22/07/2022
"काले बादल"
कभी - कभी यूं भी होता है कि
खूब ज़ोर से उमड़ - उमड़ के लहराकर
काले बादल आते हैं और तेज़ हवाएं चलती हैं
कड़क - कड़क के बिजली भी
रूह ठिठोरे देती है
लगता है कि जैसे आंधी होगी, तूफ़ान होगा
पर फिर होता कुछ भी नहीं
कभी - कभी ऐसा तब भी होता है
जब कोई अनचाही बात दिल में घर कर जाती है
काले बादल मन को घेरे रहते हैं
तेज़ हवाएं सीने में लहराती हैं
और ख़ून उबालें लेता है
लगता है कि जैसे फूट पड़ेगा आंखों से सब
पर फिर होता कुछ भी नहीं
क्या बादल पानी भूल गए थे?
या बात चुभी और खतम हुई?
पता करो भाई पता करो!
जो थोड़ी बारिश हो जाए
और थोड़े आसूं छलक पड़ें
तो शाम सुहानी हो जाए
और मन को राहत मिल पाए।
- कातिब