05/03/2025
बूढ़ा बाप और लापता रिश्ते
"कभी मैं भी इन खेलती मुस्कुराती बाहों में था..."
🌿 बगीचे के एक कोने में बैठा बूढ़ा,
📝 हाथ में एक पुराना ख़त,
जो किसी बेटे की बेपरवाही का गवाह है।
🚶♂️👨👩👧👦 सामने एक खुशहाल परिवार हँसी-ठिठोली में खोया है,
और यहाँ कोई अपने अपनों के लौटने की आस में डूबा।
वक्त की विडंबना
👴 कभी ये बाप था, जिसने बेटे को कंधे पर उठाया था,
आज बेंच के सहारे बैठा, लाठी को थामे रो रहा है।
जिस घर की रौनक हुआ करता था,
आज उसी घर ने दरवाजे तक बंद कर दिए।
कभी बेटा कहता था:
🧒 "बाबा, हम हमेशा साथ रहेंगे!"
आज वही बेटा नज़रों से ओझल हो गया।
🌏 उसकी दुनिया अब बड़ी हो गई –
बाप उसमें कहीं फिट नहीं बैठता।
"क्या तुम्हें मेरी याद नहीं आती?"
👴 "बेटा, एक बार लौट आओ..."
पर रिश्तों के इस बाज़ार में भावनाएँ अब बिकती नहीं,
सिर्फ़ दिखावा होता है।
कड़वी सच्चाई:
👴 बूढ़े माँ-बाप की जगह, वृद्धाश्रम में होती है,
🏠 मगर विरासत की जगह, बेटे के नाम होती है।
क्या सच में बुढ़ापा इतनी बड़ी सज़ा है?
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