03/08/2022
आईये मिलते है फ़ोटोग्राफ़र तरुण चौहान से
मूलतः बाड़मेर जिले के बूठ राठौड़दान गाँव के रहने वाले है तरुण चौहान। इनकी स्कूली शिक्षा बाड़मेर की हाई स्कूल से हुई फिर photography की professional शिक्षा के लिए माया नगरी मुम्बई का रूख किया लेकिन वहाँ जाकर भी सरहदी गाँव नहीं छूटा । वहाँ से वापस बाड़मेर आये और रूखे-सूखे रेगिस्तान में खोजने लगे रंग जिनमें है थार का अभाव और थार के वासिंदों की जिजीविषा ।
आप इनके तस्वीरों की सीरीज़ को देखेंगे तो उनमें स्त्री के मन की वेदना है, प्रेम है , बिछोह का दुःख है, अतीत की ख़ुशबू है और गहराई में जाओगे तो किसी चीज़ के टूट जाने की गूँज है, कलाकार(artist) के अंदर कुछ टूट जाने की गूँज ।
इनके द्वारा ली गयी तस्वीरें कईं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड जीत चुकी है । मेहरनगढ़ जोधपुर, जवाहर कला केन्द्र जयपुर सहित कईं जगहों पर इनके तस्वीरों की प्रदर्शनी भी लग चुकी है । आज “तरुण चौहान” photography की दुनिया में एक बहु चर्चित नाम है।
ये कविताएँ कहने का भी शौक रखते है और बेहद मार्मिक मुद्दों पर कविताएँ कहते है।
हाल में ये मुम्बई में रहकर अपना काम कर रहे है।
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