Hindi kavita

Hindi kavita पीर जब बेहिसाब होती है शायरी लाजवाब होती है इक न इक दिन तो ऐसा आता है शक्ल हर बेनकाब होती है

26/01/2021

Jai hind

13/09/2020

आईना आज रिश्वत लेते पकड़ा गया दिल में दर्द था और चेहरा हंसता हुआ पकड़ा गया

20/08/2020

तिरी आंखों को पढ़ता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से
कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

तिरी यादों की ख़ुश्बू खिड़कियों में रक़्स करती है
तिरे ग़म में सुलगता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

न जाने हो गया हूं इस क़दर हस्सास मैं कब से
किसी से बात करता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

मैं सारा दिन बहुत मसरूफ़ रहता हूं मगर जूंही
क़दम चौखट पे रखता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

हर इक मुफ़्लिस के माथे पर अलम की दास्तानें हैं
कोई चेहरा भी पढ़ता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

बड़े लोगों के ऊंचे बद-नुमा और सर्द महलों को
ग़रीब आंखों से तकता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

तिरे कूचे से अब मेरा तअ'ल्लुक़ वाजिबी सा है
मगर जब भी गुज़रता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

हज़ारों मौसमों की हुक्मरानी है मिरे दिल पर
'वसी' मैं जब भी हंसता हूं तो आंखें भीग जाती हैं

No! Aap pal do pal ke shayyar nahi, naa hi pal do pal ki appki jawaani hai….Na hi pal do pal ki aapki hasti hai, na hi p...
20/08/2020

No!
Aap pal do pal ke shayyar nahi, naa hi pal do pal ki appki jawaani hai….
Na hi pal do pal ki aapki hasti hai, na hi pal do pal ki appki kahaani hai!�Aap kal us pal ka hissa the, aap har pal ka hissa honge…..
Masroof zamaana aapko hi, har Waqt yaad kare!
Kumar

चल मेरा खलिहान देख ले कैसा है शमशान देख ले , चल मेरा खलिहान देख ले । अगर देखना है मुर्दा तो , चलकर एक किसान देख ले । सर्...
12/08/2020

चल मेरा खलिहान देख ले कैसा है
शमशान देख ले , चल मेरा खलिहान देख ले ।
अगर देखना है मुर्दा तो ,
चलकर एक किसान देख ले ।
सर्वनाश का सर्वे कर - कर ,
पटवारी धनवान देख ले ।
सिर्फ अंगूठा लिया सेठ ने ,
कितना मेहरबान देख ले ।
मरहम में रख नमक लगाते ,
सरकारी अहसान देख ले देहरी पर मेसी फर्गुसन ,
भीतर बीयाबान देख ले ।
मानसून तक मनमाना है ,
बस बेबस मुस्कान देख ले ।
कुर्की की डिक्री पर अंकित ,
गिरता हुआ मकान देख ले ।
कल पेसी है तहसीलों में ,
कोदो कुटकी धान देख ले ।
सम्मन मिला कचेहरी से है ,
अधिग्रहण फरमान देख ले तस्वीरों के पार झांक कर ,
गांवों का उत्थान देख ले ।
आ इंडिया से बाहर आ ,
आकर हिन्दुस्तान देख ले ।

12/08/2020

हाथ पकड़ ले अपनी तरह हो सकता हूं मैं
भीड़ बहुत है ले इस में खो सकता हूं मैं
पीछे छूटे साथी याद आते हैं
वर्ना इस दौड़ में सबसे आगे हो सकता हुं मैं
इक मासूम सा बच्चा मुझ में अब तक जिन्दा है छोटी छोटी बातों में भी रो सकता हूं मैं

Jai SiyaRam
06/08/2020

Jai SiyaRam

21/07/2020

अभी मुझ में कहीं
बाकी थोड़ी सी है ज़िन्दगी
जागी धड़कन नई
जाना ज़िन्दा हूं मैं तो अभी
कुछ ऐसी लगन इस लम्हे में है
ये लम्हा कहाँ था मेरा
अभ है सामने
इसे छु लूं ज़रा
मर जाऊं या जी लूं ज़रा
खुशियाँ चूम लूं
या रो लूं ज़रा
मर जाऊं या जी लूं ज़रा
अभी मुझ में कहीं
बाकी थोड़ी सी है ज़िन्दगी
ओ धूप में जलते हुए तन को
छाया पेड़ की मिल गयी
रूठे बच्चे की हंसी जैसे
फुसलाने से फिर खिल गयी
कुछ ऐसा ही अब महसुस दिल को हो रहा है
बरसों के पुराने ज़ख्मों पे मरहम लगा सा है
कुछ ऐसा रहम, इस लम्हे में है
ये लम्हा कहाँ था मेरा
अभ है सामने
इसे छु लूं ज़रा
मर जाऊं या जी लूं ज़रा
खुशियाँ चूम लूं
या रो लूं ज़रा
मर जाऊं या जी लूं ज़रा
डोर से टूटी पतंग जैसी
थी ये जिंदगानी मेरी
आज हो कल हो मेरा ना हो
हर दिन थी कहानी मेरी
एक बंधन नया पीछे से अब मुझको बुलाये
आने वाले कल की क्यूँ फ़िकर मुझको सता जाये
इक ऐसी चुभन, इस लम्हें में है
ये लम्हा कहाँ था मेरा
अभ है सामने
इसे छु लूं ज़रा
मर जाऊं या जी लूं ज़रा
खुशियाँ चूम लूं
या रो लूं ज़रा
मर जाऊं या जी लूं ज़रा

फैला रूह में हर वक्त उजाला होता हैमाँ का प्यार तो अमृत का प्याला होता हैसोचते ही हर दुआ खुद पूरी हो जाती हैमाँ का रूप ही...
20/07/2020

फैला रूह में हर वक्त उजाला होता है
माँ का प्यार तो अमृत का प्याला होता है
सोचते ही हर दुआ खुद पूरी हो जाती है
माँ का रूप ही सबसे बड़ा शिवाला होता है

20/07/2020
20/07/2020
27/06/2020

Hanuman Chalisa. 🙏🏻

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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