02/06/2026
🙏❤️पूज्य श्री गुरुदेव महाराज की अमृत वाणी ❤️🙏
आज गुरुदेव ने सबको बुलाया था कृपा करके सौभरी कुंड से लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर, यमुना रसरानी के तट पर महाराज जी का आसन लगा हुआ था। विरक्त तथा गृहस्थ वहाँ नीचे बैठकर उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। थोड़ी ही देर में “राधा वल्लभ श्री हरिवंश” " राधा वल्लभ श्री हरिवंश" के जयघोष के साथ महाराज जी का शुभ आगमन हुआ। सभी ने बैठकर उनके श्रीमुख से सत्संग का लाभ लिया। महाराज जी ने कहा:“शरीर साथ दे या न दे, कोई बात नहीं, पर मन कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। हम बस इसी बात पर जोर दे रहे हैं। इसलिए अब हमें एकांत चाहिए, जिससे हम श्रीजी में मन लगा सकें। हमारा यह भीड़ वाला स्वभाव नहीं रहा, हमारा एकांत जंगली स्वभाव रहा और अब हम उसी तरफ लौटना चाहते हैं क्योंकि रोज डायलिसिस हो रहा है, कुछ कह नहीं सकते हमें अपना अंतिम संभालना है। इस शरीर में कोई दम नहीं है, श्रीजी की कृपा से चल रहा है। पर एक बात ध्यान रखिए- जैसे एक बच्चा अपनी माँ के बिना और माँ अपने बच्चे के बिना नहीं रह सकती, ठीक उसी तरह हम आपके बिना और आप हमारे बिना नहीं रह सकते। हमारे मन में क्या चलता है अब हम क्या बताएं नीचे से देखने पर हम वो नहीं देख पाते जो देखना चाहिए और फिर दोष दर्शन हो जाता है इससे बचना चाहिए इसलिए सार बात सिर्फ यही है कि खूब भजन करो। आगे हम किसी को शिष्य नहीं बनाएंगे, क्योंकि जितने बन गए उतनों का उद्धार हो जाये तो बड़ी बात है शिष्य बनाने पर गुरु का तप खर्च होता है। शिष्य की हर बात गुरु तक आती है। आज हम कह रहे थे -पूरा जीवन जिस चीज से बचते हुए आए, वो अब अंत में आकर सामने खड़ी हो गई है। यही भगवान की लीला है।हमारा कभी यह स्वभाव नहीं रहा, इसलिए अब हम अपनी पुरानी गंगा किनारे वाली दिनचर्या में लौटना चाहते हैं।आप लोग सहयोग कीजिए। यह एकांत आप सबके लिए है- जो शिष्य हैं, शरणागत हैं, जो श्रद्धा रखते हैं, सभी भारतवासियों के लिए है। अगर आप हमें प्रसन्न रखना चाहते हैं तो हमारा सहयोग कीजिए। ध्यान रखिए, हम कहीं नहीं जा रहे हैं हम आपके मन में हमेशा हैं। केलिकुंज से जुड़े रहिए और अपने भरण पोषण की चिंता मत कीजिए क्योंकि हमारा भरण पोषण हमसे नहीं श्रीजी से हो रहा है इसलिए जो साधन व दिनचर्या आपको दी गई है, उसका निष्ठापूर्वक पालन कीजिए। हमारा जब मन होगा, तब आपको अपने पास बुला लेंगे, जैसे आज बुलाया और कभी हम स्वयं आपके पास आ जाएंगे। अब कोई प्रश्न नहीं,कोई बात नहीं। लगभग १५-२० हजार प्रश्नों का उत्तर दिया है। ऐसा कोई प्रश्न नहीं जिसका उत्तर न दिया हो। सार बात इतनी ही है -श्रीजी से अपनापन सुदृढ़ करते हुए खूब भजन करो,खूब सेवा करो। श्रीजी साधना से नहीं, अपनेपन से मिलती हैं।” अब हम जाएं? सभी ने एक स्वर में कहा-जी गुरुदेव। जाते समय गुरुदेव भगवान ने ऊपर टीले पर खड़े होकर शरणागतों पर कृपा बरसाई। तत्पश्चात् वे श्री हरिवंश की पताका वाली नाव में बैठकर यमुना पार चले गए। Comment मुझे जरूर बताएं आपको सुनकर और पढ़कर कैसा लगा...राधे राधे श्री हरिवंश 🙌🙏
यमुना तीर वृंदावन