11/07/2026
Dear Aur On / .
गीत और कविता - " माँ और पापा की जोड़ी के साथ तुम्हारे "
माँ पापा आज ये दिल फिर से मुस्कुराए
आप दोनों संग बीते लम्हे लौट के आए
इतनी सी दुनिया, इतनी सी दुआ मेरी
आपकी हँसी में छुपी है मेरी हर सुबह मेरी
घर की दीवारों पर प्यार के रंग आपने लिखे
थक कर भी सपनों के दिए हमेशा आपने रखे
छोटी-छोटी बातों में बड़ा सा आसमान दिया
मुझको जीना सिखाया, और अपना मान दिया
शुभ सालगिरह, माँ पापा, दिल से यही बोलूँ
आपके नाम की छाँव में हर दिन मैं फलूँ-फूलूँ
शुभ सालगिरह, माँ पापा, साथ रहे ये सफर
आपकी जोड़ी रहे ऐसे ही, जैसे चाँद और सहर
कभी बारिश, कभी धूप, पर हाथ कभी छोड़ा नहीं
मुश्किलों के मोड़ पर भी साथ कभी मोड़ा नहीं
आपकी नज़रों में मैंने अपना घर देखा है
हर दर्द के पार एक मीठा-सा सवेरा देखा है
माँ की ममता, पापा की हिम्मत का सहारा
इन दोनों से ही तो चमका है मेरा हर सितारा
जो भी हूँ, वो आपके प्यार की पहचान हूँ
आप दोनों की दुआओं का एक छोटा-सा अरमान हूँ
शुभ सालगिरह, माँ पापा, दिल से यही बोलूँ
आपके नाम की छाँव में हर दिन मैं फलूँ-फूलूँ
शुभ सालगिरह, माँ पापा, साथ रहे ये सफर
आपकी जोड़ी रहे ऐसे ही, जैसे चाँद और सहर
आज के दिन बस इतना-सा उपहार है
आपके बिना ये जीवन अधूरा संसार है
हाथ थामे रहो, यूँ ही हँसते रहो सदा
मेरी हर ख़ुशी में बस आप ही हो, माँ पापा
शुभ सालगिरह, माँ पापा, दिल से यही बोलूँ
आपके नाम की छाँव में हर दिन मैं फलूँ-फूलूँ
शुभ सालगिरह, माँ पापा, साथ रहे ये सफर
आपकी जोड़ी रहे ऐसे ही, जैसे चाँद और सहर