24/07/2026
हर जान की क़ीमत होती है
एक शोर उठाया जाएगा
आईन जलाया जाएगा
इंसाफ की देवी रोएगी
मुंसिफ को उठाया जाएगा
खामोश कराया जाएगा
हक़दार भगाया जाएगा
ग़द्दार बताया जाएगा
सड़कों पे गिरेंगी लाशें भी
लाशें जो क़फ़न को तरसेंगी
बच्चों को समेटे दामन में
एक बाप की धड़कन टूटेगी
एक माँ का कलेजा चीखेगा
जब पाओं के छाले फूटेंगे
सड़कों पे निशां रह जायेगा
मंज़िल का पता रह जायेगा
जब खून की होली फैलेगी
जिन्दों को जलाया जाएगा
मुर्दों को भुनाया जाएगा
हुक़्क़ाम तो चुप का रोज़ा है
वो रोज़ा जिसकी ईद नही
तारीख़ के कोरे कागज़ पर
तहरीर के आँसू बिखरेंगे
आवाज़ उठेगी मुफ़लिस की
जो अर्श का सीना चीरेगी
फ़िरऔन की तख्ती टूटेगी
मज़लूम लहू जब खौलेगा
महलों का तकब्बुर टूटेगा
ताक़त का नशा छंट जाएगा
हुक़्क़ाम की नींदें टूटेंगी
ख़ालिक़ का इशारा आएगा
सड़कों को लपेटा जाएगा
तूफान उठाया जाएगा
आंधी को चलाया जाएगा
बिजली को गिराया जाएगा
दरिया को बहाया जाएगा
शददाद हैं जितने दुनिया के
सब मुँह के बल गिर जाएंगे
ज़ालिम का बदन फट जाएगा
जब क़ब्र की अंधी बस्ती में
आमाल न होंगे हाथों में
हर एक सितमगर बोलेगा
इंसान की क़ीमत होती है
हर जान की कीमत होती है
रेहान हाशमी