05/08/2025
एक अधूरी मोहब्बत
आरव एक शांत और संजीदा लड़का था, जिसे किताबों से प्यार था। वहीं, सान्वी एक चुलबुली, हँसमुख और ज़िंदादिल लड़की थी। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे, पर कभी खास बात नहीं हुई थी। पर एक दिन लाइब्रेरी में किताब ढूंढते वक्त आरव की नज़र सान्वी पर पड़ी, जो किसी किताब को बड़े ध्यान से पढ़ रही थी। पहली बार, आरव को किसी की आँखों में इतनी गहराई नजर आई।
धीरे-धीरे मुलाक़ातें बढ़ने लगीं। लाइब्रेरी, कैंटीन, क्लास – हर जगह दोनों एक-दूसरे का साथ ढूंढने लगे। आरव को सान्वी की बातों में खुशी मिलती थी, तो सान्वी को आरव की खामोशी में सुकून। एक दिन सान्वी ने मुस्कराते हुए पूछा, “तुम इतने चुप क्यों रहते हो?”
आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “शब्दों से ज्यादा, नज़रों में सच होता है।”
उस दिन सान्वी थोड़ी देर चुप रही, लेकिन उसकी मुस्कान और गहरी हो गई। दोनों की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला। आरव ने कभी खुलकर नहीं कहा, लेकिन उसका हर छोटा काम, हर ख्याल सान्वी के लिए होता था।
फिर एक दिन, कॉलेज का आखिरी दिन आ गया। सबने एक-दूसरे से विदा ली। आरव ने सोचा कि आज वो सान्वी को अपने दिल की बात बता देगा। पर जब वो सान्वी के पास पहुँचा, सान्वी ने कहा, “आरव, मैं कल मुंबई जा रही हूँ, आगे की पढ़ाई के लिए। शायद ये हमारी आखिरी मुलाक़ात हो।”
आरव कुछ नहीं कह पाया। सिर्फ मुस्कराया और कहा, “ख्याल रखना।”
सान्वी ने उसकी आंखों में देखा, मानो कुछ समझ रही हो, फिर चली गई।
सालों बीत गए। आरव अब एक लेखक बन चुका था। उसकी किताबें लोगों के दिल छू जाती थीं। लेकिन हर किताब में एक सान्वी होती थी – जो अधूरी रहती थी।
एक दिन एक किताब के साइनिंग इवेंट में, एक लड़की आई। वही मुस्कराहट, वही आँखें। सान्वी थी। उसने किताब पर साइन करवाया और कहा, “अब भी खामोश हो?”
आरव ने उसकी ओर देखा और कहा, “अब भी तुम्हारी नज़रों में सब कुछ कह देता हूँ।”
सान्वी की आँखें नम हो गईं, पर उसने मुस्कराते हुए कहा, “कहानी अधूरी सही… पर खूबसूरत है।”
और फिर, वो भीड़ में खो गई।
आरव वहीं खड़ा रहा, अपनी अधूरी मोहब्बत को एक और किताब का नाम देता हुआ – “एक अधूरी मोहब्बत”।
सान्वी की वो मुस्कराहट… और वो आखिरी शब्द – “कहानी अधूरी सही… पर खूबसूरत है।”
वो पल आरव के सीने में किसी नश्तर की तरह चुभा।
वो तो कहकर गया था कि सान्वी के लिए कुछ कहेगा, मगर अब जब सालों बाद वो मिली…
तो फिर क्यों कुछ कह नहीं पाया?
उस दिन के बाद आरव ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। हर दिन सान्वी की यादों के पन्ने पलटता –
लाइब्रेरी में पहली मुलाकात, बारिश में छाता बाँटना, एक-दूसरे की खामोशियों को समझना…
सब याद आता था, लेकिन अब सब कुछ सिर्फ यादें बनकर रह गया था।
एक दिन, आरव ने हिम्मत की। सोशल मीडिया, दोस्तों, कॉलेज ग्रुप… हर जगह उसे ढूँढने की कोशिश की।
किसी ने कहा वो मुंबई में है, किसी ने कहा शादी कर ली उसने।
पर एक रात, एक अनजान नंबर से कॉल आया।
“क्या आप आरव बोल रहे हैं?”
“जी…”
“मैं सान्वी की छोटी बहन बोल रही हूँ। सान्वी का पिछले महीने एक्सीडेंट में देहांत हो गया…”
आरव की दुनिया वहीं रुक गई।
फोन हाथ से गिर पड़ा।
जिसके लिए उसने किताबें लिखीं, साँसें लीं, जिया…
वो अब इस दुनिया में नहीं थी।
उसे बस एक डायरी मिली – सान्वी की आखिरी याद।
उसमें लिखा था:
> "आरव,
तुम्हारे बिना सब अधूरा है।
मैं हर बार तुम्हारी किताबों में खुद को ढूँढती रही,
और हर बार तुम्हारे शब्दों में खोती रही।
मैंने जाना, मोहब्बत सिर्फ साथ होने से नहीं होती,
मोहब्बत वो होती है, जो दर्द देकर भी जीने की वजह बन जाए।
तुम मेरे दर्द थे… और मेरी सबसे प्यारी वजह भी।"
आरव ने वो डायरी सीने से लगाई, और पहली बार फूट-फूट कर रोया।
अब उसकी हर किताब में मोहब्बत नहीं, सिर्फ दर्द होता था।
वो सान्वी को कभी पा नहीं सका,
पर उसे कभी खोया भी नहीं —
क्योंकि अब सान्वी उसकी हर साँस में बस चुकी थी।
“कुछ मोहब्बतें कब्र से भी आगे चलती हैं…
जिन्हें कोई जुदाई खत्म नहीं कर सकती।”