Kavya Kumbh

Kavya Kumbh Pawan Kumar Srivstava

17/05/2026

मानव हमेशा जोड़ा जाता जानवर से
गिरगिट की तरह क्यों रंग बदलता
कहकर तुझे ही तो चिढ़ाया जाता
तुझे ही तो रोका जाता
मत बहा घड़ियाली आँसू
कुछ तो तेरी चाल को नहीं छोड़ते
कौआ चला हंस की चाल
कहकर तुझे ही जलील किया करते
मजा तो तब आता तेरी परेशानी को
भैस से ही जोड़ा जाता
कहकर गई भैस पानी मे
जब काम न होने पर तू खिसियाता
खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचने का भी
खिताब तूझे ही दिया जाता
कभी कभी दुधारू गाय तक कहा जाता
तुझे भैस बना बीन बजाया जाता
ये तो मुहावरे हैं जनाब
जिसे तूने ही बनाया
अपनी तुलना जानवर से कराया
जब कभी गुस्सा आया
तो फिर आदमी हैं कि जानवर
इस राग को तूने ही तो गाया
इन मुहावरों के चक्कर खुद को फंसाया

18/04/2026

महिला आरक्षण

महिला आरक्षण की क्यों जरूरत
हर पार्टी में होती महिलाओं की भागीदारी
महिला विधेयक नहीं पास हो पाया
पार्टियों ने क्या खोया क्या पाया
ये तो भविष्य ही बतलायेंगा
आगामी चुनावों में कुछ असर दिखाएगा
फिर वर्षो का इंतजार नहीं खत्म हो पाया
नारी को अपना अधिकार नहीं मिल पाया
जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी भागीदारी
कहाँ गई पार्टियों की सोच भारी
कहीं यह पुरुष मानसिकता का तो शिकार नहीं
स्त्रियों को आगे न बढ़ाने का विचार तो नहीं
अगर हैं इच्छा शक्ति दलों में
एक तिहाई महिलाओ को टिकट दीजिए
या महिलाओं को आगे बढ़ाने का शोर न कीजिए
नारी इतनी नहीं हैं विचारी
आज नहीं तो कल छीन कर ले लेगी अपनी भागीदारी
अब तो आधी आबादी के विचार को लग गई चिन्गारी

स्वरचित
पवन कुमार श्रीवास्तव

03/04/2026

जंग

पूरी दुनिया परेशान
हो रहा युद्ध घमासान
चौधरी का गलत हुआ अनुमान
किसी से कमजोर नहीं ईरान
दूसरों के कंधे पर बंदूक चलाना
कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना
पूरा खेल तो है तेल का
परमाणु बम तो एक जरिया हैं
दुनिया जितनी चाहें बढ़ना
युद्ध का काम विकास को विनाश में बदलना
तेल का विकल्प खोजना होगा
या ऐसे ही अपने हाल पर रोना होगा
आबादी पर नियंत्रण होना चाहिए
न हो तो नए स्रोतो को खोजना चाहिए
अब तो चौधराहट खत्म होना चाहिए
सभी को आजादी के साथ जीने देना चाहिए
दुनिया की भलाई के लिए
अब युद्ध खत्म होना चाहिए

03/04/2026

पैर बोला हाथ से
पूजते सब मुझे
हाथ बोला अहसान मानों
सब मेरे द्वारा ही तुझे पूजते
पैर बोला जो जुड़ा जमीन से
उसी की होती हैं पूजा
हाथ बोला शुक्र मनाओ
मेरी वज़ह से तेरी होती पूजा
मेरी वज़ह से तेरा वज़ूद हैं
लोग कहते पैरों पर खड़े हो
अगर हाथ को काम नहीं
तो सब कुछ बेकार हैं
अगर हाथ में काम नहीं
एक कदम न चल पाओगे
जहाँ हो वहीं रह जाओगे
तभी अन्य अंगों ने पुकारा
आपस में लड़ना क्या
हर अंग का योगदान है
ये शरीर एक वरदान है
इसे चलाने में हम सब का योगदान हैं
न होती आखें क्या कर पाते
न होता कान कुछ न सुन पाते
हम सब का आपसी मेल
तभी चल रहा दुनिया का खेल

25/03/2026

अपना घर

अपने घर का होता सपना
किस्मत से बनता घर अपना
अपनी छत का मजा कुछ और हैं
वरना घर तो मिल जाता किराये पर
विस्थापित का डर तो हमेशा रहता
बढ़ते किराये का भी रोक नहीं
कई शर्तों के साथ पड़ता रहना
किराया इ एम आई पर पड़ता भारी
हमेशा शिफ्ट होने का रहता डर
तभी तो देखता हैं अपना घर
इ एम आई और व्याज का होता डर
नहीं खरीद पाते अपना घर
घर लेना हो तो ले लीजिए
इ एम आई व्याज पर ध्यान न दीजिए
कुछ दिन तो बोझ लगेगा
फिर तो पता नहीं चलेगा
घर का तो दाम हमेशा बढ़ना हैं
सबसे ज्यादा अपनी छत का एहसास
यही तो अपने घर की बात खास
शुरू में तो घर महंगा लगेगा
कुछ सालों बाद बिल्कुल नहीं खलेगा
आइए तुरंत अपने घर का देखे ख्वाब
अपने बजट का ध्यान रक्खे जनाब

द्वारा
पवन कुमार श्रीवास्तव
प्रयागराज

20/03/2026

बृज गोपाल के साथ होली

19/03/2026

मानव हमेशा जोड़ा जाता जानवर से
गिरगिट की तरह क्यों रंग बदलता
कहकर तुझे ही तो चिढ़ाया जाता
तुझे ही तो रोका जाता
मत बहा घड़ियाली आँसू
कुछ तो तेरी चाल को नहीं छोड़ते
कौआ चला हंस की चाल
कहकर तुझे ही जलील किया करते
मजा तो तब आता तेरी परेशानी को
भैस से ही जोड़ा जाता
कहकर गई भैस पानी मे
जब काम न होने पर तू खिसियाता
खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचने का
तुझे ही खिताब दिया जाता
कभी कभी दुधारू गाय तक कहा जाता
तुझे भैस बना बीन बजाया जाता
ये तो मुहावरे हैं जनाब
जिसे तूने ही बनाया
अपनी तुलना जानवर से कराया
जब कभी गुस्सा आया
आदमी हैं कि जानवर
इस राग को तूने ही तो गाया
इन मुहावरों के चक्कर खुद को फंसाया

08/03/2026

स्त्री

औरत अपना हिस्सा कहाँ जी पाती है
वह तो हिस्सों में ही जी पाती है
कभी किसी की बिटिया कहलाती है
कभी किसी की पत्नी बनकर
तो कभी बहू कहलाती है
कभी किसी की माँ बनकर
इसी तरह जिन्दगी भर
वह हिस्सों में जी पाती है
उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं
इन्हीं सांसारिक रिश्तों में सिमट जाती है
स्त्री केवल स्त्री ही रहकर
हर रूप में अपना किरदार निभाती है
पितृ समाज मैं वह अपना स्थान नहीं पाती है
वह टुकड़ों में ही रहकर जी पाती है
उसे उसका हक मिलना चाहिए
कितना दर्द वह सहन करती है
बच्चों को जन्म देकर भी
संतान पिता की कहलाती है
सीता तो कभी दुर्गा का नाम देकर
महिमा मण्डित की जाती है
स्त्री स्त्री ही कहलाती है
रिश्तों की दुहाई देकर
स्त्री ही प्रताड़ित की जाती है
इसका समाधान होना जरूरी है
स्त्री खुद ही स्त्री की एक कमजोरी है

महिला दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं

द्वारा
पवन कुमार श्रीवास्तव
स्रोत
स्वरचित श्याम स्वर

04/03/2026

होली

होली खेलिहा संभल के
रंगवा डलिहा सोच समझ के
कही रंगवा में भंग न हो जाय
त्यौहार में तनातनी न हो जाय
होली खेलिहा संभल के
कही का गुस्सा कही निकल न जाय
माहौल गरम न हो जाय
होली खेलिहा संभल के
भाई चारे का त्यौहार वा
कौनो तुनक न जाय
होली खेलिहा संभल के
साली होये चाहे साला
सोच समझ के रंग डाला
न चाहे तो न डाला
रंग से एलर्जी हो तो खेला फूल से
जबरन रंग न डलिहा भूल से
होली खेलिहा अपनो के संग
मन न होय न डलिहा रंग
कही हो न जाय रंग में भंग
उतर न जाय भाई चारे का रंग
होली खेलिहा संभल के

होली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

रचयिता
पवन कुमार श्रीवास्तव
भानू प्रवाह

दिनाँक 25 जनवरी 2026 को बड़ौदा स्वरोजगार केंद्र मे एसेसमेंट संपन्न हुआ
26/01/2026

दिनाँक 25 जनवरी 2026 को बड़ौदा स्वरोजगार केंद्र मे
एसेसमेंट संपन्न हुआ

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