Abhinav

Abhinav Kuchh dil ki bate h.. bs logon tak pahuchani h..

26/01/2026

ख़्वाब
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ना साम्प्रदायिकता की आग हो,
ना नफरत का धुँवा,
ना धर्मों के बीच कलह को सुलगाये,
आओ आज ऐसा गणतंत्र दिवस मनाये।

ना किसी भूखे बच्चे की आंखों में बरसात हो,
ना ऐसी हवा हो, की कुरूतियों में लिप्त हर सांस हो,
चलो थोड़ा सुधारे हम खुद को,
अन्याय से लड़ने हम सब हाथ मिलाये,
आओ आज ऐसा गणतंत्र दिवस मनाये।

भ्रस्टाचार के वृक्ष को जड़ से काटें,
खत्म कर दें उन संभावनाओ को,जो इंसान को इंसान से बांटे,
धर्म-जाति वर्ण-लिंग के भेद को मिटाये,
आओ आज ऐसा गणतंत्र दिवस मनाये।

सत्ता को खेल समझने वालों के हाथों से छीने बागडोर,
जनता को अपने हक़ के लिए न करनी पड़े दर दर भाग दौड़,
जन जन के मन को चलो आज जगाये,
आओ आज ऐसा गणतंत्र दिवस मनाये।

देश प्रगति की रौशनी में और बढ़े,
चलो थोड़ा कर प्रयास एक स्वच्छ वतन हम गढ़े,
आओ मिलकर ऐसा अभिनव भारत बनाये,
आओ आज ऐसा गणतंत्र दिवस मनाये।
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,
आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।।

26/04/2025

"युद्ध हो अंतिम विकल्प, जब शांति का कोई मार्ग न हो",
ये कृष्णा ने समझाया था।
कई मौके दिए शत्रु को, कई बार धर्म क्या है! ये पापियों को भी बतलाया था।
जब अहंकारी अधर्मी समझे नहीं,
जब जब अधर्म का उत्थान किया।
कृष्ण ने तब तब रचा महाभारत,
तब तब अर्जुन ने गांडीव में ब्रह्मास्त्र संधान किया।

पड़ोसी हो या स्वजन _भाई, जिसने अधर्म का साथ दिया
सबको नर्क पहुंचाया था।
दुशासन के छाती के लहू से भीम ने द्रोपदी के अपमानित केशो को धुलवाया था।

आज भी वही समय लगता है वापस लाना होगा,
भारतीय सेना के सारे अर्जुनों सारे भीमों को जगाना होगा।

जिनको पता नहीं है खुद के कर्म का वो आज धर्म की बाते करते हैं,
कर नरसंहार मासूमों का कायरता की गहराइयों में उतरते हैं।
अधर्मी निर्लज्ज कपटी भीरू शत्रु , जो कई द्वंद युद्ध हमसे है हार गया।
निशस्त्र निरीह जनता को चुपके से आ कर धर्म के नाम पर मार गया।

ऐसे कायर शैतानों के आकाओं को अब सेना की ललकार जरूरी है,
भर गया पाप का घड़ा जिनका अब उनका संहार जरूरी है।।

Happy birthday bebu betu
23/02/2023

Happy birthday bebu betu

हृदया

छोटी सी मेरी प्यारी बेटी,
जब तेरे आने का एहसास हुआ, ज़िन्दगी में पहली बार कुछ ख़ास हुआ।

तुझे पहली बार देख तुझसे नज़रें न हटी,
दिल मे जैसे खुशियों का सैलाब हुआ।

छोटी थी, तब थी मासूम प्यारी सी, अब है नटखट, पर मेरी जान है।
तेरे ही इर्दगिर्द अब मेरा सारा जहांन है।

तू ऐसे लगती है जैसे मेरा ही बचपन, फिर एक बार लौट आया है मुझे बचपन मे वापस ले जाने,
कुछ नई शरारतें करने, कुछ पुरानी दोहराने।

कुछ खेल जो मैंने खेले थे, कुछ कहानियां जो मैने सुनी थी,
अब वो सब तुझ संग फिर सुहाती हैं,
जो लोरियां सुन सोया था मैं,
अब जब तुझे सुनता हूँ तो लगता है जैसे,
नानी ही मेरे कानों में गुनगुनाती है।

तू जब से आई है
मेरी ज़िंदगी और जीवन से भरपूर हो गयी है,
तुझ संग बीते हर पल में लगता है जैसे मेरी सारी परेशानियां अचानक ही मुझसे कोसों दूर हो गयी हैं

तू परी है, जिसके आने से मेरी ज़िंदगी जन्नत है।
मिन्नतों से जो पूरी होती हैं ,तू वो मन्नत है।
छोटी सी मेरी प्यारी बेटी।

06/02/2023

वो क्या है, जो तेरे मेरे बीच दोस्ती से ज्यादा है।
वो कौन सा धागा है जो इतनी दूरियों के बावजूद मुझे तुझसे बांधा है।

ये रिश्ता घनघोर अंधेरे में बस किसी जुगनू सा है,जो बेशक अंधेरा मिटा न सके,
पर साथ देता है की मन का विश्वास "रोशनी है कहीं" , ये भरोसा अंधेरा डिगा न सके

ये रिश्ता शायद वो कंबल नहीं जो, परेशानियों की ठंड से पूरी तरह बचा राहत दे सके,
पर उस अलाव की तरह तो है ही जो खुद जल कर ,ठंड से लड़ने हौसले की थोड़ी गर्माहट दे सके।

ये रिश्ता शायद कोई फलदार पेड़ नहीं जो ऋतु आने पर फल की चाहत दे सके,
पर उस बरगद सा तो है जो युगों तक छाव की थोड़ी राहत दे सके,

ये रिश्ता शायद परछाई सा न सही जो हर कदम साथ चलती है,
पर आईने सा तो है, तुम्हारा उल्टा पहलू भी तुम्हें साफ समझाए, तुम हंसो तो हंसे तुम रोए तो वो भी आंसू बहाए।

वो क्या है, जो तेरे मेरे बीच दोस्ती से ज्यादा है।
वो कौन सा धागा है जो इतनी दूरियों के बावजूद मुझे तुझसे बांधा है।

25/12/2022

Happy birthday Papa

सदैव …..............................…............माना कि, हम साथ नही होंगे तुम्हारे,पर ऐसा नहीं, दिल में कोई एहसास नहीं ...
27/11/2022

सदैव
…..............................…............
माना कि, हम साथ नही होंगे तुम्हारे,
पर ऐसा नहीं, दिल में कोई एहसास नहीं होंगे हमारे।
याद तो तब भी आती थी, जब तुम थी पास ,
याद अब भी आएगी जब, बस रहोगी साथ बन के एक एहसास।

याद तो आयेगा अब भी वो घंटो बिन कहे बिन सुने मौन ही बातें करना,
बस खुली आंखों से सपने बुन, यूं ही ज़ाया अपनी रातें करना।

याद तो आयेगा मेरी बहुत सी शैतानियों पर तेरा रूठना,
मेरी किसी बात पर, खीझ कर मेरे पास से जाने के लिए तेरा उठाना।

याद तो आयेगा वो बचपन के खेल खेल में भी तेरा मुझपर हक़ जमाना,
मेरे रूठने पर तेरा रो कर मुझे मनाना।

याद तो आयेगा वो दोबारा मिलने का इंतजार करना, खयालों में खोए खोए, सुबह को दोपहर - घंटो को वार करना।

याद तो आयेगा मेरा प्यार जताना और तुम्हारा खुश होकर भी मेरी बातों को झुठलाना।

याद तो आयेगा जीवन का हर क्षण जो तुम्हारे साथ बीता,

पर अब रहना तो होगा ही दूर,
किस्मत कहलो या कर्म, पर हैं तो मजबूर।
पर राधा! तुम यही कहना
"श्री कृष्ण होंगे दुनिया के, कान्हा तो बस मेरे ही होंगे"
ये सच है की ना गठबंधन होगा ना शादी होगी ना फेरे होंगे,
पर ख्वाबों में, यादों में, आती जाती हर सांसों में, हम सदैव तेरे होंगे।
..........................

18/08/2022

जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं भाई,
ईश्वर तुझे सफलता दे,तेरे हर प्रयास मे.
Happy birthday Gurudutt

17/08/2022
14/08/2022

स्वतंत्रता की, स्वाभिमान की जो लड़ी थी हमने लड़ाई,
एक बार फिर उसका विजयोत्सव मना रहें हैं,
आज विश्व मे हो उज्ज्वल,
हम अपनी सफलता की गाथाएँ गा रहें हैं।
आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं।

सन संतावन से सैतालिस तक, जिन वीरों ने बलिदान दिया,
सैतालिस से अब तक जिन जवानों ने मां की रक्षा में है प्राण दिया।
उन सभी अमर आत्माओं सी देश प्रेम की लौ अपने दिलों में जला रहें हैं।
आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं।

अ-अमन से लेकर ज्ञ-ज्ञान तक विश्व को हमने सब दिया है,
शून्य से लेकर मंगल तक का सफर ख़ुद के बूते पर तय किया है।
कदम-कदम बढ़ा कर आज हम इस मुकाम पर आए हैं,
धरती तो क्या , अंतरिक्ष मे भी अपनी ध्वजा लहराये हैं,
आज फिर हर घर अपना तिरंगा फहरा रहे हैं।
आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं।

दोस्तों के लिए हथेली पर हम जान यार रखते हैं,
दुश्मनी में भी शराफ़त बरकरार रखते हैं।
इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं दुनिया को हमने सिखाया है,
कोई विपदा हो या महामारी, पूरे विश्व का साथ हमने निभाया है।
"सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय "का मंत्र फिर एक बार गौरव से दोहरा रहें हैं।
आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं।

स्वतन्त्रता के 75वें पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।।

जय हिंद

08/03/2022

स्त्री

पूरे संसार को महकने वाली पुष्प मोगरा कहूँ,
या भावनाओं से भरी कविता।
जीवन को रोशन करने वाली रश्मि है ये,
या संस्कार और विनय की मूर्ति विनीता।
प्रेम बरसाती हृदया है ये,
वात्सल्य से पूर्ण ममता यही।
आंगन को महकाये ऐसी ऋतू बसन्त है,
ये प्रभु की उपासना है जिसमे धैर्य अनंत है
स्त्री की स्त्रीत्व का बखान क्या करूँ,
करुणा वीरता सहनशीलता का भंडार है,
स्त्री की निश्छल भावनाओं मेरा नमन बारं बार है।
-अभिनव

16/01/2022

कभी मन करता था, हाल-ऐ-दिल सबको सुनाएँ।
थे भी कई करीबी, के गर छोटी छोटी बातें भी हों जीवन में , तो भी सब कुछ बताएँ।
कुछ ख़ास - कुछ बकवास बातें अभी भी है कहने को कई,
पर कहे किसे जनाब कोई मिलता ही जो नहीं।
पहले तो बस दिल की तस्वीर जैसी है वैसी खींच दिखा देते थे यारों को यूं ही।
अब भला मन के बातों को सही से बताने इतने फ़िल्टर कौन लगाये।😊

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