एहसास की बूंदें

एहसास की बूंदें "मन की पीर, नीर नैनों के जब मिलने का अवसर पाते हैं
नव कविता का रूप धार कर शब्दों में बह जाते हैं!

25/08/2026

Black swan at Birds Park
Mysore

23/08/2026

بچے کو کندھے پر اٹھائے وہ چلتا رہا دھوپ میں
میں نے ایک فرشتہ دیکھا باپ کے روپ میں
'این

बच्चे को कांधे पर उठाए चलता रहा धूप में,
मैंने देखा है एक फ़रिश्ता, बाप के रूप में!
'ऐनी'

16/08/2026

ज़मीन ओ आसमां से, सहरा से या फिर समुंदर से ,
रिज़्क़ पाता है हर मख़लूक़, अपने अपने मुक़द्दर से !.'ऐनी'

  !“Seek the wisdom that will untie your knot. Seek the path that demands your whole being.”.'Rumi'
13/08/2026

!
“Seek the wisdom that will untie your knot. Seek the path that demands your whole being.”.'Rumi'

ये दौर झूठ, फरेब ओ मक्कारी का है। इसमें सच् हक़ और ईमानदारी अपना वजूद खोते जा रहे हैं। इसमें गुनहगार सिर्फ़ वो ही नहीं ज...
30/06/2026

ये दौर झूठ, फरेब ओ मक्कारी का है। इसमें सच् हक़ और ईमानदारी अपना वजूद खोते जा रहे हैं।
इसमें गुनहगार सिर्फ़ वो ही नहीं जो इन बातों में लगे हैं, बल्कि वो लोग भी जो उनको अपनी ख़ामोशी से या जाने अंजाने तर्जीह दे कर बढ़ावा देते हैं।
मगर, याद रहे तुम ऊपर से कुछ भी दिखावा करो, तुम्हारा असल वो ईश्वर, रब जानता है। और उसका हिसाब वक़्त के साथ वो ज़रूर करेगा।

إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
Allah is Knowing of that within the hearts."

"बेशक, अल्लाह दिलों के राज़ों (सीने में छिपी हुई बातों ) को ख़ूब जानता है।

— Quran, Surah : Aal-e-Imran (3:119)

एक वो दौर था जब पान ही ख़ातिर-तवाज़ो का अहम हिस्सा थाचाय शर्बत नहीं,  ख़ासदान में रखा पान  घर घर का  क़िस्सा थानानियां द...
29/06/2026

एक वो दौर था जब पान ही ख़ातिर-तवाज़ो का अहम हिस्सा था
चाय शर्बत नहीं, ख़ासदान में रखा पान घर घर का क़िस्सा था
नानियां दादियां और बुज़ुर्ग सब घंटों गुज़ार लेते एक बीड़ा पान चबाकर
अपने अपने क़िस्से कहानी सुनते सुनाते, पान चबाते हुए हंस-हंस कर
पान के बीड़ों पर तय होते थे लेन देन और, शादी ब्याह की तारीखें,
बड़े से बड़े मसले हल हो जाया करते थे एक बीड़ा पान के दम पर
पान अब भी है , ख़ूब फल- फूल रहा है बड़े-बड़े शहरों में बज़ारों में
मगर अब वो ताल्लुक़ात का ज़रिया नहीं, सिर्फ़ तिजारत का हिस्सा है!!..'ऐनी'

24/06/2026

बेशक, उस रब की हिकमत इंसान की समझ से परे होती हैं, मगर ग़ौर ओ फ़िक्र किया जाये तो ये बातें इंसान की बेहतरी के लिए ही हैं। उसके हक़ में हैं।

न तेरा धरम सिखाता है नफ़रतें तुझको न मेरा दीन मुहब्बतोंं से रोकता मुझको ये मतलबपरस्त, नफ़रती बेहिस से लोग बांट पाएंगे न,...
09/06/2026

न तेरा धरम सिखाता है नफ़रतें तुझको
न मेरा दीन मुहब्बतोंं से रोकता मुझको
ये मतलबपरस्त, नफ़रती बेहिस से लोग
बांट पाएंगे न, किसी हाल भी 'हम' को !!..'ऐनी'

30/05/2026

Resting a while

15/05/2026

Maalik-e-do jahaan !

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