26/06/2026
विश्व रंग का यह 👇🏽 पोस्टर देखकर मुझे गहरी निराशा और आश्चर्य हुआ।
जहां तक मेरी जानकारी है, "विश्व रंग" टैगोर विश्व विद्यालय, भोपाल द्वारा संयोजित एवं संचालित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच से जारी किसी भी सामग्री में कला और संस्कृति से जुड़े तथ्यों की शुद्धता और प्रामाणिकता का विशेष ध्यान अपेक्षित होता है।
इस पोस्टर में "जनगढ़ कलम" को "गोंड कला" के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है। कला परंपराओं की अपनी ऐतिहासिक यात्रा, विकास क्रम और सामाजिक संदर्भ होते हैं। "जनगढ़ कलम" एक विशिष्ट और नवीन चित्रशैली है, जिसका प्रारंभ महान कलाकार स्व. जनगण सिंह श्याम से होता है। जनगण सिंह श्याम परधान गोंड समुदाय से थे, किंतु उनके द्वारा विकसित इस नवीन कला शैली को सीधे-सीधे पारंपरिक गोंड चित्रकला कहना ऐतिहासिक और कलात्मक दृष्टि से सही नहीं है।
यह सर्वविदित है कि गोंड समाज और गोंड राजवंश की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा रही है, जिसके पुरातात्विक और लिखित प्रमाण उपलब्ध हैं। लेकिन इस पारंपरिक इतिहास में "जनगढ़ कलम" जैसी विशिष्ट चित्रशैली के प्रमाण नहीं मिलते। इसलिए इसे गोंड चित्रकला के रूप में प्रस्तुत करना वास्तविकता और इतिहास की दृष्टि से पुनर्विचार का विषय है।
"जनगढ़ कलम" का प्रस्थान बिंदु स्व. जनगण सिंह श्याम हैं और उन्हीं के सृजन से इस कला परंपरा का उद्भव हुआ। किसी नवीन कला उपलब्धि को उसकी मौलिक पहचान के साथ सम्मान देना ही उस कलाकार और कला के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि देश और दुनिया को इस अद्वितीय चित्रशैली का योगदान देने वाले मेरे पूज्य पिता स्व. जनगण सिंह श्याम का नाम उनकी तस्वीर के स्थान पर मेरे बड़े पापा के लड़के भाई व्यंकट सिंह श्याम की तस्वीर के साथ प्रकाशित किया गया है। यह एक गंभीर त्रुटि है।
यह प्रश्न स्वाभाविक है कि ऐसी सामग्री तैयार करने से पहले संबंधित कलाकार परिवार या जानकार लोगों से संवाद क्यों नहीं किया गया? आवश्यक जानकारी का सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
मेरा उद्देश्य किसी संस्था या आयोजन के सद्प्रयासों को कमतर आंकना नहीं है। "विश्व रंग" जैसे प्रतिष्ठित मंच से मेरी विनम्र अपेक्षा है कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाए और हुई त्रुटियों को सुधारा जाए, ताकि कला और कलाकार दोनों की गरिमा बनी रहे।
मैं अपनी बात इसलिए सार्वजनिक रूप से रख रहा हूं क्योंकि यह जानकारी मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई। आशा है कि इसे एक सकारात्मक सुझाव के रूप में लिया जाएगा।
— मयंक सिंह श्याम