Award by honorable Chief Minister Shri Mulayam Singh Yadav in Badaun Mahotsava.
- Badaun Garima Samman by then Chief Minister UP Shri Mulayam Singh Yadav - 2005.
- Vishisht Pratibha Alnkaran by Ministry of Culture, Mauritius - 2012.
- Harivansh Rai Bachhan Yuva Geetkar Samman by Hindi Sansthan ,Government of Uttarpradesh for her 1st collection of Ghazals - Likhna jaroori hai - 2015.
- Ghazal Shiromani Samman by Indian Consulate General Washington and Citation by US Congress -2018.
- Jagdeesh Gupt Sarjana samman by Hindi Sansthan, Government of Uttar Pradesh for her Memoirs & Travelogue America aur 45 din - 2018. More more details visit:
Wikipedia Page: https://en.wikipedia.org/wiki/Sonroopa_Vishal
Official website: http://www.sonroopa.com/

27/04/2026

तुमने तो बस खेल में बोली थी इक बात
सोच-सोच कर काट दी मैंने सारी रात..

इसे गिराने उसे उठाने की जल्दी,सबको है अब राय बनाने की जल्दी।मरने वाले में कुछ साँसें बाक़ी हैं,मत करिये अफ़सोस मनाने की जल...
27/04/2026

इसे गिराने उसे उठाने की जल्दी,
सबको है अब राय बनाने की जल्दी।

मरने वाले में कुछ साँसें बाक़ी हैं,
मत करिये अफ़सोस मनाने की जल्दी।

किसके जीवन में कितना सुख है दुख है,
बेजा है अनुमान लगाने की जल्दी।

कुछ भी हो बस रील बनाने से मतलब,
ऐसी भी क्या व्यूज़ बढ़ाने की जल्दी।

घटनाओं को जस का तस ही रहने दो,
इनमें क्यों कुछ और दिखाने की जल्दी।

🌸 सोनरूपा

{ग़ज़ल तो है ये लेकिन इसमें ग़ज़लियत या शेरियत मत ढूंढिएगा।क्योंकि मैं रख ही नहीं पाई।दरअसल आज के दौर में भी ग़ज़ल सी नाज़ुकी कहाँ}

26/04/2026

जीते जी चुभती रहीं बूढ़ी माँ बन तीर।
चली गयीं तो टांग ली क्यों घर में तस्वीर।।

||क्यों कि मन में ही मन को अधिक खोलते हैं हम||उदासियों को जज़्ब किये रहने की आदत बहुत दुखदाई होती है।जगह नहीं मिलती अपने...
26/04/2026

||क्यों कि मन में ही मन को अधिक खोलते हैं हम||

उदासियों को जज़्ब किये रहने की आदत बहुत दुखदाई होती है।जगह नहीं मिलती अपने ही घर में जहाँ बस आप हो और आपकी उदासी हो।रात का इंतज़ार करना पड़ता है जब आँसू ढुलक पड़ें।
ऐसा नहीं कि कोई न हो जो आपकी उदासी समझ सके।लेकिन तब क्या किया जाए जब मन के महीन हिस्सों की महीन बातें कहने के लिए कोई शब्द ही न मिले।

दरअसल एहसास घटना नहीं होते या कोई क़िस्सा नहीं कि जिन्हें सिलसिलेवार सुना दिया जाए और जी हल्का कर लिया जाये।

जब सोचने में विचारों की बाढ़ हो और लेकिन कहने में मुँह से आवाज़ न निकले और लिखने के लिए शब्दकोष ख़ाली हो तो बस बोतल में सागर के शोर का एहसास होता है।

जब ईश्वर हमारी मेकिंग में भावनाओं का,संवेदनशीलता का अतिरेक कर देते हैं तो उसे संभालने का हुनर भी दे देते हैं।जिसे ये हुनर नहीं आता वो कब इस बेदर्द दुनिया में नुमाईश बन जाता है उसे ख़बर नहीं रहती।
ये जानती हूँ कि मन कह देना ख़ुद को तमाशा बना लेना है।
यूँ भी हमें एक फ्रेम में जड़ दिया जाता है।जहाँ हमें सामान्य रहना है।

जिनके अंदर भावुकता अधिक होती है उनके अंदर प्रेम भी उतना ही अधिक होता है।उस प्रेम के वश वो कई बार बेरहम सच को आँखों से देखकर भी नकारने की असफल कोशिश करते हैं।उड़ेल देना चाहते हैं अपने भीतर के प्यार को उन पर जिन्हें बहुत स्नेह करते हैं वो।चाहे उतने प्रेम की उन्हें चाह हो या नहीं।

जिन भावनाओं की चादर प्रेम के धागों से बुनी गयी हो उन्हें तह बना कर रख लेना उस जुलाहे के लिए कितना पीड़ादायक है जो कितना ख़ुश होता अगर वो चादर किसी ने ओढ़ ली होती।

हमें कितना प्यार मिलता है कितनी नफ़रत भी।स्वार्थी भी टकराते हैं तो निस्वार्थी भी मिलते हैं।ईर्ष्या भी मिलती है तो प्रोत्साहन भी।कहीं प्रेम का सागर तो कहीं सूखा।
इन दो विपरीत स्थितियों को साधते हैं हम।लेकिन कुछ होते हैं जो बस अच्छा-अच्छा व्यक्त करते हैं,दुख भीतर जमा करते रहते हैं।

हम जीवन में मिले सुख का जब उत्सव जी सकते हैं तो जीवन में मिली पीड़ाओं के लिए उदासी ही तो स्वाभाविक भाव है और एकान्त ही तो सबसे बड़ी सहूलियत है।

ये भी सत्य है कि दुःख ने हमेशा मन का हिस्सा अधिक घेरा है।

मेरी हर तस्वीर मुस्कुराती हुई है।जब खोजने बैठती हूँ कोई तस्वीर उदास वक़्त की तो मिलती ही नहीं।क्योंकि ऐसे पलों की कोई तस्वीर मैं लेती कहाँ हूँ।

कितना पराया व्यवहार है मेरा मेरी इन भावनाओं के लिए।इनको दर्ज ही नहीं करती मैं।न तस्वीरों में,न लिखकर।लेकिन मन में मन को ख़ूब खोलती हूँ मैं।

मैंने ख़ुद ही तो एक तस्वीर बनाई है अपनी जिसका आधा हिस्सा दुनिया देख रही है जिसे वो पूरा समझती है।लेकिन वो आधा ही हिस्सा है पूरा हिस्सा मेरे पास है।
फूलों की घाटियों सा जीवन चाहने वाली लड़की फूलों की ही तो बात करेगी।वही करती हूँ मैं।
'ईश्वर ने सब कुछ तय किया है तो ख़ुश रहो तुम' ये सोच रखने वाली लड़की सुकून से मुस्कुरायेगी ही तो। मुस्कुराती हूँ मैं ।

लेकिन क्या ऐसा है ?
न,नहीं है।

ये दुनिया वैसी नहीं है जैसी मेरी दुनिया है।

कब होगी ये दुनिया केदारनाथ सिंह की इस कविता की तरह-

उसका हाथ
अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा
दुनिया को
हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए.

और फिर उसी उदास शाम को कोई ग़ज़ल याद आ जाये जो आपके मन की हालत का तजुर्मा हो और महीनों से पुराने पत्तों से हरे एक पौधे में एक नाज़ुक सा नया पत्ता दिखाई दे तो मुस्कुरा कर मन कह उठता है-

कि हाँ
दुनिया है अभी जीने लायक।

~सोनरूपा
अप्रेल
🍁

25/04/2026

पास रहे तो दूर थे, दूर रहे तो पास.

24/04/2026

वक़्त का एक नाम और भी है
लोग मरहम भी इसको कहते हैं


दिल से निकली पुकार होती हैंज्ञान की सूत्रधार होती हैंमन की धरती न सूखने देतींपुस्तकें तो बहार होती हैं~ सोनरूपा  |  विश्...
23/04/2026

दिल से निकली पुकार होती हैं
ज्ञान की सूत्रधार होती हैं
मन की धरती न सूखने देतीं
पुस्तकें तो बहार होती हैं

~ सोनरूपा | विश्व पुस्तक दिवस की बधाई..

मैं हूँ मालन अलबेली ❤️
23/04/2026

मैं हूँ मालन अलबेली ❤️

22/04/2026

चवन्नी और अठन्नी भी मैं अब लॉकर में रखती हूँ
अशरफ़ी हैं ये बचपन की इन्हें महफ़ूज़ रखना है

इन्नू सी ख़ुशी
💝

मन स्वाधीन करो अबलोगों मन स्वाधीन करो।धर्मों की शिक्षाओं को विकृत करके पढ़ते होपढ़कर रोज़ कई आचार संहिताएँ गढ़ते होइसीलिए नि...
21/04/2026

मन स्वाधीन करो अब
लोगों मन स्वाधीन करो।

धर्मों की शिक्षाओं को विकृत करके पढ़ते हो
पढ़कर रोज़ कई आचार संहिताएँ गढ़ते हो
इसीलिए निष्काषित लगती आज बुद्धिमत्ता है
मन पर ज़िद्दी दुराग्रहों की जो क़ाबिज़ सत्ता है

ऐसा वर्तमान अविवेकी
अब प्राचीन करो।
मन स्वाधीन करो अब
लोगों मन स्वाधीन करो।

आत्मचेतना का सूरज यदि एक बार उग जाए
क्षुद्र मानसिकता का तम फिर कभी नहीं भरमाये
मुक्त गगन का पंछी होकर ख़ुद ही जाल बुना है
प्रेम कूक को छोड़ हमेशा कर्कश शोर सुना है

मन के उजियारे से
ये अँधियारा क्षीण करो।
मन स्वाधीन करो लोगों
अब मन स्वाधीन करो।

वो जैसा करते हैं यदि वैसा करते जाओगे
ख़ुद के भीतर ही ख़ुद को तुम ढूँढ़ नहीं पाओगे
एक 'तंत्र' में रह कर यदि 'स्व' का तुम ध्यान रखोगे
चाँद और सूरज से अनुशासित उद्धरण बनोगे

सुंदर जीवन के कोरे
पन्ने रंगीन करो।
मन स्वाधीन करो अब
लोगों मन स्वधीन करो।



#पिछले_बरस_का_गुलमोहर

20/04/2026

रिश्तों की भीड़ में भी वो तन्हा खड़ा रहा
नदियाँ थीं उसके पास वो प्यासा खड़ा रहा

पापा की सुप्रसिद्ध ग़ज़ल मेरी आवाज़ में 🌼

19/04/2026

नफ़रतों को उड़ान देते हैं
जब वो कोई बयान देते हैं

जिनपे विश्वास हम नहीं करते
वो भी हमको ज़बान देते हैं

कितनी आँखों को अपनी मर्ज़ी से
रौशनी हुक्मरान देते हैं

पाठ पढ़ते हैं ज़िन्दगी का हम
मौत का इम्तिहान देते हैं

ख्वाहिशों की कई पतंगों को
ख़्वाब ही आसमान देते हैं

हमको लगता नहीं है अब ऐसा
आप हम पर भी ध्यान देते हैं

Address

'Naman', Professors Colony , Opp. Rajmahal Garden , Badaun (U. P. )
Budaun
253601

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