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15/06/2026

🎦 "SORRY MAA" पुरी फिल्म शीघ्र होगी आपके सामने, बस थोड़ा इंतजार करिए।
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14/06/2026

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फ़िराक़ गोरखपुरी (1896–1982) : संक्षिप्त जीवनीFiraq Gorakhpuri का वास्तविक नाम रघुपति सहाय था। उनका जन्म 28 अगस्त 1896 क...
14/06/2026

फ़िराक़ गोरखपुरी (1896–1982) : संक्षिप्त जीवनी

Firaq Gorakhpuri का वास्तविक नाम रघुपति सहाय था। उनका जन्म 28 अगस्त 1896 को उत्तर प्रदेश के Gorakhpur में हुआ। वे उर्दू भाषा के महान शायरों में गिने जाते हैं और अपनी ग़ज़लों, नज़्मों तथा साहित्यिक आलोचना के लिए प्रसिद्ध हैं।

फ़िराक़ गोरखपुरी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया और कुछ समय तक जेल में रहे। बाद में वे University of Allahabad में अंग्रेज़ी साहित्य के प्राध्यापक बने। उनकी शायरी में प्रेम, मानवीय संवेदनाएँ, प्रकृति और भारतीय संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है।

उनकी प्रमुख कृतियों में "गुले-नग़्मा", "रूह-ए-कायनात" और "बाज़गश्त" शामिल हैं। "गुले-नग़्मा" के लिए उन्हें 1969 में Jnanpith Award से सम्मानित किया गया।

फ़िराक़ गोरखपुरी का निधन 3 मार्च 1982 को हुआ। वे आज भी उर्दू साहित्य के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली शायरों में गिने जाते हैं।Pravin Nag presentation - Mere Jharokhe Se


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बिंदास सोते हैं वे तकिया भी नहीं सिरहाने में।ऐसी नींद की गोली भी बिकती नहीं ज़माने में।Pravin Nag presentation - Mere Jh...
14/06/2026

बिंदास सोते हैं वे तकिया भी नहीं सिरहाने में।
ऐसी नींद की गोली भी बिकती नहीं ज़माने में।
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Shooting Time | Film - "SORRY MAA"Pravin Nag presentation - MERE JHAROKHE SE.                                   Facebook...
14/06/2026

Shooting Time | Film - "SORRY MAA"
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🎬📽️ फिल्म "सॉरी माँ" के शूटिंग के दौरान कैद एक यादगार पल ✍️🎥Pravin Nag presentation -  Mere Jharokhe Se                 ...
13/06/2026

🎬📽️ फिल्म "सॉरी माँ" के शूटिंग के दौरान कैद एक यादगार पल ✍️🎥
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🌹✨ जब दर्द ने शायरी का रूप लिया — मीर तक़ी मीर ✨🌹📖 उर्दू शायरी के इतिहास में यदि किसी एक शायर को सबसे ऊँचा स्थान दिया जा...
13/06/2026

🌹✨ जब दर्द ने शायरी का रूप लिया — मीर तक़ी मीर ✨🌹

📖 उर्दू शायरी के इतिहास में यदि किसी एक शायर को सबसे ऊँचा स्थान दिया जाए, तो वह नाम है Mir Taqi Mir का।

🕌 1723 में आगरा में जन्मे मीर ने जीवन में अनेक दुख, बिछोह और संघर्ष देखे। परिवार की परेशानियाँ, युद्धों की विभीषिका और अपनों के बिछड़ने का दर्द उनकी शायरी में गहराई से झलकता है। यही कारण है कि उनकी ग़ज़लों को पढ़ते हुए पाठक अपने दिल की आवाज़ सुनने लगते हैं। ❤️

🏆 मीर की उपलब्धियाँ
🔹 उर्दू ग़ज़ल को नई पहचान और ऊँचाई प्रदान की।
🔹 उन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" (शायरी का देवता) कहा गया।
🔹 उनकी शायरी ने उर्दू साहित्य की दिशा बदल दी।
🔹 बाद के महान शायरों, विशेषकर Mirza Ghalib, ने भी उनके प्रभाव को स्वीकार किया।

✍️ मीर का एक प्रमाणित और प्रसिद्ध शेर—

"पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है।"

🌺 मीर की शायरी में मोहब्बत है, दर्द है, तन्हाई है और इंसानी भावनाओं की ऐसी सच्चाई है जो हर दौर में लोगों के दिलों को छूती रही है।

💬 क्या आपने कभी मीर का कोई शेर पढ़ा है? कमेंट में अपना पसंदीदा शेर ज़रूर लिखिए।

📚 "मीर के दीन-ओ-मज़हब को अब पूछते क्या हो, उन ने तो
कश्का खींचा, दैर में बैठा, कब का तर्क इस्लाम किया।"

🌟 मीर केवल एक शायर नहीं, बल्कि उर्दू अदब की वह विरासत हैं जो सदियों से शब्दों की दुनिया को रोशन कर रही है।

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🖋️🌹 निदा फ़ाज़ली: शब्दों में इंसानियत की खुशबू 🌹🖋️👤 मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को ग्वालियर में हुआ ...
11/06/2026

🖋️🌹 निदा फ़ाज़ली: शब्दों में इंसानियत की खुशबू 🌹🖋️
👤 मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को ग्वालियर में हुआ था।
📚 उनका असली नाम मुक्तिदा हसन निदा फ़ाज़ली था। उन्होंने अपनी शायरी में प्रेम, रिश्तों, अकेलेपन, जीवन-दर्शन और इंसानियत को बेहद सरल और प्रभावशाली भाषा में व्यक्त किया।
🎵 उनकी रचनाओं को महान ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह सहित अनेक प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी आवाज़ दी।
💭 उनकी शायरी दिल से निकलती थी और सीधे दिल तक पहुँचती थी।
✨ उनकी अमर पंक्तियों में से एक—
"घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।"
🙏 8 फ़रवरी 2016 को वे इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनकी शायरी आज भी करोड़ों दिलों में ज़िंदा है।
❤️ यदि आप भी निदा फ़ाज़ली साहब को पसंद करते हैं, तो उनकी कोई प्रिय पंक्ति कमेंट में अवश्य लिखें।
📖✍️ — मेरे झरोखे से :::




















📌
"निदा फ़ाज़ली साहब की कौन-सी पंक्ति आपके दिल के सबसे करीब है? ❤️"

📖✨ क्या सचमुच हर बड़ी दौलत के पीछे कोई अपराध छिपा होता है? ✨📖"प्रत्येक विपुल सम्पत्ति साम्राज्य की नींव अपराध पर रखी होत...
10/06/2026

📖✨ क्या सचमुच हर बड़ी दौलत के पीछे कोई अपराध छिपा होता है? ✨📖

"प्रत्येक विपुल सम्पत्ति साम्राज्य की नींव अपराध पर रखी होती है।"

यह विचार विश्वविख्यात फ्रांसीसी साहित्यकार ऑनरे द बाल्ज़ाक का माना जाता है, जिनकी लेखनी ने समाज, धन, सत्ता और मानवीय महत्वाकांक्षाओं की परतों को बड़ी सूक्ष्मता से उजागर किया।

👤 ऑनरे द बाल्ज़ाक (1799–1850) केवल एक उपन्यासकार नहीं थे, बल्कि समाज के ऐसे कुशल पर्यवेक्षक थे जिन्होंने अपने युग की वास्तविकताओं को शब्दों में जीवंत कर दिया। उनकी महान कृति "ला कोमेदी ह्यूमेन" में सैकड़ों पात्रों के माध्यम से उन्होंने मानव स्वभाव, लालच, प्रेम, संघर्ष और सत्ता की भूख का अद्भुत चित्रण किया।

🏆 उनकी रचनाएँ आज भी विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं। उन्हें आधुनिक यथार्थवादी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में गिना जाता है।

💭 बाल्ज़ाक का यह विचार केवल धन के बारे में नहीं है, बल्कि यह उस कठोर सत्य की ओर संकेत करता है कि इतिहास में अनेक बार अपार वैभव, शक्ति और साम्राज्य ऐसे कार्यों की नींव पर खड़े हुए जिनकी नैतिकता पर प्रश्नचिह्न लगते रहे हैं।

🤔 क्या आप इस विचार से सहमत हैं?

क्या वास्तव में हर विशाल सम्पत्ति के पीछे कोई न कोई अन्याय, छल या अपराध छिपा होता है, या यह केवल समाज की एक कटु व्याख्या है?

✍️ अपनी राय अवश्य लिखें।

🌿 मेरे झरोखे से
इतिहास, संस्कृति और जीवन के अनछुए पहलुओं की एक सार्थक यात्रा।
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