24/06/2026
📜🇮🇳 लोग जब अपने देश में अंग्रेज़ो से नही लड़ पा रहे थे,तब इन्होंने देश से बाहर एक निर्वासित भारतीय सरकार बना दी ।।यह कोई मामूली बात है कि जब आपके ख्याल में आज़ादी के बाद का इतना बड़ा सपना हो ।
यही वजह है कि उन्हें अखण्ड भारत का पहला प्रधानमंत्री कहा जाता है । अखण्ड भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं मौलाना बरकतउल्ला भोपाली और पहले राष्ट्रपति हैं राजा महेंद्र प्रताप सिंह ।
🇮🇳✊ राजा महेन्द्र प्रताप,मौलाना बरकतउल्ला और उबैदुल्लाह सिंधी समेत बहुत से देशप्रेमियों ने मिलकर 1915 में काबुल में भारत की पहली निर्वासित सरकार (Provisional Government of Free India) बनाई। राजा महेन्द्र प्रताप इसके राष्ट्रपति, बरकतुल्लाह प्रधानमंत्री और मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी गृहमंत्री बने।
⚔️ उनकी योजना थी कि युद्धबंदी भारतीय सैनिकों को संगठित कर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाए। बाद में इसी मॉडल को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने अधिक व्यापक रूप से अपनाया । आज़ाद हिन्द सरकार और आज़ाद हिन्द फ़ौज के रूप में।
🌍 युद्ध की बदलती परिस्थितियों और अफ़ग़ानिस्तान-ब्रिटेन समझौते के कारण उनकी योजनाएँ सफल नहीं हो सकीं, लेकिन बरकतुल्लाह ने हार नहीं मानी। वे रूस, यूरोप, मध्य एशिया और अमेरिका में भारत की आज़ादी के लिए अभियान चलाते रहे।
🕯️ 27 सितंबर 1927 को सैन फ़्रांसिस्को में ग़दर पार्टी के लिए काम करते हुए उनका निधन हुआ। वे अपनी मातृभूमि की आज़ादी देखने की तमन्ना दिल में लिए दुनिया से विदा हुए। उनका सम्मान देश का हर देशप्रेमी करता था । आज़ादी के समय मौजूद रही हर लीडरशिप ने इनका बेहद सम्मान किया । पंडित जी और सुभाष बाबू भी इनका बहुत सम्मान करते थे ।
🏛️ हुआ यह कि मौलाना बरकतुल्लाह के जाने के बाद मुल्क आज़ाद हुआ । भोपाल विश्विद्यालय का नाम उनके सम्मान में बरकतुल्लाह विश्विद्यालय कर दिया गया ।।यह तब किया गया जब उनके संघर्ष को सम्मान दिया गया ।
⚠️ फिर आई बीजे पार्टी की हुक़ूमत और उसने इस विश्वविद्यालय का नाम बरकतुल्लाह से बदलने का फरमान जारी कर दिया । कुछ बीजे पार्टी के समर्थक कहते हैं कि हम उनके खिलाफ क्यों हैं । ज़रा उनके साथ रहने की एक नही,चौथाई वजह ही बता दीजिए । जिस दल की सोच में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और उसके नायकों के लिए कोई स्थान ही नही है । उसका साथ हम भला एक पल भी क्यों ही देंगे ।
🔥 अखण्ड भारत के प्रथम प्रधानमंत्री मौलाना बरकतुल्लाह का नाम विश्विद्यालय से हटाने से वह मिट थोड़े ही जाएंगे । वह तो अमर हैं मगर तुम लोग ज़रूर इतिहास में सम्मान से कोसो मीलों दूर रहोगे । इतिहास का एक नियम है, कुंठित व्यक्ति का,कुंठित सोच का उसमें कोई सम्मानजनक स्थान नही है ।
🇮🇳🌹 मौलाना बरकतुल्लाह भारत का गर्व थे और रहेंगे...