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29/01/2026

कुछ पन्ने क्या फटे इतिहास के ,,जमाने ने समझा ओड का दोर ही ख़त्म हो गया !! ाजपूत_जाति_की_उत्पत्ति #शेयर_कीजिये

ओड समाज की इतिहास की कुछ पुस्तके
29/01/2026

ओड समाज की इतिहास की कुछ पुस्तके

29/01/2026

ाजपूत_जाति_की_उत्पत्ति ।।

इस जाति की उत्पत्ति सूर्यवंशी राजा सगर के वंशज राजा ओड से है। ऐतिहासिक ग्रंथों एवं प्राचीन पौराणिक ग्रंथों के अनुसार राजा ओड ने दक्षिण दिशा में ओड देश की स्थापना करके राज्य किया गया था और तभी से राजा ओड की जाति संतानओड राजपूत के नाम से विख्यात हुई।

ओड देश का यह राज्य वर्तमान में ओडिशा राज्य के नाम से विख्यात है। सूर्यवंशी राजा ओड सगरवंशी थे और इसी वंश में राजा सगर के वंशजों के उद्धार के लिए राजा भागीरथ द्वारा गंगा मां को धरती पर अवतरण करने व् अपने पूर्वजों को श्राप से मुक्त कराने के कारण इस जाति के लोग भागीरथ वंशी ओड राजपूत के नाम से जाने गये।। पाठकगण कपिल मुनि के शाप से भस्म हुए राजा सगर के वंशजों की कहानी से भली-भांति अवगत होंगे। यह वंश काफी प्राचीन है और पूरे भारतवर्ष में फैला हुआ है।

google सर्चिंग साइट की wikipedia के अनुसार सूर्यवंशी राजा भागीरथ के वंशज राजा ओड ने अपने नाम से ओड राज्य की स्थापना की थी जो कालांतर में ओड, ओड्र, ओड़ व् आद्र राज्य के नाम से विख्यात हुई।वंश की 3 शाखाएं हैं जो निम्नवत है।महाभारत युद्ध के पश्चात भागीरथ वंशी ओड राजपूत की शाखा गंगा वंश के नाम से प्रसिद्ध हुई ।
राजा भागीरथ द्वारा अपने पूर्वजों के उद्धार हेतु गंगा मां को पृथ्वी पर अवतरण करने के कारण ओड राजपूत की यह शाखा गंगा वंशी राजपूत के नाम से प्रसिद्ध हुई।
इस वंश के अंतिम राजा भीम अनंग देव ने ओड राज्य में राजा ओड द्वारा निर्मित जगन्नाथ जी भगवान के मंदिर को बहुत बड़े भूभाग में पूर्ण भव्यता के साथ निर्मित कराया गया। इस मंदिर के बारे में पाठकों को बता दें कि रामायण के उत्तराखंड में भगवान श्रीराम ने विभीषण को भगवान जगन्नाथ जी को इक्ष्वाकु वंश का कुल देवता बताया है।
पुराणों में जगन्नाथ जी भगवान का मंदिर ओड राज्य में स्थित होना बताया गया है। ओड राज्य में गंगा वंशी राजाओं का राज्य 15वी शताब्दी तक मिलता है।
राजा भीम अनंग देव के पश्चातओड राज्य ओडिशा पर मुगल शासकों का आधिपत्य होना इतिहास है लिखा हुआ मिलता है। ओड देश ओडिशा पर मुगल शासकों का अधिपत्य हो जाने के पश्चातओड राजपूतों द्वारा ओड राज्य ओडिशा को छोड़कर राजस्थान के लिए प्रस्थान किया गया इसका वर्णन हम आगे अध्याय में प्रस्तुत करते हैं।
ओड देश ओडिशा पर मुगल शासकों का राज्य स्थापित हो जाने के पश्चातओड राजपूतों के द्वारा ओड देश ओडिसा राज्य को त्यागकर राजस्थान के लिए प्रस्थान किया गया और तब राजस्थान के कुंभलगढ़ परगने में ओडा गांव की स्थापना ओड राजपूतों के द्वारा की गई और तब ओड राजपूत गहलोत वंश की शाखा के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
मेवाड़ के अनेक राजाओं के साथ ओड राजपूतों का युद्ध में प्रतिभाग करना पाया गया है।
मेवाड़ के राणा महाराणा प्रताप के समय में महाराणा के साथ लाखों की संख्या में ओड राजपूत उनके साथ युद्ध करते थे। इतिहास मैं मेवाड़ के राणा महाराणा प्रताप के साथ ओड राजपूत सैनिक पिंड बनाकर मुगलों से युद्ध किया करते थे।
इनके इस प्रकार युद्ध करने के कारण ओड राजपूत की शाखा पिंडारा प्रसिद्ध हुई। महाराणा प्रताप के बाद राणा राजसिंह जब मेवाड़ की गद्दी पर बैठे तब राणा प्रताप के बाद राणा राजसिंह ही एक ऐसे राजा हुए जिन्होंने मुगलों से डटकर युद्ध किया। ऐतिहासिक ग्रंथों में लिखा है कि राणा राजसिंह का निधन कुंभलगढ़ के गांव ओड़ा में हुआ। ओड राजपूतों की शाखा पिंडारा का वर्णन हम अगले अध्याय में करेंगे।ओड राज्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन है।
इतिहास में इस वंश की तीन शाखाओं का वर्णन मिलता है। 1 गंगा वंश 2 पिंडारा 3 ओड । ओड राजपूत की इन तीनों शाखाओं का वर्णन इतिहास व ग्रंथों मैं मिलता है। राजा ओड के राज्य का वर्णन महाभारत काल के समय मैं भी मिलता है ।
महाभारत के समय में भारत वर्ष के समस्त राजाओं की बुलाई गई बैठक मैं राजा ओड की उपस्थिति ओड राजवंश की उपस्थित एवं उन्नति को दर्शाती है। इतिहास एवं पौराणिक ग्रंथों के अनुसार महाभारत युद्ध के पश्चात राजपूतों के बहुत सारे वंशों की समाप्ति का भी उल्लेख मिलता है। महाभारत का युद्ध इतना भयंकर था कि इसमें अनेकों राजवंशों को हानि उठानी पड़ी थी और कई सारे राज वंश इस युद्ध के पश्चात विलुप्त होने के कगार पर आ गए थे।

जय महाराणा ।।
जय ओड राजपुताना ।।
जय राजा भागीरथ ।।

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