27/03/2026
👉भारतीय लोक मान्यता और धार्मिक कथाओं के अनुसार, इस फूल में महाभारत का पूरा सार समाया हुआ माना जाता है:
100 बैंगनी (violet/purple) कलियाँ/फिलामेंट्स — कौरवों का प्रतीक (100 कौरव भाई)।
केंद्र में 5 हरी/पीली कलियाँ — पांडवों का प्रतीक (5 पांडव भाई)।
तीन प्रमुख कलियाँ/स्तिग्मा — ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) की त्रिमूर्ति का प्रतीक।
केंद्र का गोलाकार हिस्सा (radial filaments) — सुदर्शन चक्र (भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य चक्र), जो समय, कर्म और दिव्य व्यवस्था का प्रतीक है।
कई लोग इसे "कौरव-पांडव फूल" भी कहते हैं। यह कथा सोशल मीडिया, मंदिरों और लोक कथाओं में बहुत लोकप्रिय है, हालांकि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है — बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक व्याख्या है।
यह फूल वास्तव में बेहद सुंदर और जटिल संरचना वाला होता है — इसके filaments (धागे जैसे भाग) वाकई सैकड़ों की संख्या में होते हैं, जो 100 के करीब दिख सकते हैं।
फूल आमतौर पर सफेद, नीला-बैंगनी या गुलाबी रंग का होता है और एक दिन में खिलकर मुरझा जाता है।
यह एक बारहमासी बेल (vine) है, जो उष्णकटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह उगती है। भारत में इसे बगीचों और बालकनी में लगाया जाता है।