bhadra wale

bhadra wale Aashif khan

झारखंड के रहने वाले मोहम्मद आरिफ पेशे से मैकेनिक हैं, लेकिन उनका हुनर किसी बड़े ऑटो डिज़ाइनर से कम नहीं।उन्होंने 2 साल प...
05/03/2026

झारखंड के रहने वाले मोहम्मद आरिफ पेशे से मैकेनिक हैं, लेकिन उनका हुनर किसी बड़े ऑटो डिज़ाइनर से कम नहीं।

उन्होंने 2 साल पहले करीब ₹50,000 में एक पुरानी मारुति 800 खरीदी और उसे सुपरकार लुक देने का फैसला किया।

करीब 2 साल की मेहनत और लगभग ₹4 लाख खर्च करके आरिफ ने इस कार को ऐसा रूप दिया कि अब यह लेम्बर्गिनी जैसी नजर आती है।

ग्रीन कलर, कस्टम बंपर, नई लाइट्स, अलॉय व्हील्स और अपग्रेडेड साउंड सिस्टम के साथ यह कार अब सड़क पर सबका ध्यान खींचती है।

beshak sahi baat h dosto
26/02/2026

beshak
sahi baat h dosto

आज जब नफ़रत की आवाज़ें तेज़ हैं, कुछ लोग उम्मीद बनकर खड़े हैं। कोटद्वार में मुस्लिम बुज़ुर्ग की दुकान पर हमले के दौरान म...
24/02/2026

आज जब नफ़रत की आवाज़ें तेज़ हैं, कुछ लोग उम्मीद बनकर खड़े हैं। कोटद्वार में मुस्लिम बुज़ुर्ग की दुकान पर हमले के दौरान मोहम्मद दीपक दीवार बनकर खड़े हुए यह इंसानियत की जीत थी।

लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्षों से जिस जगह नमाज़ अदा होती रही, वहाँ ताला जड़ दिया गया। छात्र बाहर नमाज़ पढ़ने लगे और उनकी सुरक्षा में हिंदू छात्र घेरा बनाकर खड़े रहे। साथ रोज़ा इफ़्तार किया।
एक और घटना राजस्थान में बीजेपी नेता ने मुस्लिम महिलाओ को कंबल देने से मना किया, तो भेदभाव के विरोध में हिंदू बहनों ने कंबल लौटाकर इंसानियत चुनी।

यही वह भारत है जिसका सपना महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने देखा था।

नफ़रत फैलाने वाले जितनी मेहनत वे समाज को तोड़ने में लगाते हैं, उसका आधा भी रोज़गार, रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य और शिक्षा पर लगाएँ, तो देश की तस्वीर बदल जाए।

एक साधारण सा हेयरकट… लेकिन ज़िंदगी बदल गई।एक ब्रिटिश युवक सिर्फ बाल कटवाने के लिए एक मुस्लिम नाई के पास गया था, मगर वहां...
19/02/2026

एक साधारण सा हेयरकट… लेकिन ज़िंदगी बदल गई।

एक ब्रिटिश युवक सिर्फ बाल कटवाने के लिए एक मुस्लिम नाई के पास गया था, मगर वहां से वह इस्लाम की रोशनी के साथ लौटा। उसने साफ शब्दों में कहा, “मेरी दीन को कोई नहीं खरीद सकता, चाहे एक अरब डॉलर ही क्यों न दे।”

सच्ची राह जब दिल को छू ले, तो दुनिया की कोई कीमत उसकी बराबरी नहीं कर सकती। 🤍

18/02/2026

भादरा शहर के सिनेमा हॉल प्लॉट विवाद में हाई कोर्ट की बड़ी राहत!

अधिवक्ता मंजीत गोदारा की प्रभावी पैरवी से दमनकारी कार्रवाई पर रोक!

भादरा/जोधपुर, 17 फरवरी। भादरा शहर के ह्रदय स्थल पर निर्मित बहुचर्चित सिनेमा हॉल प्लॉट विवाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं रामप्रताप चाचान और मदन मोहन चाचान को अंतरिम राहत प्रदान की है। उच्चतम अदालत ने नगर पालिका भादरा के अधिशाषी अधिकारी (E.O.) द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दमनकारी या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

बहुचर्चित सिनेमा हाल के इस मामले में अधिवक्ता मंजीत गोदारा ने अदालत के समक्ष प्रभावी और तथ्यात्मक पैरवी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सिनेमा हॉल प्लॉट को लेकर विवाद पहले से ही सक्षम सिविल न्यायालय में लंबित है, जहाँ 30 जनवरी 2025 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया जा चुका है। इसके बावजूद नगर पालिका भादरा ने 02 फरवरी 2026 को धारा 73B, राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के तहत नोटिस जारी कर कार्रवाई प्रारंभ कर दी।

अधिवक्ता मंजीत गोदारा ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि जब न्यायालय का स्पष्ट यथास्थिति आदेश प्रभावी है, तब नगर पालिका द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि मामला विचारणीय है।

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने राज्य सरकार, जिला कलक्टर और नगर पालिका भादरा को नोटिस जारी करते हुए अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि सिविल वाद के अंतिम निस्तारण तक या इस न्यायालय के किसी अन्य आदेश तक, याचिकाकर्ताओं के कब्जे को हटाने हेतु कोई भी दमनकारी कार्रवाई नहीं की जाएगी। अधिवक्ता मंजीत गोदारा की प्रभावी दलीलों के बाद मिले इस आदेश ने भादरा में सिनेमा हॉल प्लॉट विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जबकि याचिकाकर्ताओं को तत्कालिक राहत मिल गई है।

बहुत से फ़िर्कों के लोग एक-दूसरे के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ते, लेकिन सही हदीसों से हमें अलग ही तालीम मिलती है। सहीह अल‑बुख़ा...
17/02/2026

बहुत से फ़िर्कों के लोग एक-दूसरे के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ते, लेकिन सही हदीसों से हमें अलग ही तालीम मिलती है। सहीह अल‑बुख़ारी (हदीस 694–695) में आता है कि

मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: “इमाम तुम्हें नमाज़ पढ़ाएंगे। अगर वह सही पढ़ाए तो तुम्हारे लिए भी सवाब है और उनके लिए भी। और अगर वह ग़लती करें तो तुम्हारा सवाब तुम्हें मिलेगा और ग़लती का बोझ उन पर होगा।”

इस हदीस से साफ़ मालूम होता है कि जमाअत को छोड़ना सही तरीका नहीं है। इमाम की छोटी-मोटी ग़लती की वजह से नमाज़ छोड़ देना या अलग जमाअत बना लेना ठीक नहीं। उम्मत की एकता (इत्तिहाद) सबसे बड़ी नेमत है।

इसी तरह उसमान इब्न अफ़्फ़ान رضي الله عنه के दौर में जब कुछ बग़ावती लोग हालात बिगाड़ रहे थे, तब भी उन्होंने यही हिकमत भरी बात कही कि: “नमाज़ एक भलाई का काम है। अगर लोग अच्छा करें तो तुम भी उनके साथ अच्छा करो, और अगर वे बुरा करें तो तुम उनके बुरे काम में शामिल मत हो (लेकिन जमाअत न छोड़ो)।”

इससे पता चलता है कि फ़िर्क़ों की वजह से नमाज़ छोड़ देना सही नहीं। जब तक इमाम खुला कुफ्र या साफ़ तौर पर दीन के खिलाफ़ बात न करे, उसके पीछे नमाज़ पढ़ी जा सकती है। उम्मत से अलग होकर फूट डालना इस्लाम की रूह के खिलाफ़ है। हमें समझना चाहिए कि शैतान हमेशा चाहता है कि मुसलमान आपस में बंट जाएँ, लेकिन दीन हमें जोड़ने की तालीम देता है। इसलिए अक़्लमंदी और हिकमत यही है कि जहाँ नमाज़ क़ायम हो रही हो, वहाँ जमाअत के साथ रहें और दिलों में नफ़रत न पालें।

बेशक 💯💯💯💯
12/09/2025

बेशक 💯💯💯💯

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