CACD

CACD Creative Art & Culture Development Society

कलामंच   में आज गजल, गाने,कविता लेखक एवं स्क्रिप्ट राइटर, सुभाष पाठक जियाजी से खास बातचीतसुभाष जी की उर्दू में विशेषज्ञत...
08/06/2023

कलामंच में आज गजल, गाने,कविता लेखक एवं स्क्रिप्ट राइटर, सुभाष पाठक जियाजी से खास बातचीत

सुभाष जी की उर्दू में विशेषज्ञता है आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

कलामंच में आज गजल, गाने,कविता लेखक एवं स्क्रिप्ट राइटर, सुभाष पाठक जियाजी से खास बातचीतसुभाष जी की उर्दू में व.....

जनजातीय जीवन, देशज ज्ञान परम्परा एवं सौन्दर्यबोध पर एकाग्रमध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालयस्थापना के दसवें वर्ष का समारोह6 स...
05/06/2023

जनजातीय जीवन, देशज ज्ञान परम्परा एवं सौन्दर्यबोध पर एकाग्र

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय

स्थापना के दसवें वर्ष का समारोह

6 से 10 जून, 2023
सायं 7.00 बजे से श्यामला हिल्स, भोपाल

Usha Thakur

काशीराज काली मंदिर, वाराणसीकाशी में ऐसे कई मंदिर हैं जिन्हें ना तो इतिहासकारों ने पुस्तकों में जगह दी ना ही लोगों ने अपन...
04/06/2023

काशीराज काली मंदिर, वाराणसी

काशी में ऐसे कई मंदिर हैं जिन्हें ना तो इतिहासकारों ने पुस्तकों में जगह दी ना ही लोगों ने अपने हृदय में .. यह है काशीराज काली मंदिर, इसके प्रत्येक स्तंभ को बनाने में छः-छः महीने लगे थे । इसका निर्माण काशी नरेश श्री नरनारायण की पत्नी ने करवाया था । इस मंदिर के पिछले हिस्से में एक दरवाजा है जिसकी नक्काशियों को देखकर उसे लकड़ी का दरवाजा मान बैठेंगे लेकिन वह वास्तव में पत्थर का बना है ।

चंदेरी, वर्तमान में बुन्देलखंडी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिए चन्देरी काफी चर्चित है। यह प्राचीन जैन मंदिरों ...
02/06/2023

चंदेरी, वर्तमान में बुन्देलखंडी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिए चन्देरी काफी चर्चित है। यह प्राचीन जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

इस ऐतिहासिक नगर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। 11 वीं शताब्दी में यह नगर एक महत्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख...

कुछ खास है जिंदगी में 5 रुपए में भरपेट भोजन, इस महंगाई के दौर में हजारों लोगों का पेट भरने का बेड़ा उठाया है उत्कर्षणी र...
02/06/2023

कुछ खास है जिंदगी में
5 रुपए में भरपेट भोजन, इस महंगाई के दौर में हजारों लोगों का पेट भरने का बेड़ा उठाया है उत्कर्षणी रसोई खाना की संचालिका एवं वरिष्ठ समाजसेवी बिंदु घाटपाण्डे

एक खास मुलाकात श्रीमती घाटपाण्डे से, ​जानिए कैसे करती हैं वे इतना कठिन काम

कुछ खास है जिंदगी में 5 रुपए में भरपेट भोजन, इस महंगाई के दौर में हजारों लोगों का पेट भरने का बेड़ा उठाया है उत्कर्षण....

01/06/2023

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव

एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने बनाया था? भगवान शिव का प्राचीन मंदिर।मुस्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लि...
29/05/2023

एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने बनाया था?
भगवान शिव का प्राचीन मंदिर।

मुस्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लिए गोले तक दागे, लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल के बीहड़ों में बना सिहोनिया का ककनमठ मंदिर आज भी लटकते हुए पत्थरों से बना हुआ है।

चंबल के बीहड़ में बना ये मंदिर 10 किलोमीटर दूर से ही दिखाई देता है. जैसे-जैसे इस मंदिर के नजदीक जाते हैं इसका एक एक पत्थर लटकते हुए भी दिखाई देने लगता है. जितना नजदीक जाएंगे मन में उतनी ही दहशत लगने लगती है. लेकिन किसी की मजाल है, जो इसके लटकते हुए पत्थरों को भी हिला सके. आस-पास बने कई छोटे-छोटे मंदिर नष्ट हो गए हैं, लेकिन इस मंदिर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. मंदिर के बारे में कमाल की बात तो यह है कि जिन पत्थरों से यह मंदिर बना है, आस-पास के इलाके में ये पत्थर नहीं मिलता है.

इस मंदिर को लेकर कई तरह की किवदंतियां हैं. पूरे अंचल में एक किवदंती सबसे ज्यादा मशहूर है कि मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था. लेकिन मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग विराजमान है, जिसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि भगवान शिव का एक नाम भूतनाथ भी है.
भोलेनाथ ना सिर्फ देवी-देवताओं और इंसानों के भगवान हैं बल्कि उनको भूत-प्रेत व दानव भी भगवान मानकर पूजते हैं. पुराणों में लिखा है कि भगवान शिव की शादी में देवी-देवताओं के अलावा भूत-प्रेत भी बाराती बनकर आए थे और इस मंदिर का निर्माण भी भूतों ने किया है.

कहा जाता है कि रात में यहां वो नजारा दिखता है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी. ककनमठ मंदिर का इतिहास करीब एक हज़ार साल हजार पुराना है. बेजोड़ स्थापत्य कला का उदाहरण ये मंदिर पत्थरों को एक दूसरे से सटा कर बनाया गया है. मंदिर का संतुलन पत्थरों पर इस तरह बना है कि बड़े-बड़े तूफान और आंधी भी इसे हिला नहीं पाई.

कुछ लोग यह मानते हैं कि कोई चमत्कारिक अदृश्य शक्ति है जो मंदिर की रक्षा करती है. इस मंदिर के बीचो बीच शिव लिंग स्थापित है. 120 फीट ऊंचे इस मंदिर का उपरी सिरा और गर्भ गृह सैकड़ों साल बाद भी सुरक्षित है.

इस मंदिर को देखने में लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है.. लेकिन ककनमठ मंदिर सैकडों सालों से इसी तरह टिका हुआ है यह एक अदभुत करिश्मा है. इसकी एक औऱ ये विशेषता है..कि इस मंदिर के आस पास के सभी मंदिर टूट गए हैं , लेकिन ककनमठ मंदिर आज भी सुरक्षित है. मुरैना में स्थित ककनमठ मंदिर पर्यटकों के लिए विशेष स्थल है. यहां की कला और मंदिर की बड़ी-बड़ी शिलाओं को देख कर पर्यटक भी इस मंदिर की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाते. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की प्रतिमायें पर्यटकों को खजुराहो की याद दिलाती हैं. मगर प्रशासन की उपेक्षा के चलते पर्यटक यदा-कदा यहां आ तो जाते है।

संगीत का स्वरूप अब आधुनिक हो चुका है, लेकिन इसकी असली परिभाषा कभी भी नहीं बदली जा सकती। कलामंच@cacd में संगीत साधक और तब...
25/05/2023

संगीत का स्वरूप अब आधुनिक हो चुका है, लेकिन इसकी असली परिभाषा कभी भी नहीं बदली जा सकती। कलामंच@cacd में संगीत साधक और तबला वादक इंजीनियर चंद्रहास पिम्पलखरे से खास बातचीत

https://youtu.be/51NESh_8LAg

संगीत का स्वरूप अब आधुनिक हो चुका है, लेकिन इसकी असली परिभाषा कभी भी नहीं बदली जा सकती। कलामंच में संगीत साधक और तबल...

बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का  #जगन्नाथ मंदिर ।क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धू...
24/05/2023

बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का #जगन्नाथ मंदिर ।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए

ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा

यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य

यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -

ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है

अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है

वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर की प्राचीनता व छत टपकने के रहस्य के बारे में मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुरातत्व विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक कई दफा आए लेकिन इसके रहस्य को नहीं जान पाए हैं अभी तक बस इतना पता चल पाया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य 11वीं सदी में किया गया

मंदिर की बनावट बौद्ध मठ की तरह है। इसकी दिवारें 14 फीट मोटी हैं जिससे इसके सम्राट अशोक के शासन काल में बनाए जाने के अनुमान लगाए जा रहे हैं वहीं मंदिर के बाहर मोर का निशान व चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के कार्यकाल में बने होने के कयास भी लगाए जाते हैं लेकिन इसके निर्माण का ठीक-ठीक अनुमान अभी नहीं लग पाया है

भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर अति प्राचीन है मंदिर में भगवान जगन्नाथ बलदाऊ व सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों की मूर्तियां विराजमान हैं प्रांगण में सूर्यदेव और पद्मनाभम की मूर्तियां भी हैं जगन्नाथ पुरी की तरह यहां भी स्थानीय लोगों द्वारा भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है लोगों की आस्था मंदिर के साथ गहरे से जुड़ी है लोग दर्शन करने के लिए आते रहते हैं।

क्या आपको एक ऐसी अखंड चट्टान के बारे में कोई जानकारी है जो भारत की सबसे पुरानी रॉक कट वास्तुकला और अशोकन रॉक कट शिलालेखो...
24/05/2023

क्या आपको एक ऐसी अखंड चट्टान के बारे में कोई जानकारी है जो भारत की सबसे पुरानी रॉक कट वास्तुकला और अशोकन रॉक कट शिलालेखों को भी समायोजित करती है ?

भुवनेश्वर (ओडिशा, भारत) के पास धौली पहाड़ी की तलहटी में, कोई भी व्यक्ति अशोक के चट्टानों को काटकर बनाए गए शिलालेख और एक विशाल चट्टान से कुशलता से गढ़ी गई हाथी के अग्रभाग को देख सकता है। ऐसा लगता है जैसे एक हाथी अपनी गुफा से बाहर आ रहा है और कई लोगों की राय है कि यह ओडिशा में बौद्ध धर्म के प्रवेश का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व दर्शाता है। यह 261 ईसा पूर्व की है और इसे आमतौर पर भारत की सबसे पुरानी रॉक कट वास्तुकला के रूप में जाना जाता है।

सुचिन्द्रम मंदिर, कन्याकुमारीक्या आप विश्वास करेंगे अगर मैं कहूँ कि, इस मंदिर की (सुचिन्द्रम मंदिर, कन्याकुमारी)प्रत्येक...
23/05/2023

सुचिन्द्रम मंदिर, कन्याकुमारी

क्या आप विश्वास करेंगे अगर मैं कहूँ कि, इस मंदिर की (सुचिन्द्रम मंदिर, कन्याकुमारी)प्रत्येक नक्काशी दुनियाँ के सभी अजूबों को हराने के लिए पर्याप्त हैं !

इस मंदिर में अनुमानतः एक लाख नक्काशियाँ हैं और प्रत्येक नक्काशी अपने-आप में अद्वितीय है । आज के समय में इस मंदिर में बनी एक-एक नक्काशी को बनाने में एक-एक महीने से अधिक का समय लग सकता है । लेकिन करीब 1100 वर्ष पूर्व निर्मित इस सम्पूर्ण मंदिर को बनाने में हमारे पूर्वजों ने आधुनिक संसाधनों के बगैर भी बहुत ही अल्प समय लिया था…!! (कभी इसी स्थान पर बसे घने जंगलों में, महर्षि अत्रि अपनी पत्नी अनुसुइया के साथ निवास करते थे !)

भारतेन्दु नाट्य अकादमीलखनऊमंच सामग्री कार्यशालास्थान: भारतेन्दु नाट्य अकादमीदिनांक : 23 मई 2023समय : दोपहर 3 बजे
22/05/2023

भारतेन्दु नाट्य अकादमी
लखनऊ

मंच सामग्री कार्यशाला

स्थान: भारतेन्दु नाट्य अकादमी
दिनांक : 23 मई 2023
समय : दोपहर 3 बजे

Address

10 No. Market
Bhopal

Telephone

+919300682719

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when CACD posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to CACD:

Share