05/03/2026
भक्त की भक्ति को तोला नहीं जा सकता है, पर महसूस ज़रूर किया जा सकता है। श्री राम के प्रति भक्ति, सम्मान एवं प्रेम को दर्शाते हुए अनेक लोग रामायण की महागाथा में दिखाई देते हैं।
एक तरफ़ केवट भैया ने श्री राम के चरण धोकर चरणामृत ग्रहण कर श्री राम को देव स्वरूप माना, तो दूसरी ओर माता शबरी ने एक माँ के भाँति प्रेम से श्री राम को मीठे बेर खिलाए।
एक ओर निषादराज ने एक सच्चे मित्र के समान अपना सम्पूर्ण राज्य श्री राम के चरणों में रखने की इच्छा प्रकट की, तो दूसरी ओर श्री जटायु ने माता सीता को बचाते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
प्रतीक्षा से लेकर बलिदान तक, भक्ति से लेकर समर्पण तक, श्री राम इन सभी के लिए सरलता, करुणा एवं प्रेम के प्रतीक हैं।
इसीलिए कहा जाता है प्रभु श्री राम को पाने के लिए न शक्ति चाहिए, न वैभव बस एक सच्चा हृदय चाहिए, जो प्रेम और भक्ति से भरा हो।
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