13/04/2025
लीजिए मित्रो प्रस्तुत है एक आशावादी गीत। मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी निराश नहीं होना चाहिए।
गिर कर उठना मनुज धर्म है
असफलता आती जीवन में,इससे न घबराना है।
गिर कर उठना मनुज धर्म है ,इसको हमें निभाना है।।
जेल के अंदर जन्म लिया था, चक्र सुदर्शन धारी ने।
उग्रसेन महाराज बचाए,देवकी पुत्र मुरारी ने।
बढ़ा अधर्म धरा पर, प्रभु ने धर्म हेतु अवतार लिया।
किया कंस विध्वंस, सज्जनों को कष्टों से वार दिया।
मिला राम वनवास, पिता की आज्ञा से वन चले गए।
किया असुर संहार,और फिर रावण से वो छले गए।
रावण का वध किया,सनातन ध्वज जग में लहराया था।
वनवासी जीवन में भी हरि,अपना फर्ज निभाया था।
राम कृष्ण से हों प्रेरित,हमको ऐसा कर जाना है।
गिर कर उठना मनुज धर्म है,इसको हमें निभाना है।।
पांडव हार गए थे सब कुछ, उसे शौर्य से पाया था।
भागीरथ भी गंगा को भू पर, निज तप से लाया था।
ऋषियों ने जो शोध किए,वेदों की रचना कर डाली।
सनातनी शिक्षा से जन मानस में शिक्षा भर डाली।
ध्रुव भक्ति ने अंतरिक्ष में, उच्च स्थान बना डाला।
और भक्ति में प्रह्लाद ने, नव इतिहास रचा डाला।
शबरी ने निज राम भक्ति से, उच्च परम पद पाया था।
सूरदास,मीरा,कबीर और तुलसी ने यश गाया था।
तूफानों से टकराकर भी,हमको बढ़ते जाना है।
गिर कर उठना मनुज धर्म है,इसको हमें निभाना है।।
चींटी चढ़ती फिर गिरती है,और अंत में चढ़ जाती।
और हिमालय की चोटी पै,अपनी सेना बढ़ जाती।
लाल बहादुर संघर्षों में, देश के पी एम बन जाते।
और कलाम मिसाइल मानव,बड़े मान से कहलाते।
रामानुजन गणित के सपने,सोते में देखा करते।
वैज्ञानिक गिर गिर कर सबका,जीवन धन्य किया करते।
भगत सिंह,शेखर,सुभाष ने,कभी नहीं हिम्मत हारी।
हंस के चूमा फंदे को, और बिसराई दुनियां सारी।
ये जीवन अनमोल मिला है,इसको सफल बनाना है।
गिर कर उठना मनुज धर्म है,इसको हमें निभाना है।।
आज बेटियों ने इस जग में,ऊंचा नाम कमाया है।
धरती माता गर्व कर रही,यश अंबर तक छाया है।
वही कल्पना व्योम सुता बन,अंतरिक्ष में जा पंहुची।
और सुनीता विलियम भी तो,अंतरिक्ष में जा पंहुची।
गीता फोगट,साक्षी ने, खेलों में नाम कमाया है।
इंदिरा नूई और पाल बछेंद्री ने,निज ध्वज फहराया है।
मेरीकॉम शक्ति के बल पर,नित्य नए इतिहास रचे।
महिलाओं के बल पर ही तो अपने ये परिवार बचे।
त्याग, तपस्या,बलिदानों का, हमको पाठ पढ़ाना है।।
गिरकर उठना मनुज धर्म है,इसको हमें बचाना है।।
अशोक कुमार सिंह धाकरे।
अशोक कुमार सिंह धाकरे
कवि एवं साहित्य कार
भरतपुर,राजस्थान