Kripa Raghunath Ki

Call Directions Website

Kripa Raghunath Ki अब कछु नाथ न चाहिय मोरे। दीन दयाल अनुग्रह तोरे।।
सीता राम राम राम सीता राम राम राम।।

जिस प्रकार समुद्र का ही अंश होने के कारण लहर और  समुद्र में जातीय एकता है अर्थात् जिस जाति की लहर - उसी जाति का समुद्र ह...
18/03/2026

जिस प्रकार समुद्र का ही अंश होने के कारण लहर और समुद्र में जातीय एकता है अर्थात् जिस जाति की लहर - उसी जाति का समुद्र है, उसी प्रकार संसार का ही अंश होने के कारण शरीर की संसार से जातीय एकता है।
मनुष्य संसार को तो 'मैं' नहीं मानता, पर भूल से शरीर को 'मैं' मानता है।
जिस प्रकार समुद्र के बिना लहर का अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है, उसी प्रकार संसार के बिना शरीर का अपना कोई अस्तित्व नहीं है। परंतु अहंकार से मोहित अंतःकरण वाला मनुष्य जब शरीर को ' मैं ' अर्थात अपना स्वरूप मान लेता है तब उसमें अनेक प्रकार की कामनाएं उत्पन्न होने लगती हैं।
नारायण 🙏

17/01/2026

Address

186, Bhatgawan Uparwar, Ithara, Sitamarhi
Bhadohi

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Kripa Raghunath Ki posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share