19/03/2026
कहानी: "चंद्रवन का रहस्य" (2 मिनट)
बहुत समय पहले, पर्वतों और चांदनी से घिरे एक राज्य का नाम था चंद्रपुर। वहां के लोग चंद्रदेव की पूजा करते थे और मानते थे कि उनकी शांति और सुख चंद्रमा की कृपा से है।
राज्य के पश्चिम में एक रहस्यमयी जंगल था — चंद्रवन। कहा जाता था कि उस जंगल में रात होते ही अजीब रोशनी चमकती है… और जो भी अंदर जाता है, वो बदलकर लौटता है… या फिर कभी लौटता ही नहीं।
इस राज्य के राजा थे वीरेंद्र देव, और उनका बेटा था राजकुमार आर्यन — बहादुर, जिज्ञासु और तर्कशील।
आर्यन को इन कहानियों पर विश्वास नहीं था।
एक रात, पूर्णिमा के दिन, वह अकेले ही चंद्रवन की ओर निकल पड़ा।
जंगल के अंदर जाते ही उसे एक अजीब सी शांति महसूस हुई… और फिर अचानक उसने देखा — एक चमकती हुई चांदी जैसी लोमड़ी (fox)।
आर्यन उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे भागा… और धीरे-धीरे जंगल के सबसे गहरे हिस्से में पहुंच गया।
अचानक लोमड़ी गायब हो गई।
और उसके सामने प्रकट हुई एक रहस्यमयी युवती… सफेद वस्त्र, चांदनी जैसी चमकती आंखें।
उसने अपना नाम बताया — चंद्रलेखा।
आर्यन उसकी सुंदरता और शांति से प्रभावित हो गया और उसे महल ले आया।
धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम हो गया।
लेकिन चंद्रलेखा ने एक शर्त रखी —
👉 "हर अमावस्या की रात, तुम मेरे कक्ष में नहीं आओगे… चाहे कुछ भी हो।"
आर्यन ने प्रेम में यह शर्त मान ली।
लेकिन एक रात… उसे अपने कक्ष से अजीब सी चीख सुनाई दी।
वह खुद को रोक नहीं पाया… और दरवाजा खोल दिया।
अंदर का दृश्य देखकर वह स्तब्ध रह गया।
चंद्रलेखा एक भयानक छाया रूप में बदल चुकी