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Sarjana trust सर्जना के ऊद्धेश्य खाली सृजन ही बा �

भोजपुरी कला यात्रा सर्जना परिवार के ओर से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विनम्र श्रद्धांजलि 𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂪𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰 𑂮𑂩𑂹𑂔𑂢𑂰 𑂣𑂩𑂱𑂫𑂰𑂩 𑂍...
04/08/2025

भोजपुरी कला यात्रा सर्जना परिवार के ओर से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विनम्र श्रद्धांजलि
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दिशोम गुरु शिबू सोरेन
𑂠𑂱𑂬𑂷𑂧 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂬𑂱𑂥𑂴 𑂮𑂷𑂩𑂵𑂢
11 जनउरी 1944 / 04 अगस्त 2025

दिशोम गुरु मतलब शिबू सोरेन उनकर जन्म 11 जनउरी 1944 के रामगढ़ के नेमरा गांव में सोबरन मांझी के घरे भईल रहे।उनकर बाबू जी सोबरन मांझी के गिनती ओह इलाका में सबसे पढ़ल लिखल आदिवासी के रूप में होत रहे। बहुते शांत स्वाभाव के गुरु जी रही, बाकी सूदखोरों आ महजन लोग से उनकर एकदमे ना बनत रहे।कहे से की ओह घरी सूदखोरों आ महाजन लोग आदिवासि लोगन के प्रति अच्छा बर्ताव ना रहे।
सोबरन मांझी महाजन लोगन के खिलाफ आंदोलन छेड़ले।
कहल जाला कि ओह घरी महाजन आदिवासि लोगन के कर्जा के जाल में फंसाके ओकर डेढ़ गुणा अधिक वसूलत रहे लोग, सूद ना चुकावे प उनकर जमीन छीन लेत रहे लोग। सोबरन मांझी हमेशा एकर बिरोध करत रहन आ उ आदिवासि लोगन के जागरूक करत रहले। उ आदिवासि लोगन के पढ़ाई खातिर प्रेरित रहले। उनकर एही बिचार से महाजन आ सूदखोर लोगन के आंख के किरकिरी बन गईले। शिबू सोरेन ओह घरी होस्टल में रह के पढ़ाई करत रहले।
27 नवंबर 1957 के सोबरन सोरेन मांझी के हत्या के हत्या कर दिहल गईल। बाबू जी के हत्या के बाद शिबू सोरेन के पढ़ाई में मन ना लगल आ उ पढ़ाई छोड़ दिहले। ओही घरी से उहो महजन के खिलाफ आवाज उठावे लगले। तब उ आदिवासी समाज के एकजुट कईले आ महाजन आ सुदखोर लोगन के खिलाफ बिगुल फूंक दिहले। उ धनकटनी आंदोलन शुरू कईले। जवना में उनकर साथी जबरन महजनों के धान काट के ले जाए लगले। जवन खेत में धान काटें होत रहे ओकर चारों ओर आदिवासी जुवा तीर धनुष लेके खाड़ हो जात रहे। धीरे धीरे उनकर प्रभाव बढ़े लगाल। आदिवासी समाज के लोगन में इनका में अपना नेता दिखाई देबे लगल, जे उ लोग के सूदखोरन आ महाजन से आजादी दिया सकेला। जवना के बाद लोग उनका दिशोम गुरु क उपाधि दिहलस। संताली में दिशोम गुरु के मतलब होला देश के गुरु, बाद में बिनोद बिहारी महतो आ एके राय आंदोलन से जुड़ले। धीरे धीरे उ आपन राजनीतिक पार्टी के जरूरत महसूस कईले।
4 फरवरी 1972 के शिबू सोरेन आ उनकर साथि लोग बिनोद बिहारी महतो के घरे बैठक कईलस बैठक में नया संगठन बनावें के फैसला लिआईल। अंत में सर्व सम्मति से पार्टी के नाव झारखंड मुक्ति मोर्चा राखे के फैसला लिहल गईल जवना में बिनोद बिहारी महतो के अध्यक्ष आ शिबू सोरेन के महासचिव चुनल गईल। ओह घरी सूदखोरन के खिलाफ आंदोलन करे क चलते शिबू सोरेन प कईगो केस दर्ज हो चुकल रहे, पुलिस उनका के गिरफ्तार करे खातिर छापेमारी करत रहे, बाकी शिबू सोरेन हरेक बेर पुलिस के चकमा देके फरार हो जात रहले। नया संगठन बनला के बाद से शिबू सोरेन के प्रसिद्ध हो गईल रहन। 1980 में उ पहिला चुनाव लड़ले बाकी हार गईले, फेर 3 साल बाद मध्यवधि चुनाव में उनका जीत हासिल भईल साल 1991 में उनकर पार्टी के बिहार विधानसभा चुनाव के खातिर कांग्रेस से गठबंधन भईल जवना में झामुमो के प्रदर्शन बहुते शानदार रहल, तब से लेके आज तले झामुमो के ताकत लगातार बढ़त गईल। उ तीन बेर झारखंड के मुख्यमंत्री रहले।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के अंतिम जोहार

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21/07/2025

𑂍𑂰𑂁𑂫𑂙़ 𑂍𑂵 𑂧𑂯𑂰𑂞𑂧
*कांवड़ के महातम*

अजगैबीनाथ के नगरी सुल्तानगंज में गंगा नदी उत्तरवाहिनी (दक्खिन से उत्तर) बहेली। पुरान मान्यता बा कि जब राजा सगर के साठ हजार लइकन के उद्धार खातिर उनकरे वंशज राजा भगीरथ एहिजा से गङ्गा के लेके आगे बढ़त रहन। एही क्षेत्र में ऋषि जाह्न्वी तपस्या में लीं रहलें। गङ्गा जी के धार तेज रहे हाहाकार करत गङ्गा आएगी बढ़त रही। ई शोर गुल से जाह्न्वी ऋषि के तपस्या भंग हो गइल आ उ खिसिया के गङ्गा जी के पी गइले। बाद में भगीरथ के मान मनौअल आ प्रार्थना सुन के ऋषि आपन जांघ चीर के गङ्गा के बाहर निकलले। एहिजा गङ्गा जी के जाह्न्वी कहल जाला। मान्यता इहो बा कि एहिजे से भगवान राम पहिला बेर कांवड़ भर के भोलेनाथ पर चढ़इले रहलें।
शिवभक्त लोग एह कथा के बाँचेला आ सुल्तानगंज से गङ्गाजल कांवड़ में उठाके 108 किलोमीटर दूर पैदल बाबा के धाम देवघर पहुंचेला। सदियन से ई परम्परा आजो चालु बा।
𑂍𑂰𑂁𑂫𑂙़ 𑂍𑂵 𑂧𑂯𑂰𑂞𑂧

𑂃𑂔𑂏𑂶𑂥𑂲𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂢𑂏𑂩𑂲 𑂮𑂳𑂪𑂹𑂞𑂰𑂢𑂏𑂁𑂔 𑂧𑂵𑂁 𑂏𑂁𑂏𑂰 𑂢𑂠𑂲 𑂇𑂞𑂹𑂞𑂩𑂫𑂰𑂯𑂱𑂢𑂲 (𑂠𑂍𑂹𑂎𑂱𑂢 𑂮𑂵 𑂇𑂞𑂹𑂞𑂩) 𑂥𑂯𑂵𑂪𑂲। 𑂣𑂳𑂩𑂰𑂢 𑂧𑂰𑂢𑂹𑂨𑂞𑂰 𑂥𑂰 𑂍𑂱 𑂔𑂥 𑂩𑂰𑂔𑂰 𑂮𑂏𑂩 𑂍𑂵 𑂮𑂰𑂘 𑂯𑂔𑂰𑂩 𑂪𑂅𑂍𑂢 𑂍𑂵 𑂇𑂠𑂹𑂡𑂰𑂩 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂇𑂢𑂍𑂩𑂵 𑂫𑂁𑂬𑂔 𑂩𑂰𑂔𑂰 𑂦𑂏𑂲𑂩𑂟 𑂉𑂯𑂱𑂔𑂰 𑂮𑂵 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰 𑂍𑂵 𑂪𑂵𑂍𑂵 𑂄𑂏𑂵 𑂥ढ़𑂞 𑂩𑂯𑂢। 𑂉𑂯𑂲 𑂍𑂹𑂭𑂵𑂞𑂹𑂩 𑂧𑂵𑂁 𑂩𑂱𑂭𑂱 𑂔𑂰𑂯𑂹𑂢𑂹𑂫𑂲 𑂞𑂣𑂮𑂹𑂨𑂰 𑂧𑂵𑂁 𑂪𑂲𑂁 𑂩𑂯𑂪𑂵𑂁। 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂡𑂰𑂩 𑂞𑂵𑂔 𑂩𑂯𑂵 𑂯𑂰𑂯𑂰𑂍𑂰𑂩 𑂍𑂩𑂞 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰 𑂄𑂉𑂏𑂲 𑂥ढ़𑂞 𑂩𑂯𑂲। 𑂆 𑂬𑂷𑂩 𑂏𑂳𑂪 𑂮𑂵 𑂔𑂰𑂯𑂹𑂢𑂹𑂫𑂲 𑂩𑂱𑂭𑂱 𑂍𑂵 𑂞𑂣𑂮𑂹𑂨𑂰 𑂦𑂁𑂏 𑂯𑂷 𑂏𑂅𑂪 𑂄 𑂇 𑂎𑂱𑂮𑂱𑂨𑂰 𑂍𑂵 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂣𑂲 𑂏𑂅𑂪𑂵। 𑂥𑂰𑂠 𑂧𑂵𑂁 𑂦𑂏𑂲𑂩𑂟 𑂍𑂵 𑂧𑂰𑂢 𑂧𑂢𑂸𑂃𑂪 𑂄 𑂣𑂹𑂩𑂰𑂩𑂹𑂟𑂢𑂰 𑂮𑂳𑂢 𑂍𑂵 𑂩𑂱𑂭𑂱 𑂄𑂣𑂢 𑂔𑂰𑂁𑂐 𑂒𑂲𑂩 𑂍𑂵 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂯𑂩 𑂢𑂱𑂍𑂪𑂪𑂵। 𑂉𑂯𑂱𑂔𑂰 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂔𑂰𑂯𑂹𑂢𑂹𑂫𑂲 𑂍𑂯𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰। 𑂧𑂰𑂢𑂹𑂨𑂞𑂰 𑂅𑂯𑂷 𑂥𑂰 𑂍𑂱 𑂉𑂯𑂱𑂔𑂵 𑂮𑂵 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂩𑂰𑂧 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂰 𑂥𑂵𑂩 𑂍𑂰𑂁𑂫ड़ 𑂦𑂩 𑂍𑂵 𑂦𑂷𑂪𑂵𑂢𑂰𑂟 𑂣𑂩 𑂒ढ़𑂅𑂪𑂵 𑂩𑂯𑂪𑂵𑂁।
𑂬𑂱𑂫𑂦𑂍𑂹𑂞 𑂪𑂷𑂏 𑂉𑂯 𑂍𑂟𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂀𑂒𑂵𑂪𑂰 𑂄 𑂮𑂳𑂪𑂹𑂞𑂰𑂢𑂏𑂁𑂔 𑂮𑂵 𑂏𑂑𑂹𑂏𑂰𑂔𑂪 𑂍𑂰𑂁𑂫ड़ 𑂧𑂵𑂁 𑂇𑂘𑂰𑂍𑂵 108 𑂍𑂱𑂪𑂷𑂧𑂲𑂗𑂩 𑂠𑂴𑂩 𑂣𑂶𑂠𑂪 𑂥𑂰𑂥𑂰 𑂍𑂵 𑂡𑂰𑂧 𑂠𑂵𑂫𑂐𑂩 𑂣𑂯𑂳𑂁𑂒𑂵𑂪𑂰। 𑂮𑂠𑂱𑂨𑂢 𑂮𑂵 𑂆 𑂣𑂩𑂧𑂹𑂣𑂩𑂰 𑂄𑂔𑂷 𑂒𑂰𑂪𑂳 𑂥𑂰।

- शशि रंजन मिश्र, सर्जना परिवार

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13/07/2025

𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂪𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰, 𑂮𑂩𑂹𑂔𑂢𑂰 𑂣𑂩𑂱𑂫𑂰𑂩 𑂍𑂵 𑂋𑂩 𑂮𑂵 𑂮𑂰𑂫𑂢 𑂍𑂵 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂰 𑂮𑂷𑂧𑂰𑂩𑂲 𑂣 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂩𑂫𑂰 𑂮𑂦𑂵 𑂣 𑂄𑂣𑂢 𑂍𑂱𑂩𑂱𑂣𑂰 𑂥𑂩𑂮𑂰𑂫𑂮।

भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना परिवार के ओर से सावन के पहिला सोमारी प भगवान भोले नाथ रवा सभे प आपन किरिपा बरसावस।

गुप्तेश्वर (गुप्ता धाम) धाम के गुफा में भगवान शिव के महिमा के बखान आदिकाल से बा। कैमूर पहाड़ी के प्राकृतिक सुंदरता में के बिचे एह गुफा में भोले नाथ के शिवलिंग प जल चढ़वला के बाद भक्त लोगन के सभ मनोकामना पूरा हो जाला। कहल जाला की कैलाश पर्वत प माई पार्वती के साथ विराजमान भगवान शिव जब भस्मासुर के तपस्या से खुश होके उकरा वरदान दिहले की तु जेकर माथा प आपन हाथ रख देब उ जर के भस्म हो जाई। भस्मासुर माई पार्वती के सुन्दरता प मोहित होके शिव से मिलल वरदान के परीक्षा लेवे खातिर उ भोले नाथ के माथा प हाथ रखें खातिर दौड़ल। तब भगवान भोले नाथ भागत भागत एही गुफा में लुका गईले। तीनों लोक में हाहाकार मच गई गईल। तब मय देवता लोग भगवान विष्णु के भिरी जाकें गोहार कईल लोग। हे भगवान विष्णु, भोले नाथ के जान खतरा में बा। देखी आ भस्मासुर के संघार कर के भोले नाथ के एह मजधार से उबारीं। तब भगवान विष्णु मोहिनी के रूप धारण कर के गुफा के भिरी गईनी। भस्मासुर मोहिनी के देख के मोहित हो गई गईल आ मोहिनी के बिआह के प्रस्ताव दिहलस तब मोहिनी कहली की हमार मरद उहे बनीं जे नाच के ज्ञाता होई। तब भस्मासुर नाचे लागल आ नाचत नाचत आपन हाथ माथा रखलस तब उ ओहिजे जर के भस्म हो गई गईल। तब भोलेदानी बाहर निकलनी। तब से एह गुफा मे भोले नाथ के साक्षात बास मानल जाला। भर सावन एहिजा भगत लोग के मेला लगल रहेला। शिवरात्रि के दिन बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आ नेपाल से हजारों शिवभक्त लोग आके जलाभिषेक करेला। बक्सर से गंगाजल लेके गुप्ता धाम पहुंचे वाला भगत लोगन के रेला लागल रहेला। जिला मुख्यालय सासाराम से 65 किमी के दूरी बा। इ गुफा तक पहुंचे के रसता बहुते दुर्गम बा एहिजा पहुंचने के खातिर रेहल, पनारी घाट आ उगहनी घाट से तीनगो रास्ता बा जवन विकट आ दुर्गम बा। दुर्गावती नदी के पांच बेर पार करके पांचगो पहाड़ के यात्रा कईला के बाद लोग इहवा पहुंचेला।
जय भोले नाथ

𑂏𑂳𑂣𑂹𑂞𑂵𑂬𑂹𑂫𑂩 (𑂏𑂳𑂣𑂹𑂞𑂰 𑂡𑂰𑂧) 𑂡𑂰𑂧 𑂍𑂵 𑂏𑂳𑂤𑂰 𑂧𑂵𑂁 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂬𑂱𑂫 𑂍𑂵 𑂧𑂯𑂱𑂧𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂎𑂰𑂢 𑂄𑂠𑂱𑂍𑂰𑂪 𑂮𑂵 𑂥𑂰। 𑂍𑂶𑂧𑂴𑂩 𑂣𑂯𑂰𑂙़𑂲 𑂍𑂵 𑂣𑂹𑂩𑂰𑂍ृ𑂞𑂱𑂍 𑂮𑂳𑂁𑂠𑂩𑂞𑂰 𑂧𑂵𑂁 𑂍𑂵 𑂥𑂱𑂒𑂵 𑂉𑂯 𑂏𑂳𑂤𑂰 𑂧𑂵𑂁 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂬𑂱𑂫𑂪𑂱𑂁𑂏 𑂣 𑂔𑂪 𑂒𑂛़𑂫𑂪𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠 𑂦𑂍𑂹𑂞 𑂪𑂷𑂏𑂢 𑂍𑂵 𑂮𑂦 𑂧𑂢𑂷𑂍𑂰𑂧𑂢𑂰 𑂣𑂴𑂩𑂰 𑂯𑂷 𑂔𑂰𑂪𑂰। 𑂍𑂯𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰 𑂍𑂲 𑂍𑂶𑂪𑂰𑂬 𑂣𑂩𑂹𑂫𑂞 𑂣 𑂧𑂰𑂆 𑂣𑂰𑂩𑂹𑂫𑂞𑂲 𑂍𑂵 𑂮𑂰𑂟 𑂫𑂱𑂩𑂰𑂔𑂧𑂰𑂢 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂬𑂱𑂫 𑂔𑂥 𑂦𑂮𑂹𑂧𑂰𑂮𑂳𑂩 𑂍𑂵 𑂞𑂣𑂮𑂹𑂨𑂰 𑂮𑂵 𑂎𑂳𑂬 𑂯𑂷𑂍𑂵 𑂇𑂍𑂩𑂰 𑂫𑂩𑂠𑂰𑂢 𑂠𑂱𑂯𑂪𑂵 𑂍𑂲 𑂞𑂳 𑂔𑂵𑂍𑂩 𑂧𑂰𑂟𑂰 𑂣 𑂄𑂣𑂢 𑂯𑂰𑂟 𑂩𑂎 𑂠𑂵𑂥 𑂇 𑂔𑂩 𑂍𑂵 𑂦𑂮𑂹𑂧 𑂯𑂷 𑂔𑂰𑂆। 𑂦𑂮𑂹𑂧𑂰𑂮𑂳𑂩 𑂧𑂰𑂆 𑂣𑂰𑂩𑂹𑂫𑂞𑂲 𑂍𑂵 𑂮𑂳𑂢𑂹𑂠𑂩𑂞𑂰 𑂣 𑂧𑂷𑂯𑂱𑂞 𑂯𑂷𑂍𑂵 𑂬𑂱𑂫 𑂮𑂵 𑂧𑂱𑂪𑂪 𑂫𑂩𑂠𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂣𑂩𑂲𑂍𑂹𑂭𑂰 𑂪𑂵𑂫𑂵 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂇 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂧𑂰𑂟𑂰 𑂣 𑂯𑂰𑂟 𑂩𑂎𑂵𑂁 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂠𑂸𑂙़𑂪। 𑂞𑂥 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂦𑂰𑂏𑂞 𑂦𑂰𑂏𑂞 𑂉𑂯𑂲 𑂏𑂳𑂤𑂰 𑂧𑂵𑂁 𑂪𑂳𑂍𑂰 𑂏𑂆𑂪𑂵। 𑂞𑂲𑂢𑂷𑂁 𑂪𑂷𑂍 𑂧𑂵𑂁 𑂯𑂰𑂯𑂰𑂍𑂰𑂩 𑂧𑂒 𑂏𑂆 𑂏𑂆𑂪। 𑂞𑂥 𑂧𑂨 𑂠𑂵𑂫𑂞𑂰 𑂪𑂷𑂏 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂫𑂱𑂭𑂹𑂝𑂳 𑂍𑂵 𑂦𑂱𑂩𑂲 𑂔𑂰𑂍𑂵𑂁 𑂏𑂷𑂯𑂰𑂩 𑂍𑂆𑂪 𑂪𑂷𑂏। 𑂯𑂵 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂫𑂱𑂭𑂹𑂝𑂳, 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂔𑂰𑂢 𑂎𑂞𑂩𑂰 𑂧𑂵𑂁 𑂥𑂰। 𑂠𑂵𑂎𑂲 𑂄 𑂦𑂮𑂹𑂧𑂰𑂮𑂳𑂩 𑂍𑂵 𑂮𑂁𑂐𑂰𑂩 𑂍𑂩 𑂍𑂵 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂉𑂯 𑂧𑂔𑂡𑂰𑂩 𑂮𑂵 𑂇𑂥𑂰𑂩𑂲𑂁। 𑂞𑂥 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂫𑂱𑂭𑂹𑂝𑂳 𑂧𑂷𑂯𑂱𑂢𑂲 𑂍𑂵 𑂩𑂴𑂣 𑂡𑂰𑂩𑂝 𑂍𑂩 𑂍𑂵 𑂏𑂳𑂤𑂰 𑂍𑂵 𑂦𑂱𑂩𑂲 𑂏𑂆𑂢𑂲। 𑂦𑂮𑂹𑂧𑂰𑂮𑂳𑂩 𑂧𑂷𑂯𑂱𑂢𑂲 𑂍𑂵 𑂠𑂵𑂎 𑂍𑂵 𑂧𑂷𑂯𑂱𑂞 𑂯𑂷 𑂏𑂆 𑂏𑂆𑂪 𑂄 𑂧𑂷𑂯𑂱𑂢𑂲 𑂍𑂵 𑂥𑂱𑂄𑂯 𑂍𑂵 𑂣𑂹𑂩𑂮𑂹𑂞𑂰𑂫 𑂠𑂱𑂯𑂪𑂮 𑂞𑂥 𑂧𑂷𑂯𑂱𑂢𑂲 𑂍𑂯𑂪𑂲 𑂍𑂲 𑂯𑂧𑂰𑂩 𑂧𑂩𑂠 𑂇𑂯𑂵 𑂥𑂢𑂲𑂁 𑂔𑂵 𑂢𑂰𑂒 𑂍𑂵 𑂔𑂹𑂖𑂰𑂞𑂰 𑂯𑂷𑂆। 𑂞𑂥 𑂦𑂮𑂹𑂧𑂰𑂮𑂳𑂩 𑂢𑂰𑂒𑂵 𑂪𑂰𑂏𑂪 𑂄 𑂢𑂰𑂒𑂞 𑂢𑂰𑂒𑂞 𑂄𑂣𑂢 𑂯𑂰𑂟 𑂧𑂰𑂟𑂰 𑂩𑂎𑂪𑂮 𑂞𑂥 𑂇 𑂋𑂯𑂱𑂔𑂵 𑂔𑂩 𑂍𑂵 𑂦𑂮𑂹𑂧 𑂯𑂷 𑂏𑂆 𑂏𑂆𑂪। 𑂞𑂥 𑂦𑂷𑂪𑂵𑂠𑂰𑂢𑂲 𑂥𑂰𑂯𑂩 𑂢𑂱𑂍𑂪𑂢𑂲। 𑂞𑂥 𑂮𑂵 𑂉𑂯 𑂏𑂳𑂤𑂰 𑂧𑂵 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂮𑂰𑂍𑂹𑂭𑂰𑂞 𑂥𑂰𑂮 𑂧𑂰𑂢𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰। 𑂦𑂩 𑂮𑂰𑂫𑂢 𑂉𑂯𑂱𑂔𑂰 𑂦𑂏𑂞 𑂪𑂷𑂏 𑂍𑂵 𑂧𑂵𑂪𑂰 𑂪𑂏𑂪 𑂩𑂯𑂵𑂪𑂰। 𑂬𑂱𑂫𑂩𑂰𑂞𑂹𑂩𑂱 𑂍𑂵 𑂠𑂱𑂢 𑂥𑂱𑂯𑂰𑂩, 𑂕𑂰𑂩𑂎𑂁𑂙, 𑂇𑂞𑂹𑂞𑂩 𑂣𑂹𑂩𑂠𑂵𑂬, 𑂧𑂡𑂹𑂨 𑂣𑂹𑂩𑂠𑂵𑂬, 𑂓𑂞𑂹𑂞𑂲𑂮𑂏𑂛़ 𑂄 𑂢𑂵𑂣𑂰𑂪 𑂮𑂵 𑂯𑂔𑂰𑂩𑂷𑂁 𑂬𑂱𑂫𑂦𑂍𑂹𑂞 𑂪𑂷𑂏 𑂄𑂍𑂵 𑂔𑂪𑂰𑂦𑂱𑂭𑂵𑂍 𑂍𑂩𑂵𑂪𑂰। 𑂥𑂍𑂹𑂮𑂩 𑂮𑂵 𑂏𑂁𑂏𑂰𑂔𑂪 𑂪𑂵𑂍𑂵 𑂏𑂳𑂣𑂹𑂞𑂰 𑂡𑂰𑂧 𑂣𑂯𑂳𑂁𑂒𑂵 𑂫𑂰𑂪𑂰 𑂦𑂏𑂞 𑂪𑂷𑂏𑂢 𑂍𑂵 𑂩𑂵𑂪𑂰 𑂪𑂰𑂏𑂪 𑂩𑂯𑂵𑂪𑂰। 𑂔𑂱𑂪𑂰 𑂧𑂳𑂎𑂹𑂨𑂰𑂪𑂨 𑂮𑂰𑂮𑂰𑂩𑂰𑂧 𑂮𑂵 65 𑂍𑂱𑂧𑂲 𑂍𑂵 𑂠𑂴𑂩𑂲 𑂥𑂰। 𑂅 𑂏𑂳𑂤𑂰 𑂞𑂍 𑂣𑂯𑂳𑂁𑂒𑂵 𑂍𑂵 𑂩𑂮𑂞𑂰 𑂥𑂯𑂳𑂞𑂵 𑂠𑂳𑂩𑂹𑂏𑂧 𑂥𑂰 𑂉𑂯𑂱𑂔𑂰 𑂣𑂯𑂳𑂁𑂒𑂢𑂵 𑂍𑂵 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂩𑂵𑂯𑂪, 𑂣𑂢𑂰𑂩𑂲 𑂐𑂰𑂗 𑂄 𑂇𑂏𑂯𑂢𑂲 𑂐𑂰𑂗 𑂮𑂵 𑂞𑂲𑂢𑂏𑂷 𑂩𑂰𑂮𑂹𑂞𑂰 𑂥𑂰 𑂔𑂫𑂢 𑂫𑂱𑂍𑂗 𑂄 𑂠𑂳𑂩𑂹𑂏𑂧 𑂥𑂰। 𑂠𑂳𑂩𑂹𑂏𑂰𑂫𑂞𑂲 𑂢𑂠𑂲 𑂍𑂵 𑂣𑂰𑂁𑂒 𑂥𑂵𑂩 𑂣𑂰𑂩 𑂍𑂩𑂍𑂵 𑂣𑂰𑂁𑂒𑂏𑂷 𑂣𑂯𑂰𑂙़ 𑂍𑂵 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰 𑂍𑂆𑂪𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠 𑂪𑂷𑂏 𑂅𑂯𑂫𑂰 𑂣𑂯𑂳𑂁𑂒𑂵𑂪𑂰।
𑂔𑂨 𑂦𑂷𑂪𑂵 𑂢𑂰𑂟

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𝑭𝒐𝒍𝒍𝒐𝒘𝒆𝒓𝒔.

𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂪𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰, 𑂮𑂩𑂹𑂔𑂢𑂰 𑂣𑂩𑂱𑂫𑂰𑂩 𑂍𑂵 𑂋𑂩 𑂮𑂵 𑂦𑂱𑂎𑂰𑂩𑂲 𑂘𑂰𑂍𑂳𑂩 𑂍𑂵 𑂣𑂳𑂝𑂹𑂨𑂞𑂱𑂟𑂱 𑂣 𑂥𑂵𑂩 𑂥𑂵𑂩 𑂢𑂧𑂢 𑂥𑂰। भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना परिवार...
10/07/2025

𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂪𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰, 𑂮𑂩𑂹𑂔𑂢𑂰 𑂣𑂩𑂱𑂫𑂰𑂩 𑂍𑂵 𑂋𑂩 𑂮𑂵 𑂦𑂱𑂎𑂰𑂩𑂲 𑂘𑂰𑂍𑂳𑂩 𑂍𑂵 𑂣𑂳𑂝𑂹𑂨𑂞𑂱𑂟𑂱 𑂣 𑂥𑂵𑂩 𑂥𑂵𑂩 𑂢𑂧𑂢 𑂥𑂰।

भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना परिवार के ओर से भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि प बेर बेर नमन बा।

भिखारी ठाकुर के जन्म के लेके यशवंत मिश्रा के आपन मत बा।
देखकर आ समझल जाव।

अपना जनम प भिखारी ठाकुर लिखत बानी कि -

बारह सौ पंचानवे जहिया , सुदी पूस पंचिमी रहे तहिया ।
रोज सोमार ठीक दुपहरिया, जन्म भइल रहे ओहि घरिया ॥

बारह सौ पंचानबे साल कहावल जब ।
कुतुबपुर के कहत भिखारी जन्म हमार तब ।
पुष महिना शुक्ल पक्ष मे पंचमी रोज सोमार ।
कहत भिखारी बारह बजे दिन मे जनम हमार ।
तेरह स सनतावन साल ह आज ह मंगल दिन ।
पंचमी कृष्ण आसाढ भइल मोर बासठ वर्ष के सीन ।

तदनुसार 1295 फसली आ सन्‌ 1887 ई. पुस महीना के शुक्ल पक्ष के सोमार के दिने 12 बजे हमार जनम भईल रहे ।

अब अगर 1887 के कैलेंडर के देखल जाव त 18 दिसंबर के एतवार (sunday) रहे, सोमार ना.
कैलेंडर आ पञ्चांग के अनुसार पुस महिना शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि आ सोमवार दिन 19 दिसंबर के रहे.
एसे हम इहे कहेम कि भिखारी ठाकुर जी के जयंती 19 दिसम्बर के मनावल जाव, 18 के

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10/07/2025

𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂪𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰, 𑂮𑂩𑂹𑂔𑂢𑂰 𑂣𑂩𑂱𑂫𑂰𑂩 𑂍𑂵 𑂋𑂩 𑂮𑂵 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂣 𑂧𑂨 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂔𑂲 𑂪𑂷𑂏 𑂍𑂵 𑂣𑂹𑂩𑂝𑂰𑂧 𑂥𑂰।
भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना परिवार के ओर से गुरु पूर्णिमा प मय गुरु जी लोग के प्रणाम बा।
गुरु पूर्णिमा हिंदू लोगन के बहुते महातम के परब हऽ। हिंदू पंचांग के हिसाब से आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के गुरु पूर्णिमा मनावल जला। एही दिन महर्षि वेदव्यास के जन्म भईल रहे। एह से एकरा के व्यास पूर्णिमा भी कहल जाला।
बौद्ध धरम आ जैनों धरम मे एह दिन के विशेष महातम बा।
बौद्ध धरम के माने वाला लोग एह दिन के भगवान बुद्ध के सम्मान में मनावेला, काहे से कि असन मानल जाला कि ज्ञान मिलला के बाद एही दिन उ सारनाथ में अपन पहिला उपदेश दिहले रहन।
जैन धरम के माने वाला लोग भगवान महावीर आ उनकर चेला गौतम स्वामी के सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनावे ला लोग।
आज के दिन गुरु लोग के दछिणा देवे के रेवाज हऽ: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के आपन सामर्थ के हिसाब से दछिणा के रूप में धन, कपड़ा-लाता, अन्न के दान करे गईल बा।
गुरुदेव के चरण में प्रणाम बा।
जय गुरुदेव

𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂯𑂱𑂁𑂠𑂴 𑂪𑂷𑂏𑂢 𑂍𑂵 𑂥𑂯𑂳𑂞𑂵 𑂧𑂯𑂰𑂞𑂧 𑂍𑂵 𑂣𑂩𑂥 𑂯ऽ। 𑂯𑂱𑂁𑂠𑂴 𑂣𑂁𑂒𑂰𑂁𑂏 𑂍𑂵 𑂯𑂱𑂮𑂰𑂥 𑂮𑂵 𑂄𑂭𑂰𑂛़ 𑂬𑂳𑂍𑂹𑂪 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂍𑂵 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂧𑂢𑂰𑂫𑂪 𑂔𑂪𑂰। 𑂉𑂯𑂲 𑂠𑂱𑂢 𑂧𑂯𑂩𑂹𑂭𑂱 𑂫𑂵𑂠𑂫𑂹𑂨𑂰𑂮 𑂍𑂵 𑂔𑂢𑂹𑂧 𑂦𑂆𑂪 𑂩𑂯𑂵। 𑂉𑂯 𑂮𑂵 𑂉𑂍𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂫𑂹𑂨𑂰𑂮 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂦𑂲 𑂍𑂯𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰।
𑂥𑂸𑂠𑂹𑂡 𑂡𑂩𑂧 𑂄 𑂔𑂶𑂢𑂷𑂁 𑂡𑂩𑂧 𑂧𑂵 𑂉𑂯 𑂠𑂱𑂢 𑂍𑂵 𑂫𑂱𑂬𑂵𑂭 𑂧𑂯𑂰𑂞𑂧 𑂥𑂰।
𑂥𑂸𑂠𑂹𑂡 𑂡𑂩𑂧 𑂍𑂵 𑂧𑂰𑂢𑂵 𑂫𑂰𑂪𑂰 𑂪𑂷𑂏 𑂉𑂯 𑂠𑂱𑂢 𑂍𑂵 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂥𑂳𑂠𑂹𑂡 𑂍𑂵 𑂮𑂧𑂹𑂧𑂰𑂢 𑂧𑂵𑂁 𑂧𑂢𑂰𑂫𑂵𑂪𑂰, 𑂍𑂰𑂯𑂵 𑂮𑂵 𑂍𑂱 𑂃𑂮𑂢 𑂧𑂰𑂢𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰 𑂍𑂱 𑂔𑂹𑂖𑂰𑂢 𑂧𑂱𑂪𑂪𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠 𑂉𑂯𑂲 𑂠𑂱𑂢 𑂇 𑂮𑂰𑂩𑂢𑂰𑂟 𑂧𑂵𑂁 𑂃𑂣𑂢 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂰 𑂇𑂣𑂠𑂵𑂬 𑂠𑂱𑂯𑂪𑂵 𑂩𑂯𑂢।
𑂔𑂶𑂢 𑂡𑂩𑂧 𑂍𑂵 𑂧𑂰𑂢𑂵 𑂫𑂰𑂪𑂰 𑂪𑂷𑂏 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂧𑂯𑂰𑂫𑂲𑂩 𑂄 𑂇𑂢𑂍𑂩 𑂒𑂵𑂪𑂰 𑂏𑂸𑂞𑂧 𑂮𑂹𑂫𑂰𑂧𑂲 𑂍𑂵 𑂮𑂧𑂹𑂧𑂰𑂢 𑂧𑂵𑂁 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂧𑂢𑂰𑂫𑂵 𑂪𑂰 𑂪𑂷𑂏।
𑂄𑂔 𑂍𑂵 𑂠𑂱𑂢 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂪𑂷𑂏 𑂍𑂵 𑂠𑂓𑂱𑂝𑂰 𑂠𑂵𑂫𑂵 𑂍𑂵 𑂩𑂵𑂫𑂰𑂔 𑂯ऽ: 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂍𑂵 𑂠𑂱𑂢 𑂏𑂳𑂩𑂳 𑂍𑂵 𑂄𑂣𑂢 𑂮𑂰𑂧𑂩𑂹𑂟 𑂍𑂵 𑂯𑂱𑂮𑂰𑂥 𑂮𑂵 𑂠𑂓𑂱𑂝𑂰 𑂍𑂵 𑂩𑂴𑂣 𑂧𑂵𑂁 𑂡𑂢, 𑂍𑂣𑂙़𑂰-𑂪𑂰𑂞𑂰, 𑂃𑂢𑂹𑂢 𑂍𑂵 𑂠𑂰𑂢 𑂍𑂩𑂵 𑂏𑂆𑂪 𑂥𑂰।
𑂏𑂳𑂩𑂳𑂠𑂵𑂫 𑂍𑂵 𑂒𑂩𑂝 𑂧𑂵𑂁 𑂣𑂹𑂩𑂝𑂰𑂧 𑂥𑂰।
𑂔𑂨 𑂏𑂳𑂩𑂳𑂠𑂵𑂫

Information & Public Relations Department, Government of Bihar
CMO Bihar
Department of Art, Culture & Youth, Gov. Of Bihar

Information & Public Relations Department, Government of Jharkhand
CMODepartment of Art, Culture & Youth, Gov. Of Jharkhand
CMO Jharkhand

Information & Public Relations Department, Government of Uttar Pradesh
CMO Uttar Pradesh
Department of Art, Culture & Youth, Gov. Of Uttar Pradesh

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भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना परिवार के ओर से रथ जतरा के पुरा भईला प भगवान जगन्नाथ बहिन सुभद्रा आ श्री बलभद्र जी के किरिपा ...
05/07/2025

भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना परिवार के ओर से रथ जतरा के पुरा भईला प भगवान जगन्नाथ बहिन सुभद्रा आ श्री बलभद्र जी के किरिपा सकल जहान प बरसत रहो।

𑂦𑂷𑂔𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂪𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰, 𑂮𑂩𑂹𑂔𑂢𑂰 𑂣𑂩𑂱𑂫𑂰𑂩 𑂍𑂵 𑂋𑂩 𑂮𑂵 𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂣𑂳𑂩𑂰 𑂦𑂆𑂪𑂰 𑂣 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂥𑂯𑂱𑂢 𑂮𑂳𑂦𑂠𑂹𑂩𑂰 𑂄 𑂬𑂹𑂩𑂲 𑂥𑂪𑂦𑂠𑂹𑂩 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂍𑂱𑂩𑂱𑂣𑂰 𑂮𑂍𑂪 𑂔𑂯𑂰𑂢 𑂣 𑂥𑂩𑂮𑂞 𑂩𑂯𑂷।

आज भगवान जगन्नाथ के रथ जतरा पूरा भईल। एह 9 दिन के जतरा के पीछे कईगो लोक विधी-विधान आ इतिहास बा। जवना के जानल जाव।
सबसे पहिले जतरा सुरू होखे के 15 दिन पहिले चलल जाव जब भगवान बेमार होले।

भगवान के बेमारी (अनासर):
भगवान जगन्नाथ रथ जतरा से 15 दिन पहिले बीमार पड़ जाले। जेठ के पूर्णिमा के दिन 108 घईला पानी से नहईला के बाद उ बेमार पर जाले, जवना के बाद उ 15 दिन खातिर एकांत में रहेले, एकरा के 'अनासर' कहल जाला। एह घरी उ कोई के दर्शन ना देवे ले। एह समय भगवान के खिचड़ी, हलुक खाएक, जड़ी-बूटि आ काढ़ा दिहल जाला।
एगो कथा के ई बा कि भगवान जगन्नाथ के आपन भगत माधव दास एक बेर बहुते बेमार पर गईले तब भगवान के उनकर दुख ना देखल गईल । आ उनकर बेमारी के अपना प ले लेले। तब उ 15 दिन तेले उ बेमार पड़ गईले, तब से इ परंपरा चलल आवता। एह घरी मंदिर के कपाट बंद रहेला। 15 दिन बाद भगवान ठीक होके रथजतरा खातिर तैयार हो जाले।

रथ जतरा (रथयात्रा)
आषाढ़ महिना के शुक्ल पक्ष के दुतिया तिथि के भगवान जगन्नाथ, बहिन सुभद्रा आ श्री बलभद्र जी के रथ जतरा के बड़ी धूमधाम से निकलेला।

देवी लक्ष्मी के जतरा (हेरा पंचमी):
देवी लक्ष्मी जी के जतरा (हेरा पंचमी) रथ जतरा के पांचवा दिन मनावल जाला, एह दिन देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिले खातिर गुंडिचा मंदिर जाली आ भगवान के ओरहन देली। एकरा के हेरा पंचमी के नाव से जानल जाला।

लवटे के जतरा (बहुदा यात्रा) :
लवटे के जतरा (बहुदा यात्रा) के साथे खतम होला। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र आ सुभद्रा जी के रथ आषाढ़ के अंजोरिया दसमी के मुख्य मंदिर में लवटे के उत्सव हऽ।

भगवान के साजावे के उत्सव (सुना बेशा):
भगवान जगन्नाथ के रथ जतरा से लवटला के बाद इ उत्सव मनावल जाला। आषाढ़ के अंजोरिया एकादशी के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र आ देवी सुभद्रा के सोना के गहना से सजावल जाला। भगवान के ब्रह्मांड के शासक के रूप में महिमा, दिव्य रूप आ शक्ति के प्रतीक हऽ सुना बेशा।

सुना बेशा के इतिहास:
सुना बेशा के परंपरा राजा कपिलेंद्र देव (1435-1466 ई.) के समय से शुरू भईल रहन। राजा दक्षिण भारत में एगो विजयी अभियान से लवटला के बाद, भगवान जगन्नाथ के ओडिशा के शासक के रूप में मनले आ उहे सोना के गहना से सजाने के परंपरा शुरू कईले।
भगवान जगन्नाथ के भगत लोगन खातिर एगो महत्वपूर्ण उत्सव हऽ, जब भगवान जगन्नाथ, बहिन सुभद्रा आ श्री बलभद्र जी के दिव्य रूप के दर्शन कके उनकर आशीर्वाद पावे मौका मिलेला।

एह बीच जेकर दर्शन बहुते जरूरी बा उ हनुमान जी बाड़े।
भगवान जगन्नाथ के उत्पत्ति आ उनकर जतरा के जिकिर के बीच में हनुमान जी के जिकिर बहुते जरूरी बा। हनुमान जी जेकरा के बंदी हनुमान कहल जाला।
उनकर कथा बा कि भगवान विष्णु हनुमान जी के जगन्नाथ पुरी के रक्षा करें के जिम्मेदारी देले। तब समुन्दर के तट प हनुमान जी रक्षक के रूप में खड़ा रहले। बाकी हनुमान जी आपन स्वामी के दर्शन खातिर जब-जब नगर में घुसस त पीछे-पीछे समुन्दरो घुसें लागे तब नगर में तबाही मच जाए। हनुमान जी के इ हरकत से भगवान तंग आके उनका के बेड़ी में बांध दिहले। तब हनुमान जी भगवान के गोहरावे लगले, तब भगवान जगन्नाथ जी कहले तोहरा से भेंट करे हमही आवत रहम। तबसे समुन्दर तट प हनुमान जी बेड़ी में बंधाईल बाड़े। अईसन मनता बा कि जगन्नाथ जी के दर्शन से पहिले हनुमान जी दर्शन जरूरी हऽ ना त जगन्नाथ जी दर्शन के पुन अधुरा रहेला।

भगवान जगन्नाथ मंदिर के संस्थापक मालवा के राजा इंद्रद्युम्न आ महारानी गुंडिचा के बिशेष आभार ।

जय जगन्नाथ
जय देवि सुभद्रा
जय बलभद्र जी
जय श्री हनुमान

𑂄𑂔 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂣𑂴𑂩𑂰 𑂦𑂆𑂪। 𑂉𑂯 9 𑂠𑂱𑂢 𑂍𑂵 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂣𑂲𑂓𑂵 𑂍𑂆𑂏𑂷 𑂪𑂷𑂍 𑂫𑂱𑂡𑂲-𑂫𑂱𑂡𑂰𑂢 𑂄 𑂅𑂞𑂱𑂯𑂰𑂮 𑂥𑂰। 𑂔𑂫𑂢𑂰 𑂍𑂵 𑂔𑂰𑂢𑂪 𑂔𑂰𑂫।
𑂮𑂥𑂮𑂵 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂵 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂮𑂳𑂩𑂴 𑂯𑂷𑂎𑂵 𑂍𑂵 15 𑂠𑂱𑂢 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂵 𑂒𑂪𑂪 𑂔𑂰𑂫 𑂔𑂥 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂥𑂵𑂧𑂰𑂩 𑂯𑂷𑂪𑂵।

𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂥𑂵𑂧𑂰𑂩𑂲 (𑂃𑂢𑂰𑂮𑂩):
𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂮𑂵 15 𑂠𑂱𑂢 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂵 𑂥𑂲𑂧𑂰𑂩 𑂣𑂙़ 𑂔𑂰𑂪𑂵। 𑂔𑂵𑂘 𑂍𑂵 𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝𑂱𑂧𑂰 𑂍𑂵 𑂠𑂱𑂢 108 𑂐𑂆𑂪𑂰 𑂣𑂰𑂢𑂲 𑂮𑂵 𑂢𑂯𑂆𑂪𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠 𑂇 𑂥𑂵𑂧𑂰𑂩 𑂣𑂩 𑂔𑂰𑂪𑂵, 𑂔𑂫𑂢𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠 𑂇 15 𑂠𑂱𑂢 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂉𑂍𑂰𑂁𑂞 𑂧𑂵𑂁 𑂩𑂯𑂵𑂪𑂵, 𑂉𑂍𑂩𑂰 𑂍𑂵 '𑂃𑂢𑂰𑂮𑂩' 𑂍𑂯𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰। 𑂉𑂯 𑂐𑂩𑂲 𑂇 𑂍𑂷𑂆 𑂍𑂵 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂢𑂰 𑂠𑂵𑂫𑂵 𑂪𑂵। 𑂉𑂯 𑂮𑂧𑂨 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂎𑂱𑂒𑂙़𑂲, 𑂯𑂪𑂳𑂍 𑂎𑂰𑂉𑂍, 𑂔𑂙़𑂲-𑂥𑂴𑂗𑂱 𑂄 𑂍𑂰𑂛़𑂰 𑂠𑂱𑂯𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰।
𑂉𑂏𑂷 𑂍𑂟𑂰 𑂍𑂵 𑂆 𑂥𑂰 𑂍𑂱 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂄𑂣𑂢 𑂦𑂏𑂞 𑂧𑂰𑂡𑂫 𑂠𑂰𑂮 𑂉𑂍 𑂥𑂵𑂩 𑂥𑂯𑂳𑂞𑂵 𑂥𑂵𑂧𑂰𑂩 𑂣𑂩 𑂏𑂆𑂪𑂵 𑂞𑂥 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂇𑂢𑂍𑂩 𑂠𑂳𑂎 𑂢𑂰 𑂠𑂵𑂎𑂪 𑂏𑂆𑂪 । 𑂄 𑂇𑂢𑂍𑂩 𑂥𑂵𑂧𑂰𑂩𑂲 𑂍𑂵 𑂃𑂣𑂢𑂰 𑂣 𑂪𑂵 𑂪𑂵𑂪𑂵। 𑂞𑂥 𑂇 15 𑂠𑂱𑂢 𑂞𑂵𑂪𑂵 𑂇 𑂥𑂵𑂧𑂰𑂩 𑂣𑂙़ 𑂏𑂆𑂪𑂵, 𑂞𑂥 𑂮𑂵 𑂅 𑂣𑂩𑂁𑂣𑂩𑂰 𑂒𑂪𑂪 𑂄𑂫𑂞𑂰। 𑂉𑂯 𑂐𑂩𑂲 𑂧𑂁𑂠𑂱𑂩 𑂍𑂵 𑂍𑂣𑂰𑂗 𑂥𑂁𑂠 𑂩𑂯𑂵𑂪𑂰। 15 𑂠𑂱𑂢 𑂥𑂰𑂠 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂘𑂲𑂍 𑂯𑂷𑂍𑂵 𑂩𑂟𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂞𑂶𑂨𑂰𑂩 𑂯𑂷 𑂔𑂰𑂪𑂵।

𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 (𑂩𑂟𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰)
𑂄𑂭𑂰𑂛़ 𑂧𑂯𑂱𑂢𑂰 𑂍𑂵 𑂬𑂳𑂍𑂹𑂪 𑂣𑂍𑂹𑂭 𑂍𑂵 𑂠𑂳𑂞𑂱𑂨𑂰 𑂞𑂱𑂟𑂱 𑂍𑂵 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟, 𑂥𑂯𑂱𑂢 𑂮𑂳𑂦𑂠𑂹𑂩𑂰 𑂄 𑂬𑂹𑂩𑂲 𑂥𑂪𑂦𑂠𑂹𑂩 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂙़𑂲 𑂡𑂴𑂧𑂡𑂰𑂧 𑂮𑂵 𑂢𑂱𑂍𑂪𑂵𑂪𑂰।

𑂠𑂵𑂫𑂲 𑂪𑂍𑂹𑂭𑂹𑂧𑂲 𑂍𑂵 𑂔𑂞𑂩𑂰 (𑂯𑂵𑂩𑂰 𑂣𑂁𑂒𑂧𑂲):
𑂠𑂵𑂫𑂲 𑂪𑂍𑂹𑂭𑂹𑂧𑂲 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂔𑂞𑂩𑂰 (𑂯𑂵𑂩𑂰 𑂣𑂁𑂒𑂧𑂲) 𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂣𑂰𑂁𑂒𑂫𑂰 𑂠𑂱𑂢 𑂧𑂢𑂰𑂫𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰, 𑂉𑂯 𑂠𑂱𑂢 𑂠𑂵𑂫𑂲 𑂪𑂍𑂹𑂭𑂹𑂧𑂲 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂮𑂵 𑂧𑂱𑂪𑂵 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂏𑂳𑂁𑂙𑂱𑂒𑂰 𑂧𑂁𑂠𑂱𑂩 𑂔𑂰𑂪𑂲 𑂄 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂋𑂩𑂯𑂢 𑂠𑂵𑂪𑂲। 𑂉𑂍𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂯𑂵𑂩𑂰 𑂣𑂁𑂒𑂧𑂲 𑂍𑂵 𑂢𑂰𑂫 𑂮𑂵 𑂔𑂰𑂢𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰।

𑂪𑂫𑂗𑂵 𑂍𑂵 𑂔𑂞𑂩𑂰 (𑂥𑂯𑂳𑂠𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰) :
𑂪𑂫𑂗𑂵 𑂍𑂵 𑂔𑂞𑂩𑂰 (𑂥𑂯𑂳𑂠𑂰 𑂨𑂰𑂞𑂹𑂩𑂰) 𑂍𑂵 𑂮𑂰𑂟𑂵 𑂎𑂞𑂧 𑂯𑂷𑂪𑂰। 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟, 𑂥𑂪𑂦𑂠𑂹𑂩 𑂄 𑂮𑂳𑂦𑂠𑂹𑂩𑂰 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂩𑂟 𑂄𑂭𑂰𑂛़ 𑂍𑂵 𑂃𑂁𑂔𑂷𑂩𑂱𑂨𑂰 𑂠𑂮𑂧𑂲 𑂍𑂵 𑂧𑂳𑂎𑂹𑂨 𑂧𑂁𑂠𑂱𑂩 𑂧𑂵𑂁 𑂪𑂫𑂗𑂵 𑂍𑂵 𑂇𑂞𑂹𑂮𑂫 𑂯ऽ।

𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂮𑂰𑂔𑂰𑂫𑂵 𑂍𑂵 𑂇𑂞𑂹𑂮𑂫 (𑂮𑂳𑂢𑂰 𑂥𑂵𑂬𑂰):
𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂩𑂟 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂮𑂵 𑂪𑂫𑂗𑂪𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠 𑂅 𑂇𑂞𑂹𑂮𑂫 𑂧𑂢𑂰𑂫𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰। 𑂄𑂭𑂰𑂛़ 𑂍𑂵 𑂃𑂁𑂔𑂷𑂩𑂱𑂨𑂰 𑂉𑂍𑂰𑂠𑂬𑂲 𑂍𑂵 𑂠𑂱𑂢 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟, 𑂥𑂪𑂦𑂠𑂹𑂩 𑂄 𑂠𑂵𑂫𑂲 𑂮𑂳𑂦𑂠𑂹𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂮𑂷𑂢𑂰 𑂍𑂵 𑂏𑂯𑂢𑂰 𑂮𑂵 𑂮𑂔𑂰𑂫𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰। 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂥𑂹𑂩𑂯𑂹𑂧𑂰𑂁𑂙 𑂍𑂵 𑂬𑂰𑂮𑂍 𑂍𑂵 𑂩𑂴𑂣 𑂧𑂵𑂁 𑂧𑂯𑂱𑂧𑂰, 𑂠𑂱𑂫𑂹𑂨 𑂩𑂴𑂣 𑂄 𑂬𑂍𑂹𑂞𑂱 𑂍𑂵 𑂣𑂹𑂩𑂞𑂲𑂍 𑂯ऽ 𑂮𑂳𑂢𑂰 𑂥𑂵𑂬𑂰।

𑂮𑂳𑂢𑂰 𑂥𑂵𑂬𑂰 𑂍𑂵 𑂅𑂞𑂱𑂯𑂰𑂮:
𑂮𑂳𑂢𑂰 𑂥𑂵𑂬𑂰 𑂍𑂵 𑂣𑂩𑂁𑂣𑂩𑂰 𑂩𑂰𑂔𑂰 𑂍𑂣𑂱𑂪𑂵𑂁𑂠𑂹𑂩 𑂠𑂵𑂫 (1435-1466 𑂆.) 𑂍𑂵 𑂮𑂧𑂨 𑂮𑂵 𑂬𑂳𑂩𑂴 𑂦𑂆𑂪 𑂩𑂯𑂢। 𑂩𑂰𑂔𑂰 𑂠𑂍𑂹𑂭𑂱𑂝 𑂦𑂰𑂩𑂞 𑂧𑂵𑂁 𑂉𑂏𑂷 𑂫𑂱𑂔𑂨𑂲 𑂃𑂦𑂱𑂨𑂰𑂢 𑂮𑂵 𑂪𑂫𑂗𑂪𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂰𑂠, 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂋𑂙𑂱𑂬𑂰 𑂍𑂵 𑂬𑂰𑂮𑂍 𑂍𑂵 𑂩𑂴𑂣 𑂧𑂵𑂁 𑂧𑂢𑂪𑂵 𑂄 𑂇𑂯𑂵 𑂮𑂷𑂢𑂰 𑂍𑂵 𑂏𑂯𑂢𑂰 𑂮𑂵 𑂮𑂔𑂰𑂢𑂵 𑂍𑂵 𑂣𑂩𑂁𑂣𑂩𑂰 𑂬𑂳𑂩𑂴 𑂍𑂆𑂪𑂵।
𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂦𑂏𑂞 𑂪𑂷𑂏𑂢 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂉𑂏𑂷 𑂧𑂯𑂞𑂹𑂫𑂣𑂴𑂩𑂹𑂝 𑂇𑂞𑂹𑂮𑂫 𑂯ऽ, 𑂔𑂥 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟, 𑂥𑂯𑂱𑂢 𑂮𑂳𑂦𑂠𑂹𑂩𑂰 𑂄 𑂬𑂹𑂩𑂲 𑂥𑂪𑂦𑂠𑂹𑂩 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂠𑂱𑂫𑂹𑂨 𑂩𑂴𑂣 𑂍𑂵 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂍𑂍𑂵 𑂇𑂢𑂍𑂩 𑂄𑂬𑂲𑂩𑂹𑂫𑂰𑂠 𑂣𑂰𑂫𑂵 𑂧𑂸𑂍𑂰 𑂧𑂱𑂪𑂵𑂪𑂰।

𑂉𑂯 𑂥𑂲𑂒 𑂔𑂵𑂍𑂩 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂥𑂯𑂳𑂞𑂵 𑂔𑂩𑂴𑂩𑂲 𑂥𑂰 𑂇 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂥𑂰𑂙़𑂵।
𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂍𑂵 𑂇𑂞𑂹𑂣𑂞𑂹𑂞𑂱 𑂄 𑂇𑂢𑂍𑂩 𑂔𑂞𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂔𑂱𑂍𑂱𑂩 𑂍𑂵 𑂥𑂲𑂒 𑂧𑂵𑂁 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂔𑂱𑂍𑂱𑂩 𑂥𑂯𑂳𑂞𑂵 𑂔𑂩𑂴𑂩𑂲 𑂥𑂰। 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂔𑂵𑂍𑂩𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂁𑂠𑂲 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂍𑂯𑂪 𑂔𑂰𑂪𑂰।
𑂇𑂢𑂍𑂩 𑂍𑂟𑂰 𑂥𑂰 𑂍𑂱 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂫𑂱𑂭𑂹𑂝𑂳 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂣𑂳𑂩𑂲 𑂍𑂵 𑂩𑂍𑂹𑂭𑂰 𑂍𑂩𑂵𑂁 𑂍𑂵 𑂔𑂱𑂧𑂹𑂧𑂵𑂠𑂰𑂩𑂲 𑂠𑂵𑂪𑂵। 𑂞𑂥 𑂮𑂧𑂳𑂢𑂹𑂠𑂩 𑂍𑂵 𑂞𑂗 𑂣 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂩𑂍𑂹𑂭𑂍 𑂍𑂵 𑂩𑂴𑂣 𑂧𑂵𑂁 𑂎𑂙़𑂰 𑂩𑂯𑂪𑂵। 𑂥𑂰𑂍𑂲 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂄𑂣𑂢 𑂮𑂹𑂫𑂰𑂧𑂲 𑂍𑂵 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂎𑂰𑂞𑂱𑂩 𑂔𑂥-𑂔𑂥 𑂢𑂏𑂩 𑂧𑂵𑂁 𑂐𑂳𑂮𑂮 𑂞 𑂣𑂲𑂓𑂵-𑂣𑂲𑂓𑂵 𑂮𑂧𑂳𑂢𑂹𑂠𑂩𑂷 𑂐𑂳𑂮𑂵𑂁 𑂪𑂰𑂏𑂵 𑂞𑂥 𑂢𑂏𑂩 𑂧𑂵𑂁 𑂞𑂥𑂰𑂯𑂲 𑂧𑂒 𑂔𑂰𑂉। 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂅 𑂯𑂩𑂍𑂞 𑂮𑂵 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂞𑂁𑂏 𑂄𑂍𑂵 𑂇𑂢𑂍𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂵𑂙़𑂲 𑂧𑂵𑂁 𑂥𑂰𑂁𑂡 𑂠𑂱𑂯𑂪𑂵। 𑂞𑂥 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂍𑂵 𑂏𑂷𑂯𑂩𑂰𑂫𑂵 𑂪𑂏𑂪𑂵, 𑂞𑂥 𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂔𑂲 𑂍𑂯𑂪𑂵 𑂞𑂷𑂯𑂩𑂰 𑂮𑂵 𑂦𑂵𑂁𑂗 𑂍𑂩𑂵 𑂯𑂧𑂯𑂲 𑂄𑂫𑂞 𑂩𑂯𑂧। 𑂞𑂥𑂮𑂵 𑂮𑂧𑂳𑂢𑂹𑂠𑂩 𑂞𑂗 𑂣 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂥𑂵𑂙़𑂲 𑂧𑂵𑂁 𑂥𑂁𑂡𑂰𑂆𑂪 𑂥𑂰𑂙़𑂵। 𑂃𑂆𑂮𑂢 𑂧𑂢𑂞𑂰 𑂥𑂰 𑂍𑂱 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂔𑂲 𑂍𑂵 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂮𑂵 𑂣𑂯𑂱𑂪𑂵 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢 𑂔𑂲 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂔𑂩𑂴𑂩𑂲 𑂯ऽ 𑂢𑂰 𑂞 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂔𑂲 𑂠𑂩𑂹𑂬𑂢 𑂍𑂵 𑂣𑂳𑂢 𑂃𑂡𑂳𑂩𑂰 𑂩𑂯𑂵𑂪𑂰।

𑂦𑂏𑂫𑂰𑂢 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟 𑂧𑂁𑂠𑂱𑂩 𑂍𑂵 𑂮𑂁𑂮𑂹𑂟𑂰𑂣𑂍 𑂧𑂰𑂪𑂫𑂰 𑂍𑂵 𑂩𑂰𑂔𑂰 𑂅𑂁𑂠𑂹𑂩𑂠𑂹𑂨𑂳𑂧𑂹𑂢 𑂄 𑂧𑂯𑂰𑂩𑂰𑂢𑂲 𑂏𑂳𑂁𑂙𑂱𑂒𑂰 𑂍𑂵 𑂥𑂱𑂬𑂵𑂭 𑂄𑂦𑂰𑂩।

𑂔𑂨 𑂔𑂏𑂢𑂹𑂢𑂰𑂟
𑂔𑂨 𑂠𑂵𑂫𑂱 𑂮𑂳𑂦𑂠𑂹𑂩𑂰
𑂔𑂨 𑂥𑂪𑂦𑂠𑂹𑂩 𑂔𑂲
𑂔𑂨 𑂬𑂹𑂩𑂲 𑂯𑂢𑂳𑂧𑂰𑂢

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04/07/2025

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27/06/2025

Big shout out to my newest top fans! 💎 मेरे नए टॉप फ़ैन का बहुत-बहुत आभार! 💎 Deepesh Kumar, Niraj Sinha, Niranjan Srivastava, Rajeev Sinha, Kaushlesh Pandey, Sunil Kumar Srivastava, Sanskar Krishna, Anil Akhauri, Ayush Sinha, Ankit Kumar, Anshuman Kumar, Alok Yadav, Anjani Gupta

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