31/12/2025
हल्क और सरपंच की चालकी 😮| ARJUN SYT |
हुल्क: सरपंच ने माँ का खेत छीन लिया, आज ही घर तोड़ने आ रहा है!
माँ: बेटा, जमीन गई तो चलेगा, तू जान बचा ले, ये लोग खतरनाक हैं।
सरपंच: हुल्क, कानून मेरे हाथ में है, शाम तक खाली कर देना!
हुल्क: ये जमीन मेरी माँ की सांस है, हाथ लगाया तो अंजाम बुरा होगा!
सरपंच: अंजाम? तेरे जैसे कई देखे हैं, झुकते सब हैं!
माँ: बेटा, गुस्सा मत कर, हमें कहीं और चलना होगा।
हुल्क: नहीं माँ, आज झुकेंगे तो उम्र भर कुचले जाएंगे!
सरपंच: पंचायत का फैसला है, तेरी औकात नहीं लड़ने की!
हुल्क: औकात मेहनत से बनती है, डर से नहीं!
माँ: बेटा, अकेला है तू, सब डरते हैं उससे।
हुल्क: अकेला नहीं हूँ माँ, सच मेरे साथ है!
सरपंच: सच? सच वही जो मैं कहूँ!
हुल्क: तो आज सच बोलेगा पूरा गाँव!
सरपंच: हिम्मत है तो शाम तक रोक के दिखा!
हुल्क: हिम्मत नहीं, इरादा है—और इरादा टूटता नहीं!
माँ: बेटा, खून-खराबा मत करना।
हुल्क: माँ, आज आवाज़ नहीं उठाई तो कल साँस भी नहीं मिलेगी!
सरपंच: मशीनें आ रही हैं, आख़िरी मौका है!
हुल्क: मशीन रुकेगी, अन्याय आज यहीं गिरेगा!
हुल्क: दोस्तों, मुझे आपकी ज़रूरत है, आज नहीं तो कभी नहीं!
हुल्क: खेत बचाना है, माँ का मान बचाना है, साथ हो तो आगे आओ!
गाँव की आवाज़: हुल्क, हम तेरे साथ हैं!
सरपंच: ये बगावत है!
हुल्क: ये इंसाफ़ है, और इंसाफ़ से बड़ा कोई डर नहीं!
माँ: बेटा, तू जीत गया, गाँव जाग गया!
सरपंच: आज बच गए, मगर…
हुल्क: मगर कुछ नहीं, अब गाँव झुकेगा नहीं!
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