Kavya Kumbh

Kavya Kumbh Pawan Kumar Srivstava

31/05/2026

फलों का तू हैं राजा
खास हैं तेरी मिठास
फिर भी तुझे लोग आम कहे
तेरा नाम तो होना चाहिए खास
हर रूप में तू स्वीकार
कच्चा हो तो भी गुणकारी
पक जाये तो और हो जाए खास
कहीं पीला तो कहीं हरा
कभी माथे पर सिंदूरी ताज
हर कोई तेरे स्वाद का दीवाना
कभी खाना कभी पीना
कभी छिलके का भी स्वाद
इतना खास फिर भी नाम हैं आम

25/05/2026

कुछ भूत पेड़ के नीचे बैठ
आपस में कुछ बतिया रहे थे
इन्सानों के एक से एक किस्से सुना रहे थे
आपस में इन्सानों से न उलझने की चर्चा कर रहे थे
इंसानों से थोड़ा दूरी बनाए रखने की बात कर रहे थे
क्या जमाना आ गया
भूत इंसानों से डर रहे हैं
तभी सामने से आ रहे एक आदमी को देख
भूत सभा छोड़ भाग गए
अपने पीछे एक मैसेज छोड़ गए
इस कलयुग में आदमी भूत से बड़ा हैं
जिन्हें हम भूत समझते हैं
वो तो वास्तव में इन्सान हैं
भूत का लबादा ओढ़े खड़ा हैं
आदमी का स्तर कितना गिर गया
भूत भी इंसानों की हरकत से डर गया

20/05/2026

हम अपना काम नहीं कर रहे
इसीलिये तो हम पिछड़ रहे हैं
टीचर जिसे पढ़ाना होता
वो तो जनगणना कर रहे
बच्चों का जिन्हें कैरियर बनाना होता
वो तो कभी मतदान
कभी सर्वे करा रहें हैं
हम इसीलिए पिछड़ रहे हैं
कुछ तो अपना काम छोड़
कभी सोना
तो कभी म्युचुअल फण्ड बेच रहे
बीमा कंपनी होने के बाद भी
बैंक वाले जीवन बीमा कर रहे हैं
अपना काम छोड़ दूसरों का काम
कर रहे
इसीलिए हम पिछड़ रहे
आल राउंडर बनाने के चक्कर
बोलिंग बैटिंग भूल रहे
इसीलिए हम पिछड़ रहे
मलटी परपज के चक्कर मे
मूल व्यवसाय का परपज भूल रहे
इसीलिए हम पिछड़ रहे
अब समय आ गया
जिसमें विशेषज्ञ हो वहीं काम करे
चारो तरफ हाथ पैर न मारे

पवन कुमार श्रीवास्तव
Prayagraj

17/05/2026

मानव हमेशा जोड़ा जाता जानवर से
गिरगिट की तरह क्यों रंग बदलता
कहकर तुझे ही तो चिढ़ाया जाता
तुझे ही तो रोका जाता
मत बहा घड़ियाली आँसू
कुछ तो तेरी चाल को नहीं छोड़ते
कौआ चला हंस की चाल
कहकर तुझे ही जलील किया करते
मजा तो तब आता तेरी परेशानी को
भैस से ही जोड़ा जाता
कहकर गई भैस पानी मे
जब काम न होने पर तू खिसियाता
खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचने का भी
खिताब तूझे ही दिया जाता
कभी कभी दुधारू गाय तक कहा जाता
तुझे भैस बना बीन बजाया जाता
ये तो मुहावरे हैं जनाब
जिसे तूने ही बनाया
अपनी तुलना जानवर से कराया
जब कभी गुस्सा आया
तो फिर आदमी हैं कि जानवर
इस राग को तूने ही तो गाया
इन मुहावरों के चक्कर खुद को फंसाया

18/04/2026

महिला आरक्षण

महिला आरक्षण की क्यों जरूरत
हर पार्टी में होती महिलाओं की भागीदारी
महिला विधेयक नहीं पास हो पाया
पार्टियों ने क्या खोया क्या पाया
ये तो भविष्य ही बतलायेंगा
आगामी चुनावों में कुछ असर दिखाएगा
फिर वर्षो का इंतजार नहीं खत्म हो पाया
नारी को अपना अधिकार नहीं मिल पाया
जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी भागीदारी
कहाँ गई पार्टियों की सोच भारी
कहीं यह पुरुष मानसिकता का तो शिकार नहीं
स्त्रियों को आगे न बढ़ाने का विचार तो नहीं
अगर हैं इच्छा शक्ति दलों में
एक तिहाई महिलाओ को टिकट दीजिए
या महिलाओं को आगे बढ़ाने का शोर न कीजिए
नारी इतनी नहीं हैं विचारी
आज नहीं तो कल छीन कर ले लेगी अपनी भागीदारी
अब तो आधी आबादी के विचार को लग गई चिन्गारी

स्वरचित
पवन कुमार श्रीवास्तव

03/04/2026

जंग

पूरी दुनिया परेशान
हो रहा युद्ध घमासान
चौधरी का गलत हुआ अनुमान
किसी से कमजोर नहीं ईरान
दूसरों के कंधे पर बंदूक चलाना
कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना
पूरा खेल तो है तेल का
परमाणु बम तो एक जरिया हैं
दुनिया जितनी चाहें बढ़ना
युद्ध का काम विकास को विनाश में बदलना
तेल का विकल्प खोजना होगा
या ऐसे ही अपने हाल पर रोना होगा
आबादी पर नियंत्रण होना चाहिए
न हो तो नए स्रोतो को खोजना चाहिए
अब तो चौधराहट खत्म होना चाहिए
सभी को आजादी के साथ जीने देना चाहिए
दुनिया की भलाई के लिए
अब युद्ध खत्म होना चाहिए

03/04/2026

पैर बोला हाथ से
पूजते सब मुझे
हाथ बोला अहसान मानों
सब मेरे द्वारा ही तुझे पूजते
पैर बोला जो जुड़ा जमीन से
उसी की होती हैं पूजा
हाथ बोला शुक्र मनाओ
मेरी वज़ह से तेरी होती पूजा
मेरी वज़ह से तेरा वज़ूद हैं
लोग कहते पैरों पर खड़े हो
अगर हाथ को काम नहीं
तो सब कुछ बेकार हैं
अगर हाथ में काम नहीं
एक कदम न चल पाओगे
जहाँ हो वहीं रह जाओगे
तभी अन्य अंगों ने पुकारा
आपस में लड़ना क्या
हर अंग का योगदान है
ये शरीर एक वरदान है
इसे चलाने में हम सब का योगदान हैं
न होती आखें क्या कर पाते
न होता कान कुछ न सुन पाते
हम सब का आपसी मेल
तभी चल रहा दुनिया का खेल

25/03/2026

अपना घर

अपने घर का होता सपना
किस्मत से बनता घर अपना
अपनी छत का मजा कुछ और हैं
वरना घर तो मिल जाता किराये पर
विस्थापित का डर तो हमेशा रहता
बढ़ते किराये का भी रोक नहीं
कई शर्तों के साथ पड़ता रहना
किराया इ एम आई पर पड़ता भारी
हमेशा शिफ्ट होने का रहता डर
तभी तो देखता हैं अपना घर
इ एम आई और व्याज का होता डर
नहीं खरीद पाते अपना घर
घर लेना हो तो ले लीजिए
इ एम आई व्याज पर ध्यान न दीजिए
कुछ दिन तो बोझ लगेगा
फिर तो पता नहीं चलेगा
घर का तो दाम हमेशा बढ़ना हैं
सबसे ज्यादा अपनी छत का एहसास
यही तो अपने घर की बात खास
शुरू में तो घर महंगा लगेगा
कुछ सालों बाद बिल्कुल नहीं खलेगा
आइए तुरंत अपने घर का देखे ख्वाब
अपने बजट का ध्यान रक्खे जनाब

द्वारा
पवन कुमार श्रीवास्तव
प्रयागराज

20/03/2026

बृज गोपाल के साथ होली

Address

Allahabad
211016

Telephone

+918787218066

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Kavya Kumbh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Establishment

Send a message to Kavya Kumbh:

Shortcuts

Share

Category