09/08/2026
# **महामृत्युंजय **
गीतकार: सुभाष नगरीया
**Style:** Indian Classical Devotional • Dhrupad-inspired • Sanskrit–Hindi Fusion
**Raga:** Bhairav → Bhairavi
**Tala:** विलंबित झपताल → मध्यलय तीनताल
**Vocals:** Deep Baritone Male • Temple Choir
**Instrumentation:** Pakhawaj, Rudra Veena, Bansuri, Sarangi, Tanpura, Temple Bells, Frame Drum
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# # # **[आलाप – गहरा पुरुष स्वर]**
ॐ............
अनंत शून्य में
एक नाद जागे...
शिव... शिव... शिव...
काल के पार जो ज्योति जले,
वही अमर प्रकाश है...
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# # # **[मंत्र – विलंबित, गंभीर]**
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ........
ॐ नमः शिवाय...
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# # # **[अंतरा 1 – हिंदी]**
हे नीलकंठ, हे त्रिनयन,
तेरी शरण में मन मेरा।
अंधकार के इस वन में,
तू ही दीपक, तू ही सवेरा।
टूटे हुए विश्वासों को,
अपनी कृपा से जोड़ दे।
भय के सारे बंधन काट,
जीवन को अमृत मोड़ दे।
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# # # **[मुखड़ा – पुरुष स्वर + कोरस]**
मृत्यु के भय से मुक्त कर,
हे शिव, मुझे प्रकाश दे।
बंधन सारे खोल दे,
जीवन को अपना आकाश दे।
**ॐ नमः शिवाय...
ॐ नमः शिवाय...**
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# # # **[मंत्र – पखावज प्रवेश]**
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
**हर हर महादेव!
हर हर महादेव!**
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# # # **[अंतरा 2 – भावपूर्ण]**
श्वासों में तेरी ध्वनि रहे,
नयनों में तेरा रूप।
मन के भीतर तू ही तू,
तू ही मेरा सत्य अनूप।
जो कुछ मेरा, तुझको अर्पण,
जो कुछ शेष, वह भी तेरा।
जन्म-मरण के इस सागर में,
शिव ही मेरा एक बसेरा।
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# # # **[तराना-सदृश शास्त्रीय अंश]**
ना... ना... ना...
रे ग म... ग रे सा...
शिव... शिव... शिव...
ॐ त्र्यम्बकं...
**हर हर हर महादेव!**
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# # # **[चरम भाग – तीनताल]**
जाग उठे भीतर की ज्योति,
मिट जाए मन का अंधकार।
शिव की शक्ति साथ हो जब,
कौन करे फिर मृत्यु से डर?
तन मिट जाए, मन मिट जाए,
मिट जाए हर अहंकार।
जो शिव में स्वयं को खो दे,
पाता है अमृत का द्वार।
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# # # **[Final Mantra – विशाल कोरस]**
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ नमः शिवाय...
ॐ नमः शिवाय...
ॐ नमः शिवाय...
**हर हर महादेव!**
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# # # **[Outro – धीमा आलाप]**
ॐ..........
शिवोऽहम्...
शिवोऽहम्...
शिवोऽहम्...
**ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥**