05/01/2023
नयी कविता
मुझे कहना यूँ तो बहुत है मगर
डर है तू दूर न हो जाए
जो सपने मैंने संजोये हैं
डर हैं कहीं चूर न हो जाए
इसलिए अपनी चाहत क साथ
बस कागज़ पर ही दिखता हूँ
जब भी तेरी याद सताती हैं
एक नयी कविता लिखता हूँ।।
न पास हो तुम इतने मेरे,
न तुमसे कोई दूरी हैं
फिर भी हैं जो फासले दोनों मे
वो इश्क़ मे बहुत ज़रूरी हैं
तस्वीर मे तेरी अब खुद को
मैं अक्सर देखा करता हूँ
जब भी तेरी याद सताती हैं
एक नयी कविता लिखता हूँ।।
मेरे इस उलझे जीवन की ,
तुम सुलझी हुई कहानी हो,
चेहरे की हसीं कभी हो तुम ,
कभी आँख से बहता पानी हो
ये मोती सी बूँदें चुनकर
शब्दों मे पिरोया करता हूँ
जब भी तेरी याद सताती हैं
एक नयी कविता लिखता हूँ।।
डर था शायद तुम्हे कह न सकूँ
पर ऐलान आज मैं करता हूँ
दुनिया चाहे अब जो बोले
मैं किसी से अब न डरता हूँ
इक़रार हो या इंकार हो अब
इस बात की न कोई फिक्र मुझे
सच तो बस इतना सा है की
मैं प्यार तुम्ही से करता हूँ
पर अरमान समेटे सब अपने
मैं बुझा बुझा सा दिखता हूँ
जब भी तेरी याद सताती हैं
एक नयी कविता लिखता हूँ।।